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हाईकोर्ट की फटकार के  बाद जागे डीन नियमों का पालन करने के दिए निर्देश

Updated: IST Bilaspur : show cause notice issued to Cims Hod Dr
हाईकोर्ट सिम्स में इलाज के अभाव में जांजगीर-चांपा जिले के एक बच्चे की मौत के मामले को संज्ञान में लेकर सुनवाई कर रहा है।

बिलासपुर. सिम्स में व्याप्त अव्यवस्था और चरमराई इलाज व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी के बाद सिम्स के डीन ने व्यवस्था में कसावट लाने की कवायद शुरू कर दी है। उन्होंने गुरुवार के डॉक्टरों की ड्यूटी और इलाज व्यवस्था को लेकर तीन पन्नों का सर्कुलर जारी किया। माना जा रहा है कि यदि सर्कुरल के पूरे बिंदु लागू हो जाएं, तो सिम्स की व्यवस्था किसी बड़े निजी हॉस्पिटल से कम नहीं होगी। यहां इलाज के लिए आने वाले लोगों को इसका फायदा मिलेगा।

हाईकोर्ट सिम्स में इलाज के अभाव में जांजगीर-चांपा जिले के एक बच्चे की मौत के मामले को संज्ञान में लेकर सुनवाई कर रहा है। एक दिन पहले ही इस मामले में कड़े निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जांच के लिए न्यायमित्र की एक कमेटी बनाने के लिए कहा गया है। कोर्ट ने डीन से यह सवाल भी किए थे, कि उनके यहां सही इलाज की क्या व्यवस्था है। समुचित जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई थी। इसके दूसरे ही दिन गुरुवार को डीन डॉ. विष्णु दत्त ने डॉक्टरों की मीटिंग बुलाई और 14 बिंदुओं वाला तीन पेज का सर्कुलर जारी किया। इस सर्कुलर को पहले दिन से ही लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

डॉक्टरों की खींचतान में पिस रहे गरीब मरीज

सिम्स में तत्कालीन डीन डॉ. एसके मोहंती के सिपहसालार और वर्तमान डीन डॉ. दत्त के सिपहसालारों के बीच जमकर खींचतान चल रही है। हालत ये कि दोनों गुट एक-दूसरे को नीचा दिखाने में लगे हैं। इससे सिम्स की व्यवस्था चरमरा रही है। कुछ काबिल डॉक्टरों के तबादले से भ्भी व्यवस्था में फर्क पड़ा है।

ये निर्देश जारी किए गए

1- सभी डॉक्टर (प्राध्यापक से इंटर्न तक) ड्यूटी समय में अपना स्टेथिस्कोप, सफेद कोट, नेम प्लेट के साथ रहेंगे।

2- डॉक्टरों को ड्यूटी समय में अपना (नाम, पद व विभाग) वाला स्टैंप रखना जरूरी होगा। बिना सील मोहर के कहीं भी हस्ताक्षर न करें।

3- समस्त कर्मचारी (नर्सिंग स्टॉफ, लैब टेक्नीशियन,लैब अटैंडेंट, वार्ड ब्वाय, आया, भृत्य, चपरासी व स्वीपर) निर्धारित डे्रस में ही ड्यूटी पर रहेंगे।

4- बिना आईकार्ड के किसी अधिकारी व कर्मचारी को पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इमरजेंसी कॉल पर तत्काल पहुंचें डॉक्टर

1- सभी डॉक्टर व नर्सिंग स्टॉफ को कॉल पर बुलाए जाने पर वह तुरंत पहुंचकर रोगी को इलाज उपलब्ध कराएंगे।

2- कॉल ड्यूटी के दौरान डॉक्टर अपने घर के लैंड लाइन नंबर व मोबाइल चालू करके रखेंगे। उन्हें अपना वैकल्पिक फोन नंबर भी दर्ज करना अनिवार्य है।

3- कॉल मिलने के 20 मिनट के अंदर डॉक्टर को अस्पताल पहुंचकर रोगी का उपचार करना है। इलाज की डिटेल लिखकर सील मोहर के साथ हस्ताक्षर करना है।

4- एक्सीडेंट पर आने वाले मरीजों का इलाज तुरंत चालू किया जाएगा, साथ ही कंसल्टेंट व विभागाध्यक्ष को कॉल कर केस की गंभीरता के बारे में जानकारी देने के बाद रजिस्टर में सभी चीजों की एंट्री करनी है।

5- फोन पर सूचना देने के तुरंत बाद इलाज पर पहुंचे कंसल्टेंट को अपने कॉलम में सील साइन लगाना अनिवार्य है।

6- वार्ड में भर्ती प्रत्येक मरीजो को दो बार सुबह व शाम कंसलेंट द्वारा बेड वाइज निरीक्षण करना है। साथ ही रजिस्टर में मरीज का पूरा डिटेल भरना है।

7- कॉलेज एवं हास्पिटल की कार्यावधि के दौरान कोई डॉक्टर निजी प्रैक्टिस नहीं करेगा। किसी दूसरे संस्थान में जाकर ऑपरेशन या इलाज नहीं करेगा।

8- मरीज व उनके परिजनों से डॉक्टर व कर्मचारी सौम्य व मृदु भाषा में बात करेंगे।

9- कोई डॉक्टर व कर्मी मरीज व उनके परिजनों से इलाज के लिए रकम की मांग नहीं करेगा। ऐसा करते पाए जाने पर इसे गंभीर कदाचरण मानकर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

10- कोई भी चिकित्सक अधिकारी व कर्मचारी सक्षम स्वीकृत अवकाश के अपना मुख्यालय नहीं छोड़ेगा।

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