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प्रभाकर ग्वाल के मामले में सुनवाई की अधिकारिता पर उठाए गए सवाल

Updated: IST court logo
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा अप्रैल 2016 में उक्त परिवाद पर स्थगन के लिए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी।

बिलासपुर. भदौरा जमीन घोटाला, पीएमटी फर्जीवाड़ा कांड एवं एसपी राहुल शर्मा के सुसाइड मामले में बहुचर्चित फैसला देने पर जिला सुकमा के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रहे प्रभाकर ग्वाल से कुछ राजनेता व अधिकारी कथित तौर पर नाराज हो गए थे। इसके बाद रायपुर के आरंग टोल प्लाजा में ग्वाल के साथ मारपीट की घटना हुई।

इससे व्यथित होकर प्रभाकर ग्वाल की पत्नी प्रतिभा ग्वाल द्वारा हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस नवीन सिन्हा एवं प्रीतिंकर दिवाकर समेत 17 के खिलाफ रायपुर के अतिरिक्त मुख्य न्याययिक मजिस्ट्रेट के कोर्ट में परिवाद दायर किया गया था। इधर हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा अप्रैल 2016 में उक्त परिवाद पर स्थगन के लिए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की गई थी। जस्टिस संजय के अग्रवाल की कोर्ट ने परिवाद पर सुनवाई के बाद स्थगन दे दिया था।

इससे क्षुब्ध होकर ग्वाल की पत्नी ने अधिवक्ता अभिषेक पांडेय एवं शैलेंद्र बाजपेयी के जरिए याचिका दायर की। इसमें अधिवक्ता ने 28 नवंबर की सुनवाई में आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि मार्च 2016 में हाईकोर्ट की जो फुलकोर्ट मीटिंग आयोजित की गई थी, उसमें जस्टिस संजय के अग्रवाल भी शामिल थे। उन्होंने मीटिंग में अपना अभिमत दिया था। इसलिए उन्हें इस मामले की सुनवाई की अधिकारिता नहीं है। जबकि जस्टिस संजय के अग्रवाल द्वारा मामले की सुनवाई के लिए 15 दिसंबर की तिथि निर्धारित की गई है।

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