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घबराएं नहीं, सूर्य व शनि नहीं होंगे एक राशि में, फलदायी होगी इस बार की मकर संक्रांति

Updated: IST Makar Sakranti in Jaipur
संक्रांति सूर्य देव के राशि परिवर्तन को कहते है। जब मकर राशि में सूर्य देव का प्रवेश होता है तो उसे मकर संक्रांति कहते हैं।

बिलासपुर. मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाएगा। इस वर्ष संक्रांति का पर्व शनिवार के दिन होने से पुण्यकारी होगा। ज्योतिषीय मान्यता के मुताबिक सूर्य देव को पिता व शनि को पुत्र माना जाता है। पिता-पुत्र एक राशि में नहीं होंगे और शनिवार के दिन संक्रांति पर्व मनाया जाना अच्छा होगा।

संक्रांति सूर्य देव के राशि परिवर्तन को कहते है। जब मकर राशि में सूर्य देव का प्रवेश होता है तो उसे मकर संक्रांति कहते हैं। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता है। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ.दीपक शर्मा ने बताया कि माघ कृष्ण पक्ष की द्वितीया को अश्लेषा नक्षत्र में सूर्य देव का प्रवेश दोपहर 1.55 मिनट पर मकर राशि में होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित ब्रह्मदत्त मिश्रा ने बताया कि सूर्य देव का प्रवेश प्रत्येक राशियों में होता है। 12 राशियों में सूर्य का प्रवेश संक्रांति है। सौर मास की निश्चित अवधि होने से मकर संक्रांति प्राय:14 जनवरी को ही होती है। सौर मास 365 दिन 6 घंटे का होता है। चंद्र वर्ष के परिवर्तित होने के कारण तैतीस मास में एक अधिकमास होता है। संक्रांति में स्नान दान का विशेष महत्व है।

मिलेगा सूर्य व शनि का आशीर्वाद

मकर राशि के चार कारक ग्रह बुध, शुक्र व शनि माने गए है। इस राशि का स्वामी शनि ग्रह को माना गया है। शनि देव इस राशि के स्वामी है इसलिए शनिवार के दिन मकर संक्रांति पर सूर्य व शनि देव दोनों का आशीर्वाद मिलेगा। शनि व सूर्य दोनों एक ही राशि में नहीं है।

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