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अवैध फैक्ट्री में पानी की पैकिंग, सभी सैंपल लैब में फेल

Updated: IST food department
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों की टीम ने पिछले माह शहर के कई पानी पााउच पैकेंजिंग करने वाले संस्थानों की एक साथ जांच करने का अभियान चलाया था।

बिलासपुर. आवासीय क्षेत्र में अवैध तरीके से पानी पाउच पैकेंजिंग की अवैध फैक्ट्री संचालित हो रही थी। खाद्य औषधि प्रशासन ने इस फैक्ट्री से पानी पाउच का सैंपल लेकर इसे जांच के लिए लैब भेजा था। लैब में जांच के बाद यह पानी पाउच मिसब्रांड व सब स्टैंडर्ड घोषित किया है। खाने की हल्दी व चायनीज नूडल्स भी जांच में मिसब्रांड पाई गई। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों की टीम ने पिछले माह शहर के कई पानी पााउच पैकेंजिंग करने वाले संस्थानों की एक साथ जांच करने का अभियान चलाया था। भारतीय नगर में भास्कर फूड एंड बेवरेजेस नाम से हर्षा भास्कर नामक महिला फैक्ट्री संचालित कर रही थी। इस फैक्ट्री का खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में पंजीयन भी नहीं था। न ही पानी पाउच बनाने के लिए लाइसेंस लिया गया था।

पाउच का पानी जांच में फेल

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने अवैध तरीके से संचालित फैक्ट्री के पानी पाउच की सैंपलिंग की थी। इसकी गुणवत्ता समेत विभिन्न जांच के लिए राज्य शासन के प्रयोगशाला रायपुर भेजा गया था। लैब की जांच में भास्कर फूड एंड वेबरेजेस का पानी पाउच तय मानक में खरा नहीं उतरा। यह मिसब्रांड और सब स्टैंडर्ड पाया गया है। अब औषधि प्रशासन विभाग संचालिका हर्षा भास्कर के खिलाफ एडीएम कोर्ट में प्रकरण दायर करने की तैयारी कर रहा है।

खाने की हल्दी, चायनीज नूडल्स मिसब्रांड

मंगला चौक स्थित ओम किराना स्टोर्स से पैक्ड डोरेमैन चायनीज नूडल्स का सैंपल लिया था। यह जांच में मिसब्रांड पाया गया है। साथ ही यदुनंदन नगर में गननापति सेल्स से पैक्ड खाने में उपयोग होने वाली हल्दी की सैंपलिंग की गई थी। यह हल्दी लैब की जांच में मिसब्रांड पाई गई है। संचालकों के खिलाफ प्रकरण पेश किया जाएगा।

इसके संचालक चंद्रशेखर कुशवाहा के खिलाफ खाद्य एवं औषधि अधिनियम के तहत एडीएम कोर्ट में प्रकरण पेश किया जाएगा।

दिसंबर में 17 सैंपलिंग

दिसंबर माह में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने विभिन्न खाद्य सामग्रियों व पेय की सैंपलिंग की थी। इन सभी सैंपलिंग को जांच के लिए रायपुर स्थित राज्य शासन की प्रयोगशाला भेजा गया। इनमें से तीन सैंपल की रिपोर्ट आ गई है। ये तीनों सैंपल फेल हो गए है। इनके संचालकों के खिलाफ अलग-अलग प्रकरण तैयार करके अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी के न्यायालय में प्रकरण पेश करेंगे। शेष की रिपोर्ट आना बाकी है।

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