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बजट खर्च करने में फिसड्डी रहे हरियाणा के सरकारी विभाग

Updated: IST haryana secretariat
वित्त वर्ष पूरा होने में केवल दो माह शेष, प्रदेश के वित्त विभाग ने सभी विभागों को जारी किए निर्देश

चंडीगढ़। एक तरफ वित्त वर्ष पूरा होने में जहां केवल दो माह बचे हैं वहीं हरियाणा में चल रहे कई विभाग ऐसे भी हैं जिन्होंने पिछले साल अलाट किए गए बजट का बड़ा हिस्सा खर्च ही नहीं किया है। ऐसे में सरकार द्वारा जनहित में लागू की जाने वाली योजनाएं धरातल पर किस स्थिति में होंगी इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि वित्त विभाग की टीमों ने आगामी बजट की तैयारी शुरू कर दी है, जबकि पिछले बजट का बड़ा हिस्सा विभागों के पास अभी भी पड़ा है। ऐसे हालातों के बावजूद कई विभाग वित्त विभाग पर अपना आगामी बजट बढ़ाए जाने के लिए जोर डाल रहे हैं।

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हरियाणा में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ऐसा है जिसने अब तक सर्वाधिक 85.7 प्रतिशत बजट धनराशि को अपने कार्यों के लिए खर्च किया गया है। इसके बाद दूसरे नंबर पर समाज कल्याण एवं सशक्तिकरण विभाग आता है जिसने दिसंबर माह के अंत तक पिछले बजट में अलाट की गई कुल धनराशि का 71.31 प्रतिशत हिस्सा खर्च किया है।

वित्त विभाग से मिली अधिकारिक जानकारी के अनुसार आयुष विभाग ने इस अवधि के दौरान 68.92 प्रतिशत, पंचायती राज विभाग ने 57.25 प्रतिशत, सूचना एवं लोक संपर्क विभाग ने 55.75 प्रतिशत तथा खाद्य आपूर्ति विभाग ने 55.29 प्रतिशत धनराशि खर्च की है। हरियाणा में करीब 55 विभाग ऐसे हैं जिन्होंने कैलेंडर वर्ष पूरा होने के मौके पर भी अपने बजट का अधिकतर हिस्सा इस्तेमाल नहीं किया था।

विभिन्न विभागों के अधिकारियों का इस मामले पर तर्क है कि बजट में अलाट की जाने वाली धनराशि का मतलब यह नहीं होता है कि बजट में घोषणा के तुरंत बाद विभागों को धनराशि मिल जाती है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार विभागों को धनराशि मिलने में कई-कई महीनों का समय लग जाता है। अगर यह धनराशि समय पर मिले तो विभाग इसका इस्तेमाल भी उसी तेजी से करेंगे।

विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि कर्मचारियों की भारी कमी, मौजूदा स्टाफ को कंप्यूटर का ज्ञान न होना भी बजट खर्च में धीमी गति होने के पीछे बड़ा कारण है। क्योंकि अधिकतर विभागों के पास पढ़े-लिखे कंप्यूटर शिक्षित ट्रेंड स्टाफ की भारी कमी है। वर्षों से तैनात पुराने कर्मचारी कंप्यूटर प्रशिक्षण हासिल करने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में वित्त विभाग द्वारा बजट अलाट किए जाने के बाद भी उसके खर्च के लिए रिपोर्ट आदि बनाने तथा संबंधित मद पर खर्च हेतु निगरानी का सारा काम मानव आधारित होने के कारण दिक्कतें आती हैं।

हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु बजट धनराशि के कम इस्तेमाल पर सहमति व्यक्त करते हुए कहते हैं कि वित्त विभाग के अधिकारी सभी विभागों की निगरानी कर रहे हैं। सभी विभागों को अपने कार्यों में पारदर्शिता व तेजी लाने के निर्देश जारी किए गए हैं। जिससे वह बजट में अलाट की गई धनराशि को खर्च कर सकें।

महिला एवं बाल विकास विभाग सबसे पीछे

हरियाणा की पूर्व तथा मौजूदा सरकार का एकमात्र ऐजंडा महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं को आगे बढ़ाना तथा दलित कल्याण रहा है। अब तक की सरकारों ने पिछले कई वर्षों के दौरान घोषित किए गए बजट में इन दोनों विभागों का विशेष ख्याल रखा है। इसके बावजूद यह विभाग बजट की धनराशि खर्च करने के मामले में सबसे पीछे रहे हैं। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग ने सबसे कम 33.93 प्रतिशत तथा एस.सी., बी.सी. कल्याण विभाग ने कुल अलाट बजट का केवल 43.16 प्रतिशत हिस्सा ही खर्च किया है।

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