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पंजाब में मंत्री बनने के लिए लॉबिंग में जुटे विधायक

Updated: IST Punjab Congress rebels hold three dozen seats
पंजाब में दस साल बाद सत्ता वापसी करने वाली कांग्रेस में अब मंत्री बनने की दौड़ शुरू हो गई है

चंडीगढ़। पंजाब में दस साल बाद सत्ता वापसी करने वाली कांग्रेस में अब मंत्री बनने की दौड़ शुरू हो गई है। पंजाब में जहां नए मंत्रियों के नाम को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है वहीं कई विवादों के बीच कांग्रेस में शामिल होने वाले नवजोत सिंह सिद्धू को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने पर अभी भी सस्पैंस बरकरार है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राहुल गांधी से मुलाकात के बाद भी इस मामले में रहस्य को समाप्त करने की बजाए बरकरार ही रखा।

कैप्टन अमरिंदर सिंह, पंजाब मामलों की प्रभारी आशा कुमारी तथा सहप्रभारी हरीश चौधरी ने पंजाब में जीत के बाद आज राहुल गांधी से मुलाकात की। हालांकि यह मुलाकात बेहद कम समय के लिए थी लेकिन इसे नई सरकार के गठन को लेकर काफी अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नई सरकार के गठन को लेकर हाईकमान ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को फ्री-हैंड दे दिया है।

नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब का डिप्टी सीएम बनाए जाने के मुद्दे को टालते हुए अमरिंदर ने मीडिया से बातचीत में केवल इतना ही कहा कि यह एक शिष्टाचार मुलाकात थी। जिसमें विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी है। कांग्रेस सरकार के मंत्रीमंडल में शामिल होने वालों के नाम तेज हो गए हैं। चुनाव प्रचार अभियान के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा मनप्रीत सिंह बादल को पहले से ही वित्त मंत्री बनाने का ऐलान किया जा चुका है।

मनप्रीत ने जब बादल से अलग होकर नई पार्टी का गठन किया था तो उस समय भी वह तत्कालीन बादल सरकार में वित्त मंत्री थे। इसके अलावा कांग्रेस सरकार में राजकुमार वेरका, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, रजिया सुल्ताना, सुखजिंदर सिंह रंधावा, को भी मंत्रीमंडल में शामिल किए जाने की चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है। एक तरफ जहां पंजाब में नई सरकार को लेकर गहमा-गहमी का माहौल है वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह के मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली होने वाले अध्यक्ष पद पर नियुक्ति को लेकर भी कवायद तेज हो गई है।

माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान हिंदू कार्ड खेलते हुए सुनील जाखड़ को कांग्रेस अध्यक्ष बना सकती है। जाखड़ पार्टी का बड़ा चेहरा हैं और पिछले दस वर्षों के दौरान किसानों की समस्याओं को सरकार के खिलाफ उठाते रहे हैं। इसके अलावा इस पद के लिए पूर्व वित्त मंत्री लाल सिंह भी दौड़ में हैं। लाल सिंह को कैप्टन अमरिंदर सिंह का करीबी माना जाता है। चर्चाओं के अनुसार लाल सिंह को इसी शर्त पर चुनाव न लडऩे के लिए राजी किया गया था कि सत्ता में आने के बाद उन्हें उचित मान-सम्मान दिया जाएगा। इसके अलावा इस दौड़ में राजिंदर कौर का नाम भी तेजी से चल रहा है।

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