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विधानसभा आरटीआई शुल्क के खिलाफ याचिका खारिज, अधिवक्ता पर 10 हजार का कास्ट

Updated: IST Assembly rejects petition against RTI fee, cast of
कोर्ट ने कहा-अधिवक्ताओं को आरटीआई के व्यवसाय की इजाजत नहीं

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने विधानसभा के आरटीआई शुल्क के खिलाफ लगाई गई याचिका खारिज कर दी है। साथ ही अधिवक्ता पर 10 हजार का कास्ट लगाया है। कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं को आरटीआई के व्यवसाय की इजाजत नहीं है। वहीं शासन ने अपने जवाब में ये बताया है कि विधानसभा में आरटीआई आवेदन के लिए लिया जाने वाले शुल्क 500 रुपए से घटाकर 300 रुपए कर दिया गया है।

अंबिकापुर जिला न्यायालय के अधिवक्ता डीके सोनी ने विधानसभा आरटीआई शुल्क के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी। इसमें कहा गया कि सूचना की प्रक्रिया फीस और लागत नियमन 2011 की धारा 6.1 के अंतर्गत सूचना का आवेदन देने की निर्धारित फीस 10 रुपए है। जबकि विधानसभा द्वारा अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आवेदन शुल्क 5 सौ रुपए निर्धारित कर दिया गया, जो अधिक है। इस वृद्धि को वापस लिया जाना चाहिए। यह भी बताया गया कि विधानसभा ने नोटिफिकेशन के माध्यम से 30 जून 2011 को प्रति पेज शुल्क 2 रुपए से बढ़ाकर 15 रुपए प्रति पेज कर दिया था।

मामले की प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सूचना आयोग, राज्य शासन एवं विधानसभा को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। विधानसभा की ओर से प्रस्तुत जवाब में कहा गया कि नियमन 2011 की धारा 28 के अंतर्गत ये प्रावधान किया गया है कि विधानसभा नियमों व फीस के निर्धारण के लिए सक्षम है। आरटीआई के तहत जवाब देने में मैनपावर व समय लगता है। हालांकि जवाब में यह भी बताया गया कि आवेदन फीस को 500 रुपए से घटाकर 300 रुपए कर दिया गया है। लेकिन प्रति पेज शुल्क 15 रुपया लागू रहेगा। शासन की ओर से जवाब में इलाहाबाद हाईकोर्ट का उदाहरण दिया गया, जहां आवेदन शुल्क 5 सौ रुपए निर्धारित किया गया है। जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर एवं जस्टिस संजय के अग्रवाल की बेंच ने सोमवार को इस याचिका को खारिज करते हुए अधिवक्ता डीके सोनी पर 10 हजार रुपए कास्ट लगाते हुए कहा कि अधिवक्ताओं को आरटीआई के व्यवसाय की इजाजत नहीं है। शासन की ओर से मामले की पैरवी सहायक महाधिवक्ता आशुतोष सिंह कछवाहा ने की।

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