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Video Icon प्रशासन की करतूत: कानून को ताक पर रखकर माफिया का बना दिया शस्‍त्र लाइसेंस और पासपोर्ट

Updated: IST Bijnor
जागरूक लोगों ने सीएम योगी से की दबंग का लाइसेंस और पासपोर्ट जब्त करने की मांग

बिजनौर. कहते हैं आम हो या खास कानून सभी के लिए एक है, लेकिन यहां तो कानून का न सिर्फ मजाक बनाया गया, बल्कि नियमों के सामने कानून ने अपनी आंखें भी बंद कर एक माफिया काे बंदूक का लाइसेंस जारी कर दिया। इतना ही नहीं इस माफिया के ऊपर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज होने के बाद भी इसका पासपोर्ट तक जारी कर दिया गया। इस दौरान माफिया दो बार सऊदी अरब भी हो आया। जबकि बंदूक का लाइसेंस हो या पासपोर्ट दोनों के बनवाने के लिए नीचे से ऊपर तक सभी अधिकारियों ने अपनी आंख मूंद इस माफिया के पक्ष में अपनी रिपोर्ट लगा दी। और इस तरह एक अपराधी काे लाइसेंस और पासपोर्ट जारी कर दिया गया। इस मामले की जानकारी जब गांव वालों को हुई तो गांव के जागरूक लोगों ने अब इस दबंग प्रधान की शिकायत जिले के आला अफसरों सहित सूबे के सीएम से की है। ग्रामीणों ने एक अपराधी के बंदूक के लाइसेंस और पासपोर्ट को जब्त करने की मांग उठाई है। मामला मीडिया में आने के बाद अफसरों में अब हड़कंप की स्थिति है।

उत्तर-प्रदेश के बिजनौर जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जो न सिर्फ भ्रष्‍ट अफसरों की पोल खोलकर रख देगा, बल्कि कई छोटे से लेकर बड़े अफसरों को कटघरे में भी लाकर खड़ा कर देगा। हम आपको एक ऐसे मामले से रूबरू करा रहे हैं जिसने सरकारी महकमे की पोल खोल कर रख दी है।

तस्‍वीर में जो सफेद कुर्ता पायजामा पहने ये शख्स थानेदार रमेश यादव से बात कर रहा है। ये नगीना देहात थाने के जोगीरमपुरी गांव का मौजूदा ग्राम प्रधान है और इसका नाम मोहम्मद रफी है। रफी खनन का बहुत बड़ा कारोबारी है। रफी थानेदार से लेकर एसपी तक और तहसीलदार से लेकर डीएम तक अपनी पहुंच रखता है। रफी के ऊपर 7 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उसके बावजूद भी रफी ने अपना बंदूक लाइसेंस जारी करा लिया और पासपोर्ट भी बनवा लिया है। जबकि नियमों के मुताबिक बंदूक का लाइसेंस और पासपोर्ट उसी व्यक्ति का जारी हो सकता है। जिसके ऊपर एक भी मुकदमा थाने में दर्ज न हो और कोर्ट में विचाराधीन न हो, लेकिन यहां तो एक-दो नहीं, बल्कि कई मुकदमे दर्ज हैं और कोर्ट में भी विचाराधीन हैं। उसके बाद भी जिले के तत्‍कालीन डीएम और एसपी ने लाइसेंस और पासपोर्ट जारी कर दिया है।

बता दें कि बन्दूक का लाइसेंस बनवाने के लिए थाने से लेकर एसपी तक और तहसीलदार से लेकर डीएम तक की रिपोर्ट लगती है उसके बाद लाइसेंस जारी होता है। वहीं पासपोर्ट बनवाने के लिए थाने से लेकर एसपी देहात और एलआईयू की रिपोर्ट लगाई जाती है।

मीडिया के पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि रफी के ऊपर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज होने के बाद भी तत्कालीन थाना अध्यक्ष दानवीर गिरी ने अपनी कुर्सी को भी दांव पर लगा दिया और एक अपराधी के मुकदमे को छुपा लिया और जांच रिपोर्ट में प्रधान को पाक साफ बता दिया।

प्रधान रफी का आपराधिक इतिहास

- पहला मुकदमा साल 1998 में मुकदमा अपराध संख्या 59 / 98, धारा -141, 145 ,147, 323, 336, 506

- दूसरा मुकदमा अपराध संख्या -316/2002 धारा-323, 504, 506

- तीसरा मुकदमा अपराध संख्या-84/2004 में दर्ज हुआ धारा 307, 325, 506

- चौथा मुकदमा अपराध संख्या -570 / 2007 धारा -323, 325, 326, 506

- पांचवां मुकदमा अपराध संख्या -102 / 2010 धारा -420, 467, 468, 471, 409, 504, 506

- छठा मुकदमा अपराध संख्या -173 / 2011 धारा -147, 148, 452, 336, 427, 323, 504, 506

- सातवां मुकदमा अपराध संख्या -184/ 2012 धारा -452, 323, 307, 329, 504

- आठवा मुकदमा अपराध संख्या -77 / 2017 धारा -147, 148, 149, 307, 504, 506

ये सभी मुकदमे नगीना देहात थाने में दर्ज होने पर भी तत्कालीन थानेदारों ने कानून को तांक पर रखकर एक माफिया के लाइसेंस और पासपोर्ट बना दिए हैं।

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