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आदिवासी विभाग ने फर्जी विज्ञापन से लगाया लाखों का टेंडर, फिर किया निरस्त

Updated: IST Tribal officials
टेंडर खुल जाने के बाद जब इसकी जानकारी हुई तो तालापारा के मोहम्मद अरशद खान ने इसकी शिकायत कलेक्टर, सचिव व मंत्री से करके आरटीआई लगाई।

बिलासपुर. आदिवासी विभाग की सहायक आयुक्त गायत्री नेताम ने फर्जी जी नंबर व विज्ञापन के आधार पर 76 लाख रुपए के निर्माण का ऑफ लाइन टेंडर जारी कर दिया। इसमें मातहत अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत भी मानी जा रही है। मामला तब खुला, जब जब दूसरे लोगों ने मंत्री, सचिव व कलेक्टर से लिखित शिकायत की। अब इस टेंडर को रद्द करके दोबारा ऑन लाइन टेंडर जारी किया गया है। आरोप है कि विभाग ने इससे पहले भी इसी तरह दर्जनों टेंडर जारी किए हैं। शिकायतकर्ताओं ने इस पर जांच की मांग की है। आदिवासी विभाग बिलासपुर की सहायक आयुक्त द्वारा 7 अक्टूबर 2016 को निविदा क्रमांक 3239 से लेकर 3241 तक जारी की गई थी। यह तीनों निविदाएं मैनुअल पद्धति से लगाई गईं।

कहा जा रहा है कि इन तीनों कार्यों को अपने चहेते ठेकेदार को दिलाने के लिए प्रभाग की सहायक आयुक्त व अन्य अधिकारी कर्मचारियों ने मिलकर जनसंपर्क कार्यालय रायपुर से फर्जी जी नंबर अलाट कराया और दो समाचार पत्रों में कुछ प्रतियों पर संबंधित विज्ञापन छपवाया। जिससे इसकी जानकारी किसी दूसरे ठेकेदारों को न हो और वह इस निविदा में भाग न ले सकें। टेंडर खुल जाने के बाद जब इसकी जानकारी हुई तो तालापारा के मोहम्मद अरशद खान ने इसकी शिकायत कलेक्टर, सचिव व मंत्री से करके आरटीआई लगाई। इसके तुरंत बाद सहायक आयुक्त गायत्री नेताम ने तीनों टेंडर को रद्द कर उन्हें ऑन लाइन जारी किया।

76 लाख के निर्माण कार्य की थीं निविदाएं

विभाग ने बिलासपुर, पेंड्रा व कोटा क्षेत्र में 50 लाख रुपए का गार्ड रूम व अधीक्षक आवास निर्माण, 20 लाख रुपए का मरम्मत कार्य और 6 लाख रुपए के मरम्मत कार्य के लिए टेंडर जारी किया था।

पीएचई में हो चुका करोड़ों का घोटाला

सालभर पहले पीएचई विभाग में इसी तरहा फर्जी जी नंबर व विज्ञापन के आधार पर टेंडर लगाकर करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया था। जांच में कोरबा जिले के दोषी आधिकारियों को सस्पेंड किया गया था।

इस प्रक्रिया से जारी होता है टेंडर

विभाग कोई भी कार्य की निविदा जारी करने से पहले अपने विभाग के डीपीआर कोड द्वारा जनसंपर्क कार्यालय रायपुर को ऑन लाइन विज्ञापन जारी करने की अनुमति देता है। इसके बाद जनसंपर्क जी नंबर व विज्ञापन नंबर अलॉट कर जानकारी देगा कि कब किस पेपर में विज्ञापन प्रकाशित हुआ। प्रकाशन के बाद ही निविदा जारी कर टेंडर फार्म बेचा जा सकता है।

मामला बेहद गंभीर है। इसकी जांच कराई जाएगी और अनियमितता पाए जाने पर सभी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

एनके असवाल, प्रमुख सचिव, आदिवासी विभाग छत्तीसगढ़ शासन

गलत जी नंबर व विज्ञापन से टेंडर लग गया था। बाद में जनसंपर्क विभाग से जानकारी मिलने पर सभी टेंडर रद्द कर उन्हें दोबारा ऑन लाइन जारी किया गया है।

गायत्री नेताम, सहायक आयुक्त, आदिवासी विभाग बिलासपुर

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