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कांग्रेस आज पेश करेगी चुनौतियों का बजट

Updated: IST I am ashamed to be the leader of this House
बजट से पहले ही बस किराया बढ़ाकर डाला बोझ, शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में करना होगा बहुत काम

चंडीगढ़। प्रदेश में दस वर्ष बाद सत्ता संभाल रही कांग्रेस पार्टी द्वारा मंगलवार को अपना पहला बजट पेश किया जाएगा। सूबे के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल कांग्रेस पार्टी की तरफ से पहला बजट पेश करेंगे। हालांकि मनप्रीत बादल वर्ष 2007 में सत्ता में आई शिरोमणि अकाली दल की सरकार में वित्त मंत्री रहते हुए इसी सदन में बजट पेश कर चुके हैं लेकिन तत्कालीन बाद सरकार के कार्यकाल के दौरान पंजाब के सिर चढ़े केंद्र के कर्ज के मुद्दे पर मनप्रीत बादल ने अकाली दल से नाता तोड़ लिया था।

आज भले मनप्रीत सिंह बादल कांग्रेस पार्टी की तरफ से बतौर वित्त मंत्री विधानसभा में बजट पेश करेंगे लेकिन आज भी उनके सामने वही स्थिति है जो अकाली-भाजपा सरकार में थी। पहले के मुकाबले पंजाब आज काफ ज्यादा कर्जदार हो चुका है। गैर सरकारी अनुमान के मुताबिक पंजाब के सिर आज 1 लाख 25 हजार 320 करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज है। पंजाब की कांग्रेस सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाना है। ऐसे में यह तय माना जा रहा है कि मनप्रीत बादल अपने पहले बजट में प्रदेश के लोगों को किसी तरह की बड़ी राहत नहीं देंगे।

कांग्रेस का यह पहला बजट ऐसे समय में आ रहा है जब देश के अन्य हिस्सों की तर्ज पर पंजाब में भी जीएसटी लागू हो रहा है। विपक्ष के दबाव, प्रदेश के लोगों में लगातार बढ़ रही असुरक्षा की भावना से यह तय माना जा रहा है की सरकार द्वारा सूबे के लोगों पर कोई बड़ा बोझ नहीं डाला जाएगा। हालांकि बजट से पहले ही रोड़वेज की बसों में किराया बढ़ा दिया गया है।

प्रदेश सरकार के सामने किसान आत्महत्या का मुद्दा इस समय सबसे बड़ी चुनौती है। जिसके इस बजट में सरकार द्वारा किसानों को कुछ राहत दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस बजट पर प्रदेश के मध्यमवर्गीय परिवारों की सबसे अधिक नजर है। अकाली-भाजपा सरकार ने अपने अंतिम दो बजटों में किसानों, दलितों को तो काफी कुछ दिया लेकिन मध्यमवर्गीय परिवारों को कुछ नहीं दिया।

पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार का वर्ष 2016-17 के लिए पेश किया गया बजट अंतिम था। तत्कालीन वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने 86,387 करोड़ का बजट पेश किया था। इस बजट में 24479 करोड़ रुपये की वार्षिक योजनाओं के लिए व्यवस्था की गई थी जबकि सामाजिक सुरक्षा स्कीमों जैसे पेंशन आदि के लिए 1100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। वर्तमान कैप्टन सरकार ने भी युवाओं को स्मार्ट फोन देने का वादा किया था। इन सब के अलावा बड़ा सवाल यह भी रहेगा की मंगलवार को पेश होने वाले बजट में कैप्टन सरकार अपने घोषणा पत्र के कितने हिस्से को छेडऩे का प्रयास करती है।

विधानसभा के बजट सत्र में अब तक कांग्रेस व अन्य दलों के विधायकों द्वारा प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों का अभाव, अस्पतालों में स्टाफ का अभाव होने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं। जिनमें स्वास्थ्य तथा शिक्षा मंत्री ने नई भर्तियों के लिए बजट तक इंतजार करने के लिए कहा है। सरकार अगर प्रदेश में मास्टरों व डाक्टरों की भर्ती को वित्तीय प्रावधान इस बजट में नहीं रखती है तो विपक्ष सामेत आम लोग भी सरकार को घेर सकते हैं।

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