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W' Down Syndrome Day : एमपी के सभी डॉक्टर्स को दी जाएगी ट्रेनिंग, गर्भ में ही जांच लेंगे डाउन सिंड्रोम

Updated: IST
एमपी अब पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां गर्भ में ही शिशु के डाउन सिंड्रोम से पीडि़त होने का पता लगाया जा सकेगा...

भोपाल। एमपी अब पहला ऐसा राज्य बनने जा रहा है, जहां गर्भ में ही शिशु के डाउन सिंड्रोम से पीडि़त होने का पता लगाया जा सकेगा। जांच के बाद यदि डाउन सिंड्रोम शिशु पाया जाता है, तो महिलाओं को गर्भपात की सलाह दी जा सकेगी। भोपाल में वल्र्ड डाउन सिंड्रोम डे पर इसकी शुरुआत की जाएगी। यदि ये जांच सक्सेस रही, तो एमपी में हर साल हजारों अजन्मे शिशुओं और उनके परिजनों को राहत मिलेगी।

समर्पण केंद्र की पहल, एक्सपर्ट टीम करेगी ट्रेंड

भोपाल का समर्पण सेंटर इसकी शुरुआत करने जा रहा है। सेंटर पर एक कार्यशाला आयोजित की गई। आपको बता दें कि गर्भ में ही डाउन सिंड्रोम की पहचान के लिए विशेषज्ञों की टीम डॉक्टर्स के साथ ही पेरेंट्स को भी ट्रेंड करेगी।

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इन एक्सपट्र्स में दिल्ली के जेपी हॉस्पिटल की एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. सीमा ठाकुर, नेहा गुप्ता और दिल्ली की डॉक्टर छाया सांभरिया की टीम डॉक्टर्स को ट्रेंड करेगी।

कार्यशाला में पहुंचे 51 जिलों के डॉक्टर्स

समर्पण सेंटर की ओर से मंगलवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में एमपी के 51 जिला अस्पतालों के तीन-तीन डॉक्टर्स पहुंचे। इनमें स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ के साथ ही सोनोलॉजिस्ट भी शामिल हुए।

ये है डाउन सिंड्रोम

डाउन सिंड्रोम ऐसी बीमारी है जिससे पीडि़त बच्चे मानसिक रूप से कमजोर हो जाते हैं। गर्भ में ही उनका शारीरिक विकास बाधित होने लगता है। इनमें उनके सिर का आकार बड़ा होना, हथेलियों में एक ही रेखा होना आदि सिम्पटम्स शामिल हैं। ऐसे बच्चों की समय पर पहचान की जाए, तो उन्हें समय पर इलाज देकर इस बीमारी से सामने आने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है।

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स्पेशलिस्ट का कहना है कि इस बीमारी से पीडि़त बच्चों के शरीर के क्रोमोजोम के जोड़ों में से 21वां क्रोमोजोम दो की जगह तीन होता है। यही कारण है कि साल के तीसरे माह की 21 तारीख यानीकि डाउन सिंड्रोम डे को पूरे विश्व में मनाया जाता है।

पेरेंट्स को भी ट्रेनिंग

इस जांच के लिए प्रदेश के सभी जिलों में संचालित किए जा रहे समर्पण सेंटर्स की टीम को ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान उन्हें डाउन सिंड्रोम पीडि़त बच्चों की पहचान करने के साथ ही जरूरी जांच और इलाज के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही पीडि़त शिशुओं के परिजनों को भी विशेेष रूप से ट्रेंड किया जाएगा।

हजार में एक बच्चा इसका शिकार

* विशेषज्ञों के मुताबिक एक हजार में से एक बच्चा इस बीमारी से ग्रसित है। पूरे देश में डाउन सिंड्रोम से पीडि़त लाखों बच्चे जन्म लेते हैं।
* जानकारी के मुताबिक इस ट्रेनिंग का मकसद अवेयरनेस है, ताकि बच्चों को सही देखभाल मिल सके और ये बच्चे सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी सकें।

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