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ऐसा अंधेर, करोड़ों का गौरवपथ हो गया चौपट अफसर-ठेकेदार दावा ठोक रहे- हम दोषी नहीं

Updated: IST gouravpath bilaspur
ठेकेदारों ने लोक निर्माण विभाग द्वारा रोड के सेंपल की जांच पर ही सवालिया निशान लगाते हुए उससे संतुष्ट नहीं होने की बात कही है।

सतीश यादव. बिलासपुर. गौरव पथ में गड़बड़ी के मामले पर नगर निगम आयुक्त के नोटिस पर इंजीनियरों और ठेकेदारों ने जवाब प्रस्तुत किए हैं। ठेकेदारों ने कहा है नगर निगम द्वारा जो ड्राइंग डिजाइन दिया गया था उसी के आधार पर सड़क बनाई गई है। ठेकेदारों ने लोक निर्माण विभाग द्वारा रोड के सेंपल की जांच पर ही सवालिया निशान लगाते हुए उससे संतुष्ट नहीं होने की बात कही है। वहीं अधिकारियों ने कहा है हमने जो टेस्ट कराया उस समय रिपोर्ट सही थी। सड़क खराब होने के लिए यातायात दबाव और सीवरेज को बड़ा कारण बताया गया है। हाईकोर्ट के आदेश पर नगर निगम आयुक्त सौमिल रंजन चौबे ने गौरव पथ की गड़बड़ी में शामिल अफसरों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा था। अधिकारियों ने जवाब में अपने को बचाते हुए कहा है निर्माण कार्य के दौरान मटेरियल की टेस्टिंग कराई गई उस समय रिपोर्ट ठीक था। लोक निर्माण विभाग ने टेस्ट कराया इस दौरान मटेरियल गुणवत्ता विहीन कैसे हो गया इसकी जानकारी नहीं है। इसके अलावा सड़क में काफी हैवी ट्रैफिक होने के कारण सड़क उखडऩे की बात कही गई है। सड़क निर्माण के दौरान भारी वाहनों को रोका जाता तो यह स्थिति निर्मित नहीं होती। सड़क में गड्डा होने का प्रमुख कारण सीवरेज के कार्य को बताया गया है रेत की जगह पर मिट्टी से फिलिंग कराई गई है।

ठेकेदारों के ऐसे जवाब

सांई कंस्ट्रक्शन ने कहा है नगर निगम के जो ड्राइंग डिजाइन किया गया है उस आधार पर सड़क बनाई गई है। सांई कंस्ट्रक्शन ने लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़क के मटेरियल टेस्ट पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है वे इससे सहमत नहीं है।

अग्रवाल इंफ्रा ने कहा है सड़क को कांक्रीट करने के जो मापदंड निगम द्वारा तय किए गए, वे ही सही नहीं हैं। निगम से जो निर्देश मिले, उस अनुसार काम किया।

सिम्पलेक्स की ओर से जवाब दिया गया है जो ड्राइंग डिजाइन नगर निगम ने दिया, जैसा आदेश मिलते गया उस हिसाब से काम किया गया है।

शासन की रिपोर्ट में ये हैं दोषी अधिकारी

शासन की ओर से कोर्ट को विभिन्न बिंदुओं पर जानकारी सौंपी गई थी व दोषी अधिकारियों के बारे में जानकारी दी गई थी। जिसमें नगर निगम बिलासपुर के समस्त अभिलेख जैसे ठेकेदार के अनुबंध की कापी, प्रशासकीय स्वीकृति, तकनीकी स्वीकृति, कांक्रीट कार्य के स्ट्रक्चरल डिजाईन, प्रयोगशाला जांच परिणाम, माप पुस्तिकाएं वगैरह की डिटेल सौंपी गई। गौरवपथ निर्माण के दौरान आयुक्त एम ए हनीफी जून 2005 से मार्च 2009 तक का कार्यकाल, आयुक्त मुकेश बंसल जून 2009 से जनवरी 2011 तक। जनवरी 2011 से मार्च 2011 तक आयुक्त सौम्या चौरसिया व अप्रैल 2011 से जुलाई 2012 तक यशवंत कुमार आयुक्त के पद पर रहे अवनीश शरण का कार्यकाल जुलाई 2012 से फरवरी 2014 तक का था। अधिकारियों की अगर बात करें तो कार्यपालन अभियंता पीके पंचायती कार्यकाल, अक्टूबर 2008 से, एम पी गोस्वामी, सहायक अभियंता कार्यकाल अक्टूबर 2008 से जुलाई 2009, सुरेश शर्मा सहायक अभियंता कार्यकाल जुलाई 2009 से अगस्त 2015, सुरेश बरुआ उप अभियंता कार्यकाल अक्टूबर 2008 से जुलाई 2009 तथा अगस्त 2015 से वर्तमान तक, ललित त्रिवेदी उप- अभियंता कार्यकाल अगस्त 2011 से वर्तमान तक, अविनाश बापते लेखाधिकारी अक्टूबर 2008 से वर्तमान तक। उदय केशव वैद्य उप अभियंता का कार्यकाल अगस्त 2009 से जुलाई 2011 तक रहा था लेकिन इनकी मृत्यु हो चुकी है।

इनसे होनी है रिकवरी

मेसर्स सांई कंस्ट्रक्शन ने 142.52 लाख का कार्य महाराणा प्रताप चौक से स्वर्ण जयंती नगर तक बायीं ओर कांक्रीट सड़क का निर्माण किया।

दूसरे भाग में स्वर्ण जयंती नगर से मंगला चौक तक सीसी सड़क का निर्माण बाईं ओर मेसर्स अग्रवाल इंफ्राबिल्ड प्रा. लि. की ओर से किया गया। जिसकी लागत 571.73 लाख थी।

तीसरे चरण का कार्य जिसमें महाराणा प्रताप चौक से मंगला तक सीसी सड़क का निर्माण कार्य दायीं ओर का कार्य मेसर्स सिमप्लैक्स इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर से किया गया। जिसकी लागत 222.99 लाख रुपए थी।

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