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देश के लिए शहीद हुआ जवान, फिर भी आज तक नहीं बदली गांव की तस्वीर

Updated: IST  chaibasa news, jharkhand news, martyr, death, sol
अक्सर सांसद व विधायक गांव में विकास की गंगा बहाने की बात कहते हैं, लेकिन वह सिर्फ आश्वासन तक ही सीमित रह जाता है।

चाईबासा। देश को अंग्रेजों से बचाने के लिए अपनी शहादत देने वाले स्वतंत्रता सेनानी शहीद बख्तर साय के गांव की आज तक तस्वीर नहीं बदली है। हम बात कर रहे हैं रायडीह प्रखंड मुख्यालय व राष्ट्रीय राजमार्ग 78 से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर बसा वासुदेव कोना गांव की। ऐसा नहीं है कि गांव के विकास करने का आश्वासन किसी ने नहीं दिया। अक्सर सांसद व विधायक गांव में विकास की गंगा बहाने की बात कहते हैं, लेकिन वह सिर्फ आश्वासन तक ही सीमित रह जाता है।

दाड़ी का पानी पीने को विवश ग्रामीण

बता दें कि स्वतंत्रा सेनानी के गांव में आज तक बिजली भी नहीं पहुंच सकी है। हां इतना जरुर है कि विद्धुतिकरण के नाम पर कई वर्ष पूर्व पोल खंभा अवश्य गिराकर छोड़ दिया गया है। गांव तक जाने के लिए न अच्छी सड़क है, न ग्रामीणों के पीने के लिए गांव में स्वच्छ पेजयल की व्यवस्था। आज भी गांव की अधिकांश आबादी खेतों में बने दाड़ी का पानी पीने को विवश हैं।

गांव के ग्रामीण मुरलीधर सिंह, बिरसमणि देवी, बुधना चीक बड़ाईक, परदेशिया लोहरा गांव का विकास नहीं होने के पीछे गांव में बड़ी संख्या में सदानों का निवास होना मुख्य कारण बताते हैं। शहीद बख्तर साय की कई पीढ़ी गांव में बिजली का जलता ब्लब देखने की आंख में स्वर्ग सिधार चुके हैं।

लालटेन युग से नहीं निकल पा रहे बाहर

जिप सदस्य चोकेंद्र सिंह का कहना है कि शहीद का गांव राजनीतिक व प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है। उनका कहना है

कि हर वर्ष जनप्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारी शहीद बख्तर साय चौक पर स्थापित शहीद की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते

हैं।

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