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शहीदों की शहादत पर "बेशर्म" सियासत

Bjp-Congress fight over martyrs

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Bjp-Congress fight over martyrs
8/7/2013 5:26:00 PM
Bjp-Congress fight over martyrs

नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पुंछ क्षेत्र में पांच भारतीय सैनिकों के मारे जाने की घटना पर रक्षा मंत्री एके एंटनी के सदन में दिए गए बयान पर बवाल और बढ़ गया है। एक तरफ जहां बीजेपी ने रक्षा मंत्री पर देश को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए माफी की मांग की है। वहीं कांग्रेस रक्षा मंत्री के बचाव में उतर आई है। इस संवेदनशील मुद्दे ने राजनीति रंग ले लिया है।

रक्षा मंत्री एके एंटनी के संसद में दिए बयान के बचाव में कांग्रेस ने यह तर्क दिया है कि तब जानकारी उपलब्ध थी, उसी आधार पर बयान दिया गया। कांग्रेस ने यह कहकर बीजेपी को घेरने की कोशिश की है कि एनडीए के कार्यकाल में अधिक सैनिक और लोग हमले का शिकार हुए हैं। संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने एंटनी का बचाव करते हुए कहा कि रक्षा मंत्री के देश को गुमराह करने का सवाल ही नहीं है। एंटनी ने बयान तथ्यों के आधार पर दिया था। जो तथ्य उनके पास उस समय उपलब्ध थे, उन्हीं के आधार पर रक्षा मंत्री ने बयान दिया।

सदन में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज ने आरोप लगया कि रक्षा मंत्री और रक्षा मंत्रालय के वक्तव्य को परस्पर विरोधाभास है। सेना की तरफ से पहले जारी किए बयान को बाद में बदला गया है। सेना के बयान में साफ कहा गया था कि हमला पाकिस्तानी सैनिकों ने किया। स्वराज ने रक्षा मंत्री पर आरोप लगाया कि उन्होंने यह कहकर कि आतंकवादी पाकिस्तानी सेना की वर्दी में आए 15-20 लोगों ने यह हरकत की। एक प्रकार से पाकिस्तान की सेना को क्लिन चिट दे दी है जबकि इससे पहले रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति में घटना के लिए पाकिस्तान की सेना को जिम्मेदार ठहराया गया था।

इस मसले पर संसद में संप्रग सरकार को घिरती देख कांग्रेस ने अब अपने महासचिवों और प्रवक्ताओं को मैदान में उतार दिया। कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख अजय माकन ने ट्वीट कर कहा कि जवानों की हत्या पर आज बीजेपी बोल रही है, लेकिन उसे अप्रेल 2001 में बांग्लादेश की सीमा पर 16 बीएसपी जवानों की मौत को याद करना चाहिए।

माकन ने आंकड़ों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की कि एनडीए के शासन में ज्यादा हमले हुए और सैनिक हताहत हुए। माकन ने लिखा कि 1998-2004 के बीच जम्मू कश्मीर में 6115 नागरिकों की हत्या हुई। यानी औसतन 874 सालाना मौत हुई। यूपीए सरकार के समय में बीते साल महज 15 लोगों की मौत हुई है, जो कि दो दशक में सबसे कम है।

एनडीए (1998-2004) के शासनकाल में जम्मू-कश्मीर में कुल 23,603 आतंकी घटनाएं हुईं यानी औसतन 3,372 हर साल, जबकि यूपीए के अंदर पिछले साल 220 आतंकी घटनाएं हुईं। पिछले दो दशक में सबसे कम। अजय माकन ने आखिर में ट्वीट किया कि अगर इन आंकड़ों को देखा जाए तो यह साफ हो जाता है कि हमारी सरकार सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है।

कांग्रेस की तरफ से इस तरह के आंकड़े जारी होते ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने पलटवार करते हुए कहा कि क्या अब हम 1962 तक जाएंगे या फिर यह बताएंगे कि कांग्रेस के शासनकाल में जम्मू-कश्मीर के काफी बड़े हिस्से पर पाकिस्तान और चीन ने कब्जा कर लिया।

भाजपा माफी पर अड़ी

भाजपा इस बात पर अड़ी है कि एंटनी देश से माफी मांगे और उस रहस्य को बताएं कि उन्होंने बिना पूरी जानकारी के इस तरह का बयान क्यों दिया। पार्टी का कहना है कि पांच सैनिकों की शाहदत पर पूरे देश में गुस्सा है और सरकार पाकिस्तान के साथ वार्ता की बात कह रही है ऎसा किसके दबाव में किया जा रहा है। राज्यसभा में भाजपा के उप नेता रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि यह रक्षा मंत्री का बयान पाकिस्तान की मौजूदा सरकार को बचाने के लिए किया गया।

पाकिस्तान के साथ वार्ता जारी रखने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा जरूरी है या पाकिस्तान के साथ वार्ता। उन्होंने पूछा कि वार्ता का दबाव कौन बना रहा है। इसी वर्ष जनवरी में नियंत्रण रेखा पर दो जवानों की हत्या के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ पारंपरिक रूप से आदान प्रदान नहीं होगा, अब पांच जवानों की हत्या के बावजूद सरकार वार्ता पर आमादा है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार को भले ही अंतर्राष्ट्रीय दबाव की चिंता हो लेकिन भाजपा को राष्ट्रीय सुरक्षा की ज्यादा चिंता है और वह इस पर कोई समझौता नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा पाकिस्तान के साथ युद्ध नहीं चाहती। वह चाहती है कि पाकिस्तान की नई सरकार तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के 6 जनवरी 2004 के उस लिखित आश्वासन को दोहराए, जिसमें उन्होंने कहा कि थी पाकिस्तान की जमीन से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को प्रोत्साहित नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आश्वासन के बिना पाकिस्तान के साथ वार्ता नहीं होनी चाहिए।

विशेषाधिकार हनन नोटिस

भारतीय जनता पार्टी के यशवंत सिन्हा ने नियंत्रण रेखा पर भारतीय सैनिकों पर हमले के बारे में रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी द्वारा मंगलवार को लोकसभा में दिए गए बयान को गुमराह करने वाला बताते हुए उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है। नोटिस में आरोप लगाया है कि जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर में पांच भारतीय सैनिकों के मारे जाने पर दिए गए बयान से रक्षा मंत्री ने सदन को गुमराह किया है।

रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा कि भारतीय सैनिकों पर हमला आतंकवादियों तथा पाकिस्तानी सेना की वर्दी पहने लोगों ने किया जबकि सेना ने अपने वक्तव्य में कहा कि हमला करने में पाकिस्तानी सैनिक शामिल थे। उन्होंने कहा कि सेना को उसका यह वक्तव्य बदलने को भी मजबूर किया गया।


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