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स्मार्ट सिटी की सड़कों पर आवारा मवेशियों का दंगल, हाईकोर्ट के निर्देश का नहीं हो रहा पालन

Updated: IST Stray cattle
बढ़ती संख्या के मद्देनजर कुत्तों की नसबंदी कराने भी कहा था कोर्ट ने, मंत्री का निर्देश भी बेअसर, एनएसयूआई जिला प्रशासन को उचित प्रबंधन के लिए सौंप चुका है ज्ञापन

बिलासपुर. हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद के शहर की सड़कों में आवारा मवेशियों का दंगल और जमावड़ा जारी है। नगरीय प्रशासन मंत्री भी निर्देश दे चुके हैं, एनएसयूआई ने आवारा मवेशियों के उचित प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन को ज्ञापन भी सौंपा परंतु जिला और निगम प्रशासन ने अभी तक कोई ठोस पहल नहीं की है।

सीवरेज से बदहाल सड़कें पहले ही चलने लायक नहीं हैं, उन पर भी मवेशियों के जमावड़े से हर समय गंभीर हादसे की आशंका बनी रहती है। लड़ते हुए मवेशी कई बार वाहनों से टकराकर लोगों को घायल भी कर चुके हैं। शहर की सड़कों पर लंबे समय से गाय, सांड और आवारा कुत्तों का जमावाड़ा बना हुआ है। इनकी संख्या दिनोंदिन बढ़ रही है।

आवारा कुत्ते दौड़ाकर काट रहे हैं, वहीं मवेशी बीच सड़क पर दंगल करके राहगीरों की जान का जोखिम बने हुए हैं। हाईकोर्ट ने सड़कों से आवारा मवेशियों को पकउ़कर कांजी हाउस में बंद करने और कुत्तों का बंध्याकरण करने निर्देश दिया है। नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल भी निर्देश दे चुके हैं इसके अलावा एनएसयूआई भी सड़कों पर खुलेआम दंगल कर रहे आवारा मवेशियों के उचित प्रबंधन के लिए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुका है परंतु जिला और निगम प्रशासन ठोस पहल करने के बजाए लगता है हादसे का इंतजार कर रहा है।

आवारा कुत्तों का आतंक: निगम प्रशासन द्वारा आवारा कुत्तों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए कोई ठोस पहल न करने के कारण जिला अस्पताल और सिम्स में रोजाना लगभग 100 पीडि़त रैबीज का टीका लगवाने के लिए पहुंच रहे हैं। निगम प्रशासन द्वारा कुत्तों के बंध्याकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। एक साथ फंड जारी कर आवारा कुत्तों पर प्रभावी नियंत्रण के पहल के लिए फंड जारी कर बंध्याकरण कराने के बजाए टुकड़े- टुकड़े में फंड जारी कर तीसरी बार नसबंदी का कार्यक्रम तय किया गया है। जब तक एक टर्म पूरा होता है आवारा कुत्तों की संख्या बढ़कर दोगुनी हो जाती है। इससे कुत्तों की आबादी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लग पा रहा है। रात होते ही शहर की सड़कों पर आवारा कुत्ते लोगों को दौड़ा- दौडा़कर काट रहे हैं।


रायपुर में हो चुकी है मौत: राजधानी रायपुर में सड़क पर भिड़े आवारा मवेशियों की चपेट में आकर एक दुपहिया सवार राहगीर की मौत का मामला भी सामने आ चुका है, इसके बावजूद निगम और जिला प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं ले रहा है।

यहां लगा रहता है मवेशियों का जमावाड़ा: शहर में व्हीआईपी रोड कलेक्टोरेट और मंत्री के बंगले के सामने लिंकरोड, सदर बाजार, गोलबाजार, दयालबंद- लिंगियाडीह पुल, तोरवा- छठघाट राजकिशोर नगर पुल, जरहाभाठा, बृहस्पति बाजार, जूना बिलासपुर, गांधी चौक, दयालबंद, नेहरू चौक, मुंगेली नाका समेत शहर के हर इलाकों में आवारा मवेशियों को सड़क पर डेरा जमाकर बैठे देखा जा सकता है। रात को तो गलियों और सड़कों पर इनका पूरी तरह कब्जा हो जाता है। वाहन चालकों को कुत्तों का झुंड दौड़ाने लगता है। इससे कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।

जनहित याचिका पर व स्वत: संज्ञान लेकर निर्देश दिए हाईकोर्ट ने: सड़कों पर आवारा पशुओं के उन्मुक्त विचरण एवं रैबिज से रायपुर की एक नाबालिग लड़की दिव्या की मौत मौत मामले में हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लेते हुए 21 फरवरी 2017 को स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी किया था। पूछा गया था रैबीजज से निपटने के लिए प्रदेश के अस्पतालों में क्या व्यवस्था की गई है। वैक्सिनेशन एवं अन्य इंतजामात क्या हैं तथा डॉक्टरों की उपलब्धता कितनी है। साथ ही सड़क पर आवारा घूम रहे मवेशियों की रोकथाम एवं कुत्तों के नसबंदी के लिए शासन स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी भी मांगी गई थी। ज्ञात हो कि हाईकोर्ट ने पूर्व में भी सड़क पर घूम रहे आवारा पशुओं के उन्मुक्त विचरण विशेषकर कुत्तों के काटने की लगातार घटनाओं को लेकर चिंता जाहिर की गई थी। याचिकाकर्ता अविनाश मिश्रा एवं अन्य द्वारा याचिका दायर की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य शासन को कुत्तों की नसबंदी के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए थे, कहा गया था कि नगर निगम आवारा घूम रहे कुत्तों की बढती संख्या पर लगाम लगाए तथा इनकी नसबंदी करे। नगर निगम द्वारा कुछ दिनों तक दिखावे के लिए नसबंदी की कार्रवाई की गई, फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। नगर निगम द्वारा साढ़े 3 हजार कुत्तों के नसबंदी का दवा किया गया था। इसके बाद भी आवारा कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है।

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