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अश्वनी नक्षत्र में योगिनी एकादशी होगी शुभ, होंगे भक्तों के पापों का अंत

Updated: IST akadashi
आज योगिनी एकादशी पर व्रत करेंगे श्रद्धालु

बिलासपुर.योगिनी एकादशी मंगलवार को अश्वनी नक्षत्र में मनाई जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक अश्विनी नक्षत्र में योगिनी एकादशी पुण्यकारी होगी। इसके साथ ही व्रत व पूजन करने वाले भक्तों के पापों का अंत होगा व सुख-समृद्धि प्राप्त होगी। योगिनी एकादशी इस काल में लोक व भोग से मुक्ति दिलाती है। इस व्रत को करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं।

आषाढ़ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को योगिनी एकादशी कहते हंै। ज्योतिषाचार्य एवं वास्तुविद डॉ.उद्धव श्याम केसरी ने बताया कि वैसे तो प्रत्येक एकादशी का विशेष महत्व होता है। अश्वनी नक्षत्र में मंगलवार के दिन यह व्रत भक्त करेंगे। मंगलवार को श्री हनुमान की पूजा का महत्व होता है, इसलिए इस दिन श्रीहरि विष्णु के साथ ही संकट मोचन हनुमान की पूजा का भी पुण्य मिलेगा। ज्योतिषाचार्य पंडित महेश्वर प्रसाद उपाध्याय ने बताया कि साल में 24 एकादशी होते हैं अधिकमास में इसकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। प्रत्येक एकादशी का अपना अलग महत्व होता है। खास दिन व तिथि में होने से अच्छे संयोग होने पर यह व्रत अधिक पुण्यकारी व फलदायी होते है।

योगिनी एकादशी व्रत कथा श्रवण का महत्व

योगिनी एकादशी व्रत की कथा सुनना पुण्यकारी माना गया है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस व्रत की कथा सुनने मात्र से अठासी सहस्त्र ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य मिलता है। इसलिए भक्तों को कथा का श्रवण अवश्य करना चाहिए।

व्रत की कथा

पद्मपुराण के अनुसार स्वर्गलोक में इन्द्र की अलकापुरी में यक्षों का राजा कुबेर रहता था। शिवभक्त कुबेर के लिए प्रतिदिन हेम नामक माली अद्र्धरात्रि को फूल लेने मानसरोवर जाता और प्रात: राजा कुबेर के पास पहुंचाता था। एक दिन हेम माली रात्रि को फूल तो ले आया परंतु वह अपनी पत्नी विशालाक्षी के प्रेम के वशीभूत होकर घर विश्राम के लिए ही रुक गया। प्रात: राजा कुबेर के पास भगवान शिव की पूजा करने के लिए फूल न पहुंचे तो राजा ने अपने सेवकों को कारण बताने के लिए हेम माली को बुलाकर लाने का आदेश दिया। हेम माली को राजा कुबेर ने क्रोध में आकर श्राप दे दिया कि तुझे स्त्री वियोग सहन करना पड़ेगा तथा मृत्युलोक में जाकर कोढ़ी होना पड़ेगा। कुबेर के श्राप से हेम माली स्वर्ग से पृथ्वी पर जा गिरा और उसी क्षण कोढ़ी हो गया। भूख-प्यास से दुखी होकर भटकते हुए एक दिन वह मार्कंडेय ऋषि के आश्रम में पहुंचा तथा राजा कुबेर से मिले श्राप के बारे में उन्हें बताया। हेम माली की सारी विपदा को सुनते हुए मार्कंडेय ऋषि ने उसे आषाढ़ मास की योगिनी एकादशी का व्रत सच्चे भाव तथा विधि-विधान से करने के लिए कहा। हेम माली ने व्रत किया तथा उसके प्रभाव से उसे राजा कुबेर के श्राप से मुक्ति मिली।

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