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बिजनौर के गावों में पशुओं को भी मिलता है वीआईपी ट्रीटमेंट, जानिए क्या है वजह

Updated: IST Animal under net
बिजनौर के गंगा खादर इलाके के गावों में किसान पशुओं को भी मच्छरदानी में रखते हैं।

रोहित त्रिपाठी/बिजनौर. अभी तक आपने मक्खी और मच्छरों से परेशान इंसानों को देखा होगा और उन्हें इन से छुटकारा पाने के लिए मच्छरदानियों का प्रयोग करते भी देखा होगा, लेकिन बिजनौर के गंगा खादर इलाके के गावों में किसान पशुओं को भी मच्छरदानी में रखते हैं। दरअसल, यहां गंदगी की वजह से जबर्दस्त मक्खी और मच्छरों का प्रकोप है। लिहाजा, परेशान गांव वाले अपने पशुओं को इस मुसीबत से निजात दिलाने के लिए उन्हें बड़ी-बड़ी मच्छरदानियों में रखते हैं। मक्खी और मच्छरों के प्रकोप से डरे पशु भी जंगलों में चरने के बाद सीधे इन मच्छरदानियों में पहुंच जाते हैं।
दरअसल, बिजनौर गंगा के किनारे बसा जिला होने की वजह से और उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को गंगा की सहायक नदियों में डाले जाने के कारण यह पूरा इलाका मक्खी और मच्छरों से भरा पड़ा है। मक्खी और मच्छरों से परेशान इस इलाके के ग्रामीण अपने पशुओं को लेकर बहुत चिंतित हैं। उनके पशु इन मक्खी और मच्छरों की वजह से न तो चारा खा पाते हैं और न ही वो आराम से रह पाते हैं, जिससे छुटकारा पाने को रामपुर सहाय के ग्रामीणों को उन्हें बड़ी- बड़ी मच्छरदानियों ने बांधना पड़ता है और उन्हें इन मच्छरदानियों में ही चारा खिलाना पड़ता है। यहां सुबह होते ही ग्रामीण अपने पशुओं की मच्छरदानी को उठाकर उन्हें बहार निकलते हैं और शाम को उन्हें इन मच्छरदानियों के भीतर करके बंद कर दिया जाता है। ऐसा इस इलाके के लोग पिछले दस बारह सालों से करते आ रहे हैं।
अपने जानवरों के लिए मच्छरदानी लगाने वाले राजपाल और हंसो की माने तो यहां पहले ऐसे हालात नहीं थे। अब से करीब बारह साल पहले इस छोइया नदी में साफ पानी बहता था, लेकिन जब से इस नदी में पेट्रोकेमिकल, पेपर मिलों का प्रदूषित पानी डाला जाने लगा है, तब से इस इलाके के लोगों और उनके पशुओं की मुसीबत बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि प्रशासन से कई बार गुहार लगाने पर भी उनकी कोई सुनने को तैयार नहीं है, प्रशासन की अनदेखी के चलते वो नरक की जिंदगी जीने को मजबूर हैं।

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