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अब पोर्टर मंत्रा बताएगा अटैण्डर की लोकेशन

Updated: IST chennai
अस्पतालों में अब अटैंडर के अभाव में मरीजों को परेशानी नहीं होगी। साफ्टवेयर कंपनी आइसजेन ने एक ऐसा

चेन्नई।अस्पतालों में अब अटैंडर के अभाव में मरीजों को परेशानी नहीं होगी। साफ्टवेयर कंपनी आइसजेन ने एक ऐसा पोर्टर मंत्र ईजाद किया है जिसके जरिए तत्काल पता लग जाएगा कि अस्पताल में अटैंडर कहां पर है। अस्पताल की नर्स अपने मोबाइल, लैपटाप या कम्प्यूटर के जरिए अटैंडर की लोकेशन का पता लगा सकेगी। भारत में तीन बड़े अस्पतालों में इस तरह की प्रणाली शुरू कर दी गई है। अन्य कई बड़े अस्पतालों में यह प्रक्रिया चल रही है। सिंगापुर, मलेशिया समेत सात अन्य देशों के कई अस्पतालों में भी यह प्रणाली लागू है।

साफ्टवेयर कंपनी आइसजेन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आनन्द पी. सुराणा ने बताया कि अस्पतालों में अक्सर मरीज को समय पर अटैंडर न मिलने के चलते दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बीमार व्यक्ति घंटों व्हील चेयर पर तड़पता रहता है लेकिन अटैंडर समय पर नहीं पहुंच पाता। इससे मरीज का दर्द बढ़ता जाता है। नर्स भी अक्सर अटैंडर को ढूंढती रहती है। इससे कई बार आपरेशन में भी अनावश्यक विलम्ब होता है। नर्स का मुख्य कार्य मरीज की देखभाल का होता है लेकिन समय पर अटैण्डर न मिलने से वह भी मरीज पर ध्यान केन्द्रित नहीं कर पाती। ऐसे में उनकी अमेरिका स्थित आइसजेन कंपनी ने एक ऐसा पोर्टर मंत्र तैयार किया है जिसके जरिए अटैंडर की हर लोकेशन का पता रखा जा सकेगा।

मिलेगी हर जानकारी

सुराणा ने बताया कि इसके तहत अस्पताल में अटैंडर को आरएफआईडी कार्ड जारी किया जाता है। जिसमें मैसेज डिस्प्ले होता रहता है। इसमें नर्स को जरूरत पडऩे पर वह अपने मोबाइल, टैबलेट या कम्प्यूटर के जरिए अटंैडर को तत्काल बुला सकती है। इसके तहत केवल नर्स को ग्रे बटन दबाना होता है। सबसे नजदीक अटंैडर कौन है और कौन अटंैडर खाली है इसकी जानकारी भी मिल जाती है।

अस्पताल की नर्स के मोबाइल पर पूरा नक्शा आ जाता है जिसमें इस बात की जानकारी रहती है कि अटंैडर किस जगह पर है। उसका नाम, चेहरा, आने में लगने वाला समय आदि की भी जानकारी मिल जाती है। ऐसे में जिस अटंैडर को पहुंचने में पहले 20 से 30 मिनट तक लग जाते थे वही अटंैडर अब 2 से 3 मिनट में पहुंच सकेंगे।

कई बड़े अस्पताल में लागू

सुराणा ने बताया कि बेंगलूरु स्थित मणिपाल अस्पताल, मुम्बई स्थित अंबानी अस्पताल एवं दिल्ली स्थित अपोलो अस्पताल में इस नई प्रणाली को लागू कर दिया गया है जिसके बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं। अन्य कई बड़े अस्पतालों में भी यह प्रणाली जल्द लागू की जाएगी। हाल ही मणिपाल अस्पताल को नैसकाम की ओर से बेस्ट टेक्नोलोजी एवं हैल्थकेयर अवार्ड दिया गया था। इसी तरह का एक अन्य अवार्ड एक्सप्रेस समूह की ओर से भी दिया गया। मणिपाल अस्पताल के उपाध्यक्ष (आईटी) नंदकिशोर धोमने एवं हैड नर्स पुनिता ने इस अवार्ड को सभी के कठिन मेहनत एवं सेवा का फल बताया।

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