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पुणे यूनिवर्सिटी का काम देखकर दंग रहे गए बीयू के अफसर

Updated: IST Bilaspur University
हॉस्टलों के बीच एक इंटरनेशनल हॉस्टल हैं जिसमे विदेशी छात्र-छात्राएं रहते हैं

बिलासपुर. एक हजार कॉलेज और साढ़े नौ लाख विद्यार्थियों की परीक्षा कराने वाले पुणे के हाईटेक सावित्री बाई फूले यूनिवर्सिटी के कंप्यूटराइज्ड कार्यप्रणाली को देखकर बीयू के तीन सदस्यीय अध्ययन दल के अफसरों की आंखे फटी रह गई। अध्ययन दल कॉलेजों के संबंध में संपूर्ण जानकारी आनलाइन आमंत्रित करने समेत कई बदलाव तो करना चाहता है, लेकिन स्थल की कमी इसमें आड़े आ रही है।

पुणे यूनिवर्सिटी के कार्यप्रणाली का एक दिवसीय जायजा लेकर लौटे अध्ययनदल के प्रमुख कुलसचिव डॉ. इंदु अनंत ने बताया कि साढ़े चार सौ एकड़ में फैले सावित्री यूनिसर्सिटी पुणे की स्थापना 69 साल पूर्व सन् 1948 में हुई है। इस यूनिवर्सिटी के अधीन तीन जिले पुणे, नासिक और अहमद नगर के 1000 कॉलेज संबद्ध हैं। जहां देश और विदेश के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। हॉस्टलों के बीच एक इंटरनेशनल हॉस्टल हैं जिसमे विदेशी छात्र-छात्राएं रहते हैं। कुलसचिव ने बताया कि दो साल पहले वहां भी पर्चा लीक कांड हुआ था, इसके बाद शासन ने यहां कसावट लाकर व्यवस्था को कंप्यूटराइज्ड कराया, तब यह तब्दीली आई।

जांच कमेटी के रिपोर्ट के बाद पूरे सिस्टम को कंप्यूटराइज्ड कर दिया गया है। यहां हर कार्य के लिए सिस्टम है। पेपर सेट करने वाली बिल्डिंग अलग है, जहां वरिष्ठ प्राध्यापकों को वहीं बुलाकर पेपर सेट कराया जाता है। यहां उनके आवास की व्यवस्था है, जो कार्य पूर्ण होने के बाद ही वहां से निकलते हैं। पेपर सेट करने वाली कंपनी परीक्षा के दो घंटे पूर्व यूनिवर्सिटी को और यूनिवर्सिटी आधे घंटे पहले परीक्षा केंद्रों को आनलाइन पेपर जारी करती है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी कॉलेजों को सिस्टम और प्रिंटर दे रखा है। प्रिंटर में किसी तरह खराबी आने पर तत्काल दूसरे प्रिंटर की व्यवस्था कर पहले वीडियो कांफ्रेंसिंग से यूनिवर्सिटी को सूचना दी जाती है। तस्दीक करने के बाद दूसरा कोड नंबर देकर सिस्टम में प्रश्नपत्र अपलोड किया जाता है जिसे डाउनलोड कर प्रिंटर से प्रश्नपत्र निकालकर परीक्षा ली जाती है।

सिस्टम से बदले हालात : हर कॉलेज में एक यूनिवर्सिटी प्रभारी होते हैं जो छात्र-छात्राओं के यूनिवर्सिटी से संबंधित हर कार्य की मानिटरिंग करते हैं। सिस्टम ही है कि पहले जहां 1 लाख 30 हजार विद्यार्थी पुन: जांच के लिए आवेदन करते थे, वहीं अब पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन की संख्या दो साल में काफी घट गई है।

एेसा है एकेडमिक सेक्शन: यूनिवर्सिटी का पूरा नियंत्रण शासन के हाथ में है, यही वजह है कि एकेडमिक सेक्शन में सभी 1000 कॉलेजों के स्थापना वर्ष, प्राचार्य, प्राध्यापक, उनकी शिक्षा, सब्जेक्ट वाइज विद्यार्थी संख्या समेत सारी जानकारी उपलब्ध है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि पालक इनका ऑनलाइन अवलोकन कर अपने बच्चों की शिक्षा के लिए कॉलेज का चयन कर सकें और यूनिवर्सिटी के पास संबद्ध कॉलेजों का पूरा रिकार्ड हो।

जगह की कमी है पर जो कर सकते हैं करेंगे: अध्ययन दल के मुख्य अफसर डॉ. इंदु अनंत ने कहा कि पुणे यूनिवर्सिटी से बहुत कुछ सीख्ने मिला, यहां संसाधन और योग्य अफसर भी हैं, लेकिन जगह की कमी है। एकेडमिक सेक्शन को डेवलप करेंगे। इसके अलावा अन्य सुधार भी किए जा सकते हैं लेकिन यहां जगह की कमी के कारण संभव नहीं है।

एेसे होती है कापियों की जांच : पूणे यूनिवर्सिटी में ही सारी कापियां जांचवाई जाती है। कापी चेक करने वाले प्राध्यापकों को वहीं रहकर कापियों की जांच करनी होती है और कार्यपूर्ण होने पर उनके खाते में आनलाइन पेमेंट कर उन्हें रसीद दी जाती है। कंप्यूटर से ही उत्तरपुस्तिकाओं की जांच होती है और नंबर काउंट होकर उस विद्यार्थी के कॉलम में आ जाता है। यदि जांचकर्ताओं से कोई गलती होती है या किसी उत्तर में जांच कर्ता नंबर देना भूल जाते हैं सिस्टम एरर हो जाता है और जांचकर्ता को फिर से बुलाकर फिर से बुलाकर चेक कराया जाता है।

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