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सोनू स्वस्थ, अब मानता है महावतों का कहना

Updated: IST sonu elephent
लोरमी के आसपास के गांवों में उत्पात मचाकर फसलों और झोपडि़यों को नुकसान पहुंचने वाले सोनू हाथी ने अब उत्पात मचाना बंद कर दिया है।

बिलासपुर. जंगली हाथी सोनू अब पूरी तरह से स्वस्थ्य है। आचरण में काफी परिवर्तन आया है। वह महावतों के इशारे को समझने लगा है। लेकिन एटीआर के सबसे सीनियर हाथी सिविल बहादुर से अभी भी दोस्ताना संबंध नहीं बन पाए हैं। वे एक-दूसरे को देखकर जमीन पर पैर घसीटना शुरू कर देते हैं। इसलिए उन्हें 10 फीट दूर रखा जाता है।

लोरमी के आसपास के गांवों में उत्पात मचाकर फसलों और झोपडि़यों को नुकसान पहुंचने वाले सोनू हाथी ने अब उत्पात मचाना बंद कर दिया है। उसके आचरण में बदलाव आया है, या नहीं इसके लिए सिंहावल सागर में महावतों द्वारा उसकी तरह-तरह से परीक्षा ली गई। लेकिन अब सोनू महावतों के कहने पर उठता-बैठता है। नहाने और चरने भी चला जाता है। उनके बुलाने पर कहीं भी आ जाता है। अचानकमार टाइगर रिजर्व के एसडीओ एसके शर्मा ने बताया सोनू का घाव ङ्क्षबदावल में ही ठीक हो चुका था।

पूरी तरह से स्वस्थ्य होने के बाद सिविल बहादुर, लाली, राजू और सोनू को एक साथ सिंहावल सागर में रखा गया है। सोनू प्रतिदिन 25 किलो खाना खाता है। चारों हाथी के खाने पर हर महीने 1 लाख रुपए खर्च होते हैं।

मामले में 19 दिसंबर को सुनवाई

सोनू हाथी के प्रकरण पर 19 दिसंम्बर को हाईकोर्ट में सुनवाई है। सोनू को पिछले साल 1 दिसंबर को बिंदावल में तालाब किनारे पकड़ा गया था। इसके बाद उसके चारों पैर को नायलोन की रस्सी से बांध दिया गया था। इससे पैर के उन स्थानों में जख्म हो गए थे। इसे लेकर जनहित याचिका दायर की गई थी। इसके बाद वन विभाग द्वारा हाथी के इलाज पर ध्यान दिया गया। एसडीओ शर्मा का कहना है कि सिविल बहादुर और सोनू के बीच झगड़ा कम नहीं हुआ है। दोनों को हर समय एक-दूसरे से 10 फीट दूर रखना पड़ता है।

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