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सैलरी के लिए शहर आज से फिर कतार में, लेकिन बैंकों में पैसा पर्याप्त नहीं

Updated: IST Note ban new rules of withdrawl
कर्मचारियों को कैश की फौरी राहत के लिए 10 हजार नकद दिए जाने की व्यवस्था आज से शुरू की गई है।

बिलासपुर. नोटबंदी के बाद कर्मचारियों को वेतन देने की चुनौतियों से निपटना बैंक के लिए बेहद मुश्किल लग रहा है। गुरुवार से शहर के सभी बैंकों में सैलरी लेने वालों की कतारें लगेंगी। इससे निपटना बैंकों के लिए चुनौती होगीा। आरबीआई के तमाम निर्देशों व बैंकों में 30 प्रतिशत अतिरिक्त राशि उपलब्ध किए जाने का दावा और जमीनी हकीकत में काफी अंतर है। सच्चाई ये है कि बैंकों एवं पोस्ट आफिस को आपूर्ति के हिसाब से 40 से 50 प्रतिशत की व्यवस्था ही आरबीआई द्वारा की जा रही है।

मंगलवार को दिए निर्देश के अनुसार वेतन भुगतान से निपटने के लिए सभी राज्य सरकारों को पर्याप्त राशि किश्तों में दी जाएगी। कर्मचारियों को कैश की फौरी राहत के लिए 10 हजार नकद दिए जाने की व्यवस्था आज से शुरू की गई है। राज्य शासन के सभी कर्मचारियों को सैलरी से 10 हजार रुपया नकद दिया जाएगा। 10 हजार की रकम से उनकी जरूरत कितनी पूरी होगी, बाकी सैलरी उनके खाते में कब आएगी, ये लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। चेक क्लियरेंस में 7 से 8 दिन का समय लग रहा है।

सभी बैंकों में पर्याप्त नकदी का दावा

जिले के बैंकों ने सैलरी के लिए पर्याप्त नकदी होने का दावा किया है, हालांकि कितनी नकदी की व्यवस्था की गई है, यह नहीं बता पा रहे हैं। जानकारी के अनुसार जिले में 23147 कर्मचारी-अधिकारी हैं। साथ ही शिक्षक पंचायत के पद पर 8659 एवं नियमित शिक्षकों की संख्या 2 हजार के करीब है। इस संख्या को मिलाया जाए व दिए जाने वाली सैलकी की रकम से गुणा किया जाए तो बैंकों को काफी कैश की जरुरत होगी। इसके बाद निजी, केंद, गैर शासकीय व अन्य विभागों के लोग भी सैलरी के लिए बैंक पर ही निर्भर होंगे। ये संख्या 2 लाख के आसपास होगी।

प्रति सप्ताह 24 हजार ही निकाल सकेंगे

प्रति माह 24 हजार से अधिक सैलरी पाने वालों के सामने अहम चुनौती राशि के आहरण की होगी। आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार वे सिर्फ प्रति सप्ताह 24 हजार ही निकाल सकेंगे। 10 हजार रुपया नकद मिलने के बाद खाते से इस सप्ताह 14 हजार और निकाल सकेंगे। बशर्ते उनकी सैलरी उनके बैंक एकाउंट में जमा हो जाए।

अभी 50 प्रतिशत नोट ही छप रहे

रिजर्व बैंक के महाराष्ट्र व अन्य छपाई केंद्रों में रफ्तार 50 प्रतिशत ही पहुंच पाई है। आवश्यकता से आधी रकम के आने से मांग बनी हुई है। लोगों की 50 प्रतिशत आवश्यकता की पूर्ति ही हो पा रही है। इससे निपटने में अभी काफी वक्ता लगेगा। अगले 6 से 7 महीने में नोटों के किल्लत समाप्त होने की संभावना जताई जा रही है।

इधर...10-10 हजार के नकद भुगतान के फरमान ने बढ़ाई मुसीबत

नोट बंदी और कर्मचारियों को वेतन के बजाए 10-10 हजार नकद देने के फरमान से जिला कोषालय का हिसाब-किताब गड़बड़ा गया है। अब इसमें सुधार का कार्य कराए जाने का बखेड़ा खड़ा हो गया है, इसके कारण कर्मचारियों को नवंबर माह का वेतन विलंब से मिलने की उम्मीद है। नोट बंदी से उभरे संकट को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तृतीय और चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों को वेतन के बजाए जिला कोषालय से 10-10 हजार नकद भुगतान करने का निर्देश जारी किया है, यह निर्णय इसलिए लेना पड़ा क्यों कि नोट की कमी के वजह से वेतन लेने वाले कर्मचारियों के कारण पहले से संकट झेल रहे कर्मचारियों पर और दबाव न बढ़े। आमजन को सहजता से बैंकिंग का लाभ मिल सके। इधर जिला कोषालय ने नवंबर माह के वेतन के लिए 25 नवंबर से ही वेतन बिल तैयार करने के लिए रिहर्सल शुरू कर दी थी। अचानक 10-10 हजार नकद देने के फरमान से कोषालय के अफसरों और कर्मचारियों को अब डबल मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि इस अवधि में लगभग 90 फीसदी वेतन बिल तैयार हो चुके हैं। अब 10-10 हजार नकद देने के बाद कोषालय के अफसरों को मूल वेतन में से 10-10 हजार कम नया हिसाब तैयार करना पड़ेगा। जिससे इस माह कर्मचारियों को नवंबर माह वेतन विलंब से मिलने की आशंका है।

बैंकों की ओर से नकदी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। किसी को भी सैलरी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। सरकारी व निजी सेक्टर के समस्त वेतनभोगियों की सैलरी का भुगतान होगा।

शेखर शुक्ला, क्षेत्रीय प्रबंधक, एसबीआई, बिलासपुर

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