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आरटीओ में चलता है दलालों का राज... पैसा फेंक, दलाली देख

Updated: IST rto
आरटीओ चेम्बर में, दलाल दफ्तर के भीतर घुसकर काम करा रहे, लोग बाहर बैठकर करते हैं इंतजार

सतीश यादव

बिलासपुर. सोमवार समय दोपहर 1 बजे, आरटीओ परिसर में भीड़भाड़ का माहौल है। इस भीड़ में अधिकांश तो दलाल दिखाई पड़ रहे हैं। आरटीओ देवेन्द्र केशरवानी फस्र्ट फ्लोर पर अपने चेम्बर में बैठे हैं। उनकी नाक के नीचे दफ्तर के हर रूम में घुसकर दलाल उनके बाबू व अधिकारियों के साथ बैठकर काम करा रहे हैं। उन्हें अधिकारपूर्वक निर्देशित भी कर रहे हैं। दलाल किसी भी रूम में घुसें, कहीं भी बैठें उन्हें कोई मनाही नहीं। मानो वे इसी दफ्तर के अधिकारी-कर्मचारी हैं। 'पत्रिका की टीम यहां पहुंची तो खलबली मच गई। खबर मिली तो खुद आरटीओ देवेंद्र केशरवानाी अपने चेंबर से निकलकर आए और आनन फानन में सारे दलालों को दफ्तर से बाहर निकाला गया।

आरटीओ में दलाली की प्रथा वर्षों से चली आ रही है। इस पर नियंत्रण के लिए कभी प्रभावी प्रयास ही नहीं किए गए। करें भी कैसे, आखिर दफ्तर वालों का मुंह-पेट भी इन्हीं से चलता है। अभी तीन दिन पहले ही परिवहन मंत्री ने प्रदेश भर के आरटीओ दफ्तरों को दलालों से मुक्त करने के सख्त आदेश दिए। इससे लगा कि इस बार तो आरटीओ दफ्तर दलाली प्रथा से मुक्त हो ही जाएगा। यही देखने के लिए 'पत्रिकाÓ की टीम सोमवार को शहर से 12 किलो मीटर दूर लगरा में स्थित आरटीओ पहुंची। लेकिन ये क्या! सबकुछ पहले जैसा ही था। परिवहन मंत्री के आदेश का कोई असर नहीं। यहां अधिकारी-कर्मचारियों के कानों में तो जूं तक नहीं रेंगी। वे अपने मंत्री के आदेश का माखौल उड़ाते नजर आए।

सबकुछ रोज की तरह चल रहा था। दलालों का ही राज नजर आया। दलाल दफ्तर के सभी विभागों में भीतर तक घुसकर कर्मचारियों से मनमाफिक काम करवा रहे थे। इसके विपरीत यदि कोई आम आदमी किसी अधिकारी-कर्मचारी से मिलने की कोशिश भी करता, तो उन्हें बाहर ही रोक दिया जा रहा था। यहां तक कि जो लोग बाहर खिड़की (काउंटरम) में अपने काम करवाने के लिए खड़े थे, उनके काम भी रोक दिए जा रहे थे। पहली प्राथमिकता दलालों को दी जा रही थी।

हड़बड़ाकर चेंबर से निकले आरटीओ,दलालों को खदेड़ा-

पत्रिका की टीम के पहुंचने की सूचना मिलते ही दफ्तर में खलबली सी मच गई थी। आरटीओ देवेंद्र केशरवानी तक बात पहुंची, तो वे खुद हड़बड़ाकर अपने चेंबर से बाहर निकल आए। फस्र्ट फ्लोर से उतरकर नीचे उतरे और विभागों में घुसकर एक-एक कर सभी दलालों को बाहर निकाला। उनके पीछे गार्ड भी थे, जो एकाएक सक्रिय होकर अनाधिकृत लोगों को बाहर कर रहे थे।

दलालों की फौज है यहां, पैसे दो तो पलभर में निपटा देते हैं काम-

परिवहन विभाग का लाइसेंस शाखा हो या फिर एनओसी व नाम ट्रांसफर शाखा या फिर परमिट। इन सबके लिए यहां अधिकारी-कर्मचारी तो हैं, लेकिन उनसे अधिक दलालों की फौज है। यहां बिना दलालों के कुछ नहीं होता। आप सीधे अपने किसी काम के लिए किसी अधिकारी-कर्मचारी से मिलें तो काम होना तकरीबन असंभव है। लेकिन यही काम पैसे देकर किसी दलाल को सौंप दें, पलभर में काम निपट जाएगा। ऊपर से नीचे तक सबकुछ सेट है।

मुस्कुराकर दलालों का अभिवादन करता है गार्ड-

- लाइसेंस बनाने वाले चिप सेंटर के बाहर गेट पर लिखा है, बिना अनुमति के अनाधिकृत व्यक्ति को अन्दर आना सख्त मना है। लेकिन ये सिर्फ आम लोगों को दिखाने के लिए है। जबकि पत्रिका की टीम ने खुद देखा कि यहां दलाल बेधड़क घुस रहे थे। 10 से 12 दलाल अन्दर घुसकर काम करा रहे थे। गार्ड भी सेटिंग पर चलता है। वह अन्य लोगों को बाहर रोक दे रहा था, लेकिन दलालों का मुस्कुराकर स्वागत करता और उन्हें बिना रोक-टोक के भीतर भेज देता।

पीछे हो रहा था लेन-देन

आरटीओ कार्यालय में दलाल बेहिचक काम करा रहे थे। पीछे लेन-देन चल रहा था। 'पत्रिकाÓ की टीम के पहुंचने की भनक उन्हें लग गई। कैमरे के फ्लैश चमकने के पहले ही वे भाग गए।

बाबू रखते हैं कमीशन का हिसाब-

आरटीओ कार्यालय के अधिकांश सेक्शन में बाबुओं के पास छोटे-छोटे पेड रहते हैं। इस पर दिनभर किए गए काम का हिसाब लिखा जा रहा था। बताया जाता है कार्यालय बंद होने के बाद सभी काम का हिसाब-किताब होता है, और इसी के जरिए ये पता चलता है कि किस दलाल से कितना कमीशन लेना है।

आम लोगों की बारी नहीं आती-

आरटीओ कार्यालय में बिजली का केबल बस्र्ट हो गया था। इस वजह से तीन दिन तक सारा सिस्टम बंद रहा। केबल बदलवाने के बाद सोमवार को यहां काम-काज शुरू हुआ। लोग दूर-दराज से पहुंचे थे। काउंटर पर लाइन लगाकर खड़े थे। लेकिन भीतर घुसे दलालों का रौब ऐसा कि बाहर खड़े लोगेां की बारी ही नहीं आ रही थी। कर्मचारी भी पहले दलालों को तवज्जो दे रहे थे।

पहले की अपेक्षा दलाल काफी कम हो गए हैं। सभी विभागों का लगातार निरीक्षण किया जाता है। कई बार विभाग से दलालों को भगाया भी गया। आज भी दो बार राउंड लिया है, लाइसेंस शाखा और चिप शाखा से दलालों को भगाया गया है। अब किसी भी दलाल को अन्दर नहीं घुसने दिया जाएगा।

देवेन्द्र केशरवानी, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ)

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