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मां के हाथ में होता है बच्चों का भाग्य

Updated: IST seminar
गर्भवती महिलाओं को किया संबोधित

बिलासपुर. बच्चे का भाग्य लिखने की कलम मां के हाथों में है। यदि हम स्माइलिंग, चीयरफूल, केयरफूल, माफ करने वाला, हेल्दी, हैप्पी, सभी परिस्थितियों में स्टेबल रहने वाला बच्चा चाहते हैं तो मां को गर्भकाल से ही अपने बोल, कर्म, खान-पान, विचार, व्यवहार, देखना, सुनना इस पर विशेष ध्यान देना होगा। क्योंकि ओरिजिनल कॉपी जैसा होगा वैसी ही जिरॉक्स कॉपी होगी, जैसा बीज वैसा पौधा होगा। गर्भकाल के आरंभ से लेकर बच्चे के दो साल होने का समय अर्थात् लगभग 1000 दिन संस्कारों की शिक्षा देने का स्वर्ण काल है।

यह बातें मुम्बई से आई गाइनेकोलॉजिस्ट एवं डिवानी संस्कार रिसर्च फाउडेशन की समन्वयक डॉ.शुभदा नील ने गर्भवती माताओं के लिए आयोजित कार्यक्रम में कही। ब्रह्ममाकुमारीज़ टिकरापारा सेवा केन्द्र में गर्भवती माताओं के लिए गर्भ संस्कार के विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। गाइनेकोलॉजिस्ट डॉ. शुभदा नील ने बच्चे एवं मां का स्वास्थ्य, मूल्यनिष्ठ बालक एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ को कार्यक्रम का उद्देश्य बताया। इस अवसर पर ब्रह्मकुमारी मंजू सहित बड़ी संख्या में सदस्य उपस्थित रहे।

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