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रोक के बावजूद जल्लीकट्टू का आयोजन

Updated: IST chennai
जल्लीकट्टू के आयोजन पर उच्चतम न्यायालय के प्रतिबंध का उल्लंघन करते हुए युवाओं के एक समूह ने शक्रवार

मदुरै।जल्लीकट्टू के आयोजन पर उच्चतम न्यायालय के प्रतिबंध का उल्लंघन करते हुए युवाओं के एक समूह ने शक्रवार को सांडों को काबू में करने के इस खेल का आयोजन किया। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि करीसलकुलम गांव के खुले मैदान में कुछ मिनट के लिए इस खेल का आयोजन किया गया था। उन्होंने बताया कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के विरोध में करीब पांच सांडों के साथ मैदान में इस खेल का आयोजन किया गया। अब तक इस मामले में किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है।

उन्होंने बताया कि आयोजकों के मंजू विराट्टू (सांड को काबू में करने के एक अन्य खेल) से जुड़ी तैयारी करने को लेकर पुलिस और उनके बीच जोरदार बहस हुई, इस वजह से गांव में तनाव व्याप्त है। पुलिस ने बताया कि अगर वे आयोजक आयोजन को लेकर अड़े रहते हैं तो उनको गिरफ्तार किया जाएगा। इसी बीच ग्रामीणों ने खेलों का आयोजन नहीं हो पाने के लिए राज्य सरकार और उच्चतम न्यायालय की आलोचना की।

एक आयोजक मुतुपांडी ने कहा कि किसी को परंपरा निभाने के लिए किसी अदालत के अनुमति की कोई जरूरत नहीं है। इसी बीच पोंगल के दौरान जल्लीकट्टू के सुचारु आयोजन को सुनिश्चित करने के लिए चेन्नई में युवा संगठनों ने मानव शृंखला बनाकर विरोध प्रकट किया। उच्चतम न्यायालय ने पोंगल से पहले जल्लीकट्टू पर फैसला सुनाने की मांग को लेकर दायर याचिका को कल खारिज कर दिया था। पुलिस ने बताया कि नाम तमीझर कच्ची के 28 कार्यकर्ताओं को जल्लीकट्टू के आयोजन के लिए तटीय कडलूर जिले से गिरफ्तार किया गया था।

जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध की अवहेलना करने पर मजबूर न करे सरकार : कनिमोझी

केन्द्र और राज्य सरकार को जल्लीकट्टू से प्रतिबंध हटाने के प्रयास करने चाहिए

चेन्नई. डीएमके राज्यसभा सदस्य कनिमोझी ने कहा कि सरकार ऐसा कुछ भी न करे जिससे तमिलनाडु के लोगों को मजबून जल्लीकट्टू पर लगे प्रतिबंध की अवहेलना करनी पड़े।

यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने तमिलनाडु की जनता को इस साल जल्लीकट्टू के आयोजन का आश्वासन दिया था। इसी प्रकार से सरकार द्वारा लोगों को पिछले साल भी आश्वासन मिला लेकिन उनके साथ धोखा हुआ।

इसी बीच एक सवाल के जबाव में उन्होंने कहा कि डीएमके चाहती है कि जल्लीकट्टू के आयोजन पर लगा प्रतिबंध हट जाए जिससे लोगों को प्रतिबंध की अवहेलना करने की जरूरत ही न पड़े। जिसके लिए जल्लीकट्टू के समर्थन में डीएमके द्वारा राज्य भर में विरोध प्रदर्शन भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि कम से कम अभी सरकार को लोगों की भावनाओं को समझ कर इसका समाधान निकालने के बारे में सोचना चाहिए।

जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भाजपा ने की आलोचना

चेन्नई. पोंगल के दौरान जल्लीकट्टू के आयोजन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भाजपा ने आलोचना कर कहा कि केंद्र सरकार इसके आयोजन को लेकर कानूनी विशेषज्ञों से चर्चा कर रही है। यहां संवाददाताओं से बातचीत के दौरान भाजपा अध्यक्ष तमिलइसै सौंदरराजन ने जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की आलोचना करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश आज चोट लगने पर कल इलाज किए जाने जैसा है। केंद्र सरकार जल्लीकट्टू के खिलाफ नहीं है जिसके लिए केंद्रीय समिति ने कोर्ट में स्पष्ट भी किया था कि जल्लीकट्टू का आयोजन होना ही चाहिए।

लेकिन उसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश इसके खिलाफ आया। इसी बीच जब उनसे सवाल किया गया कि क्या केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध की अवहेलना कर अगर इसका आयोजन होता है तो भाजपा का समर्थन रहेगा तो उन्होंने कहा कि ऐसे हालातों में इस तरह का बात करना गलत है लेकिन भाजपा पूर्ण रूप से जल्लीकट्टू का समर्थन करेगा। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गुरुवार को जल्लीकट्टू की याचिका खारिज कर दी गई थी। हालांकि कोर्ट ने यह कहा कि फैसले का मसौदा तैयार किया गया है लेकिन शनिवार से पहले इस पर कोई निर्णय लेना संभव नहीं होगा।

जल्लीकट्टू के चक्कर में अभिनेत्री त्रिशा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

चेन्नई. पशु कल्याण संगठन पेटा जिसके प्रयास से जल्लीकट्टू खेल पर प्रतिबंध लगाया गया उसका सर्मथन करने पर अभिनेत्री त्रिशा के खिलाफ भी विरोध प्रदर्शन किया गया। कई तमिल इकाइयों ने त्रिशा के इस फैसले के खिलाफ उसके खिलाफ प्रर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि त्रिशा पेटा से अपना सर्मथन वापस ले लें। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर त्रिशा ने अपना फैसला जल्द वापस नहीं लिया तो उसके खिलाफ प्रदर्शन और तेज हो जाएगा व उनकी आने वाली फिल्मों का भी बहिष्कार किया जाएगा। अभिनेत्री के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे कुछ विद्यार्थियों का कहना था कि त्रिशा ने अपनी पढ़ाई-लिखाई यहां से की, यहीं पली-बढ़ीं। तमिल सिनेमा से उसे प्रसिद्धी मिली और अब वह इतनी बड़ी हो गईं कि राज्य की संस्कृति का ही वे विरोध करने लगी हैं।

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