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क्रूड प्रोडक्‍शन में कटौती, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होगी बड़ी बढ़ोतरी 

Updated: IST cured oil
क्रूड ऑयल निर्यात करने वाले देशों का संगठन ओपेक प्रोडक्‍शन कम करने पर राजी हो गया है। समझौते के तहत अगले साल जनवरी से ओपेक देश कुल क्रूड उत्‍पादन में 3 फीसदी की कटौती करेंगे। इससे वर्तमान रोजाना 3.37 लाख करोड़ बैरल क्रूड उत्‍पादन कम होकर 3.25 लाख करोड़ बैरल हो जाएगा।

नई दिल्‍ली। क्रूड ऑयल निर्यात करने वाले देशों का संगठन ओपेक प्रोडक्‍शन कम करने पर राजी हो गया है। समझौते के तहत अगले साल जनवरी से ओपेक देश कुल क्रूड उत्‍पादन में 3 फीसदी की कटौती करेंगे। इससे वर्तमान रोजाना 3.37 लाख करोड़ बैरल क्रूड उत्‍पादन कम होकर 3.25 लाख करोड़ बैरल हो जाएगा। इसका असर क्रूड की कीमतों में १० फीसदी इजाफा के रूप में सामने आएगा। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की कीमत में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना बनने लगी है। माना जा रहा है कि भारत में पेट्रोल की कीमतें ७५ रुपए तक पहुंच सकती है। इससे उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे और महंगाई से आम लोगों का जीना मुहाल हो जाएगा।

क्‍यों की गई कटौती

आठ साल में पहली बार क्रूड का प्रोडक्‍शन कम करने पर ओपेक देश राजी हुए हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि पिछले दो साल में क्रूड की कीमतों में प्रति बैरल 100 डॉलर से ज्‍यादा की कमी आई। इससे सऊदी अरब, ईरान जैसे बड़े तेल निर्यातक देशों को बड़ा नुकसान हुआ है और उनकी इकोनॉमी लडख़ड़ा गई है।

पेट्रोल की कीमतें 75 रुपए तक पहुंच सकती है

एनर्जी एक्‍सपर्ट नरेंद्र तनेजा ने पत्रिका को बताया कि क्रूड का प्रोडक्‍शन ओपेक द्वारा कम करने का असर आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दिखाई देगा। ओपेक देश प्रोडक्‍श्‍ान में कटौती कर क्रूड की कीमत 60 डॉलर प्रति बैरल ले जाना चाहते हैं। ओपेक के साथ रूस ने भी क्रूड प्रोडक्‍शन में कटौती करने का फैसला लिया है। बहुत कुछ अब अमरीका की पॉलिसी पर निर्भर करेगा। इसे देखते हुए अमरीका ने कहा है कि वह अपना क्रूड का प्रोडक्‍शन बढ़ाएगा। अगर ऐसा होता है तो अंतराष्‍ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों पर ज्‍यादा असर नहीं होगा। फिर भी अगर क्रूड की कीमतें अगले साल तक 60 डॉलर के पास जाती हैं तो पेट्रोल 72 से 75 रुपए तक पहुंच सकता है। हालंाकि इससे ऊपर जाने की संभावना बहुत कम है।

क्‍या होगा भारत पर असर

भारत अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी क्रूड आयात करता है। वह अपनी जरूरत का अधिकांश हिस्सा ओपेक के सदस्‍य देशों से आयात करता है। क्रूड महंगा होने से भारत को उसके आयात पर ज्‍यादा खर्च करना होगा। अगर प्रति बैरल एक डॉलर भी कीमत बढ़ती है तो भारत पर साल भर में 9200 करोड़ का बोझ आएगा। यानी साफ है क्रूड कीमतें बढऩे से अर्थव्‍यवस्‍था पर बुरा असर होगा। इससे महंगाई बढ़ेगी और पेट्रोल-डीजल की कीमत एक बार फिर से ऊंची हो जाएगी। पिछले 11 महीनों में भारत में क्रूड के आयात में 11 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

10 फीसदी उछली कीमत

क्रूड ऑयल प्रोडक्‍शन कम करने की सहमति बनते ही अंतराष्‍ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में 10 फीसदी तक का उछाल देखा गया और प्रति बैरल कीमत 50 डॉलर के पार कर गई।

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