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एबीवीपी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा कर्मियों से की हाथापाई, फाड़ी वर्दी

Updated: IST central university
प्रदेश सहमंत्री सन्नी केशरी और बीयू के छात्रसंघ उपाध्यक्ष आलिंद तिवारी के नेतृत्व में कुलपति का घेराव और ज्ञापन सौंपने के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी पहुंचे। चुनावी माहौल के कारण यूनिवर्सिटी से मिले निर्देश का हवाला देकर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें मेनगेट पर ही रोक दिया।

बिलासपुर. सेंट्रल यूनिवर्सिटी (सीयू) में चुनाव के ठीक पहले घमासान शुरू हो गया। मंगलवार को दोपहर तब विवाद की स्थिति निर्मित हो गई, जब कुलपति को ज्ञापन सौंपने जा रहे एबीवीपी के पदाधिकारियों को प्रवेश द्वार पर तैनात गार्डों ने रोक दिया। इससे नाराज पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उनके साथ हाथपाई करते हुए उनकी वर्दी फाड़ दी। वे जबरदस्ती प्रशासनिक भवन के अंदर घुसने लगे। खबर मिलने पर कोनी पुलिस पहुंची। लेकिन पुलिस को दोहरी नाराजगी झेलनी पड़ी। पहले छात्रसंगठन के पदाधिकारियों से पुलिस की झड़प हुई, बाद में कुलपति ने भी थानेदार को यह कहकर हड़का दिया कि बिना अनुमति परिसर में कैसे आए।

घटना दोपहर करीब 1 बजे यूनिवर्सिटी प्रवेश द्वार के सामने की है। बताया जा रहा है कि एबीवीपी ने भी छात्रसंघ चुनाव के लिए अपने संगठन से कुछ छात्रों को चुनाव लड़ाने के लिए नामांकन जमा करवाया है। लेकिन उनके नामांकन निरस्त हो गए। इससे नाराज एबीवीपी के 10-15 कार्यकर्ता प्रदेश सहमंत्री सन्नी केशरी और बीयू के छात्रसंघ उपाध्यक्ष आलिंद तिवारी के नेतृत्व में कुलपति का घेराव और ज्ञापन सौंपने के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी पहुंचे। चुनावी माहौल के कारण यूनिवर्सिटी से मिले निर्देश का हवाला देकर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें मेनगेट पर ही रोक दिया। इसससे विवाद हो गया। एबीवीपी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने सुरक्षा कर्मियों से झूमाझटकी की। इसमें एक सुरक्षा कर्मी की वर्दी फट गई। इसके बाद पदाधिकारी और कार्यकर्ता प्रशासनिक भवन तक पहुंच गए। सुरक्षा इंचार्ज की सूचना पर कोनी थाना प्रभारी एचएन शुक्ला दलबल समेत मौके पर पहुंचे। पुलिस ने छात्र नेताओं को रोकने का प्रयास किया तो छात्र नेताओं ने पुलिस से भी हाथापाई और बदसलूकी की। इसके बाद थानेदार ने समझाइश देकर दो पदाधिकारियों को कुलपति से मिलवाकर ज्ञापन दिलवाया तब कहीं विवाद शांत हुआ।

कुलपति बोलीं, जब तक अधिकृत व्यक्ति न बुलाए पुलिस कैंपस में न आए

छात्रों के ज्ञापन के बाद कुलपति प्रोफेसर अंजिला गुप्ता ने थानेदार को यह कहकर हड़का दिया कि वे बिना अनुमति के यूनिवर्सिटी कैंपस में कैसे आ गए। थानेदार ने भी जवाब दे दिया कि उनका थाना क्षेत्र है, विवाद या तनाव की सूचना पर आना पड़ता है। थानेदार ने उन्हें बताया, कि आपके ही सुरक्षा इंचार्ज ने सूचना दी, तब पुलिस को आना पड़ा। कुलपति ने थानेदार को चेतावनी देते हुए कहा, जब तक अधिकृत व्यक्ति सूचना न दे, पुलिस यूनिवर्सिटी परिसर में प्रवेश न करे।

छात्रों ने कलेक्टर को दिया ज्ञापन

एबीवीपी ने कलेक्टर को भी ज्ञापन दिया। इसमें छात्रसंघ के निर्वाचन अधिकारी एलपी पटैरिया पर पक्षपात और मनमानी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक पैनल विशेष के सारे नामांकन पत्रों को सिर्फ हिंदी में नाम लिखने के कारण निरस्त करना सरासर तानाशाही है। छात्रों ने निर्वाचन अधिकारी को हटाने और चुनाव प्रक्रिया निरस्त कर प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की मांग की है। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रदेश सहमंत्री सन्नी केसरी, संगठन मंत्री प्रदीप मेहता, संतोष गुप्ता, बीयू के अध्यक्ष आलिंद तिवारी, नगर मंत्री रौनक केसरी समेत अभाविप के अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद शामिल थे।

एेसे ही मामले में संगठन से हटाए गए थे दो पूर्व अध्यक्ष

बिलासपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन में प्रदर्शन के दौरान तोडफ़ोड़ और कर्मचारियों से झूमा झटकी करने के मामले में एबीवीपी ने बीयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष केतन सिंह, सीएमडी कॉलेज के तत्कालीन अध्यक्ष और डीपी विप्र लॉ कॉलेज के सचिव दीपक अग्रवाल को संगठन से हटा दिया था। अब पुन: इस तरह का मामला सामने आया है।

एबीवीपी के छात्रनेता अपनी मांगों को लेकर कुलपति को ज्ञापन सौंपने आए थे। सुरक्षा कर्मियों द्वारा गेट पर रोकने की वजह से बहस हुई। इसके बाद कोनी थाना प्रभारी की मौजूदगी में छात्र नेताओं ने कुलपति को ज्ञापन सौंपा। कोई बड़ा मामला नहीं है।

सत्येश भट्ट, पीआरओ, सेंट्रल यूनिवर्सिटी

&एबीवीपी के छात्रनेता ज्ञापन देने आए थे। सुरक्षा कर्मियों से विवाद और झूमा झटकी की। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची, पुलिस से भी हाथापाई व कहासुनी हुई। बाद में छात्र नेताओं को ले जाकर शांतिपूर्वक कुलपति को ज्ञापन दिलाया गया। कुलपति के आपत्ति जताने के बाद पुलिस लौट आई।

एचसी शुक्ला, टीआई, कोनी थाना

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