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बचपन में हो बधिरता की पहचान

Updated: IST chennai
विश्व बधिरता दिवस के मौके पर अडयार स्थित स्कूल फॉर यंग डीफ चिल्ड्रन बाल विद्यालय में एक कार्यक्रम

चेन्नई।विश्व बधिरता दिवस के मौके पर अडयार स्थित स्कूल फॉर यंग डीफ चिल्ड्रन बाल विद्यालय में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें वक्ताओं की राय थी कि बच्चों में बधिरता की पहचान अब शुरू में हो सकती है। युवावस्था में भी बधिरता का निदान किया जा सकता है।

उनका कहना था कि भारत में 1,000 में से एक बच्चा बधिरता का शिकार होता है लेकिन यदि शैशवावस्था में ही इसकी पहचान हो जाती है तो उसका उपचार किया जा सकता है। इसके लिए नवजात की शुरुआत में ही जांच जरूरी है। माताएं भी सावधानीपूर्वक 3 से 4 महीने के बच्चों की बधिरता की पहचान कर सकती हंै। स्कूल की निदेशक सरस्वती नारायणस्वामी ने बताया कि यदि इसका समय रहते इलाज कर दिया जाए तो 3 साल तक पहुंचते पहुंचते बच्चा समाज की मुख्य धारा से जुड़ जाएगा।

ऐसे बच्चों को भाषा योजना से भी प्रशिक्षित किया जा सकता है। इसमें डिकोडिंग का सहारा लिया जाएगा। इस कार्यक्रम में ध्वनि मैथडोलॉजी का प्रयोग किया जाता है। इस मौके पर वाइस प्रिंसिपल डा.मीरा सुरेश ने भी विचार व्यक्त किए।

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