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TATA-AMBANI भी चला सकेंगे खुद की ट्रेन, MP के इन शहरों में होगी शुरुआत

Updated: IST
मध्यप्रदेश में जल्द ही प्राइवेट ट्रेन भी दौड़ती नजर आएगी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस बात के संकेत दिए हैं। रेलवे इसके लिए इंदौर, भोपाल और जबलपुर के बीच इसे चलाएगा।

भोपाल। मध्यप्रदेश में जल्द ही प्राइवेट ट्रेन भी दौड़ती नजर आएगी। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस बात के संकेत दिए हैं। रेलवे इसके लिए इंदौर, भोपाल और जबलपुर के बीच इसे चलाएगा। इसके लिए 450 किलोमीटर का नया रूट तैयार किया जाएगा। माना जा रहा है कि निजी क्षेत्र की कंपनियों टाटा, बिड़ला, रिलायंस और अडाणी जैसी कंपनियां भी इस क्षेत्र में कूद सकती है। यह मध्यप्रदेश की पहली निजी ट्रेन होगी।

सूत्रों के मुताबिक पश्चिम मध्य रेलवे और राज्य सरकार का एक ज्वाइंट वेंचर इस प्रोजेक्ट पर काम करेगा। प्रोजेक्ट एक कंपनी बनाकर रन किया जाएगा। इसका नाम स्पेशल परपज व्हीकल (SPV) होगा। गौरतलब है कि इससे पहले सितंबर 2016 में भी निजी क्षेत्र की कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए थे।

SPV ट्रेक बिछाने, निजी क्षेत्रों को ट्रेनें चलाने के लिए पैसा जुटाने समेत मेंटेनेंस आदि जिम्मेदारी भी निभाएगी। पहली ट्रेन इंदौर-जबलपुर चलाने की है। यह कंपनी इसके लिए दोनों शहरों को जोड़ने के लिए 450 किलोमीटर का ट्रेक भी बिछाएगी। इसके लिए चार हजार 600 करोड़ का खर्च भी आंका गया है।

हाल ही में जबलपुर आए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने इस नए प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रेलवे ज्ल दी मध्यप्रदेश सरकार के साथ एक समझौता करने वाली है।

फंड जुटाएगी भारतीय रेल
मध्यप्रदेश सरकार के साथ मिलकर रेलवे फंड जुटाने के लिए एक ज्वाइंट वेंचर बनाएगी। इसमें दोनों का शेयर होगा। इससे अलग ट्रेन के कोच उपलब्ध कराने, इसका संचालन करने और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी रेलवे की ही होगी।

एमपी भी लगाएगा पूंजी
मध्यप्रदेश सरकार इस प्रोजेक्ट में रेलवे के साथ मिलकर पूंजी भी लगाएगी। सरकार पर रेलवे के साथ ज्वाइंट वेंचर में मिलकर नई परियोजना तय करने की पूरी जवाबदारी होगी।

ट्रेनों का किराया तय करेगी SPV
SPV पूरी परियोजना की लागत तय कर निजी क्षेत्र से पैसा जुटाने से लेकर ट्रेनों को होने वाले फायदे और नुकसान पर नियंत्रण रख सकेगी। यह ट्रेनों का किराया घटाना-बढ़ाना, उनके समय पर चलने और यात्री सुविधाओं पर भी अपना लक्ष्य फोकस करेगी।

विदेशी मदद की जगह राज्यों की मदद
रेलवे ने यह कदम फारेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के विरोध को देखते हुए उठाया है। इसके लिए रेलवे बोर्ड अब विदेशी कंपनियों को प्रोत्साहन करने की जगह भारत के राज्यों से ही मदद लेगी। यह स्टेट डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट कहलाएगा।

यह भी है खास
-MP में बनने वाले रेल प्रोजेक्ट पर सिर्फ रेलवे निवेश नहीं करेगा। इसके लिए राज्य सरकार और रेलवे (जोन) के बीच MOU साइन होगा।
-साइन के बाद में ज्वाइंट वेंचर तैयार होगा। यह एक की तरह की कंपनी होगा,जिसका चेयरमैन,स्टॉफ और बजट सब कुछ रेलवे बोर्ड और जोन से अलग रहेगा।
-इंदौर और जबलपुर के बीच नया रूट बनाया जाएगा।
-कुछ पुराने रूट को भी इसमें शामिल किया जाएगा, जहां ट्रैफिक का लोड नहीं होगा।
- गाडरवारा और जबलपुर के बीच पुराना ही रूट रहेगा।
- इसके बाद इंदौर के बीच नया रूट तय होगा।
- रूट का सर्वे का काम पूरा हो गया है।

माल वाहक ट्रेनें भी चला सकेंगी कंपनियां
निजी क्षेत्र की कंपनियां अब मालवाहक ट्रेनें चला सकेंगी। रेलवे के एक अधिकारी के मुताबिक सीमेंट, स्टील, आटो, केमिकल्स और खाद्यान्न से जुड़ी कंपनियों ने स्पेशल माल वाहक ट्रेनें चलाने की योजना में दिलचस्पी दिखाई है। रेल डिवेलपमेंट अथॉरिटी के गठन को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसका रास्ता साफ हो गया है। कंपनियां निजी टर्मिनल्स बनाने पर निवेश करेंगी और ट्रेन भी चला सकेंगी।

तो पटरियां भी बिछा सकते हैं टाटा-अंबानी
अब वह दिन दूर नहीं जब अंबानी, टाटा और बिड़ला जैसे धनाढ्य अपने नाम से ट्रेन दौड़ा सकेंगे। वह अपनी मर्जी से तय स्टेशन के बीच अपनी स्वयं की पटरियां भी डाल सकेंगे। सरकारी पटरी का भी किराया देकर उपयोग कर सकेंगे।रेलवे ने इसके लिए पिछले साल निजी कंपनियों से प्रस्ताव मांगे थे। इसके लिए निजी कंपनी को ट्रेन, प्लेटफॉर्म, सिग्नल के साथ अन्य व्यय का किराया रेलवे को देना होगा। ट्रेन संचालन के लिए कंपनी को अपना स्टाफ रखना होगा, यदि उन्हें सरकारी स्टाफ की जरूरत है, तो वे इसकी राशि रेलवे को चुकाकर उन्हें साथ जोड़ सकेंगे। रेलवे ने निजीकरण के लिए विभिन्न संगठनों के विरोध के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्ताव मंगवाए हैं। रेलवे बोर्ड दिल्ली के मैकेनिकल इंजीनियर वीएन चौधरी ने इसे तैयार किया है। सितंबर 2016 तक निजी कंपनियों से यह प्रस्ताव मांगे गए थे।

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