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समस्या समाधान के इंतजार में सूरापेट

Updated: IST chennai
अम्बत्तूर-रेडहिल्स मार्ग के किनारे पर बसा है सूरापेट। इसके उत्तरी छोर पर रेडहिल्स जलाशय स्थित है।

चेन्नई।अम्बत्तूर-रेडहिल्स मार्ग के किनारे पर बसा है सूरापेट। इसके उत्तरी छोर पर रेडहिल्स जलाशय स्थित है। सूरापेट माधवरम जोन के अंतर्गत वार्ड-24 में आता है। खुला क्षेत्र होने के कारण यह विकास के पथ पर अग्रसर है लेकिन इसके बीच-बीच में खाली पड़े भूखंड यहां के निवासियों के लिए किसी परेशानी से कम नहीं हैं क्योंकि मानसून के दिनों मेंं इनमें पानी भरकर आसपास के मकानों में चला जाता है।

रेडहिल्स-ताम्बरम बाइपास बनने के बाद यदि महानगर का कोई इलाका विकास के पथ पर अग्रसर हुआ है तो वह है सूरापेट। वैसे वर्ष 2011 से पहले यह इलाका अंबत्तूर पंचायत तिरुवल्लूर तालुका के अन्तर्गत आता था, तब यह इलाका सुनसान और निर्जन नजर आता था। कच्ची सड़कें और जंगलनुमा इलाका होने के कारण इसमें रात को जाने में आवागमन बहुत ही कम होता था। यहां न तो सड़कें बनी थी और न ही पानी व बिजली जैसी सुविधाएं उपलब्ध थी। वर्ष 2011 में सूरापेट को चेन्नई महानगर निगम में शामिल कर दिया गया।

साथ ही इसे कोलकोता-बेंगलूरु हाइवे से जोड़ दिया गया जिसके बाद यह इलाका विकास पथ पर चल पड़ा। यहां लोग जमीन खरीदकर अपार्टमेंट एवं व्यवसाय आदि बनाने लगे। यही कारण है कि पिछले पांच सालों में रीयल एस्टेट व्यवसायियों ने इस इलाके में जमकर निवेश किया है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पांच साल पहले सूरापेट में दो बीएचके के फ्लैट 25 लाख में मिलते थे, उनकी कीमत आज दुगुनी से भी अधिक हो गई है। उनका कहना है कि पिछले पांच सालों में इस इलाके में ढेर सारे बदलाव हुए हैं। इसमें पहले सड़कें बिल्कुल नहीं थी, बिजली के खंभों पर झूलते ढीले तार खतरा बने हुए थे, चारों तरफ जंगली पेड़ एवं झाडिय़ां और घास-फूस के कारण लोग इस इलाके में जमीन खरीदने से कतराते थे, इस कारण लोग अपनी जमीन ओने-पौने दामों में बेचने को मजबूर थे। ज्योंही यह इलाका महानगर निगम में मिला इसकी जमीन की कीमत एवं विकास ने रफ्तार पकड़ ली। अब यहां सड़केंभी बन रही हैं (हालांकि अभी पूरी नहीं बनी हैं), बिजली के खंभों के तार भी खींच दिए गए हैं और पानी की भी सुविधा उपलब्ध हो गई है।

इस क्षेत्र में गत पांच वर्षों में कई नई कॉलोनियां बस गई हैं जैसे माधवन नगर, राघवन नगर आदि। सूरापेट में कई नए स्ट्रीट भी निकाल दिए गए हैं।

पिछले साल हुई भारी बारिश से वार्ड संख्या 24 की अय्यन तिरुवल्लुवर सालै एवं संतोषनगर की कई सड़कें टूट गई थी, जिनकी मरम्मत अभी तक नहीं हो पाई है। इन पर पड़े गड्ढों के कारण वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।

इनका कहना है...

ड्रेनेज का निर्माण जरूरी

इस वार्ड के सूरापेट, पुदुग्राम, डीजे नगर आदि इलाकों में न तो वाटर ड्रेनेज बनी है और न ही नालियों का निर्माण हुआ है जिसके कारण यहां मानसून में जलजमाव होता है। इसके कारण मच्छरों की पैदाइश बढ़ जाती है जिससे मलेरिया एवं वायरल जैसी बीमारियां होने का अंदेशा बढ़ जाता है।

डी.श्रीनवासन, पुदुग्राम

आवागमन की समस्या

वैसे अभी वार्ड में सड़कें बन रही हंै, बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था भी हो रही है, लेकिन वार्ड संख्या 24 में अभी तक पूरी सड़कों की मरम्मत नहीं हो पाई जिससे आवागमन की परेशानी है। सूरापेट के अंदरूनी हिस्से से मुख्य मार्ग तक आने के लिए कोई साधन नहीं है। रेडहिल्स से पूंदमल्ली के लिए मात्र एक साधन बस संख्या 62 है जबकि हाईकोर्ट, पेरम्बूर, माउंट रोड जैसी जगहों पर आवाजाही के लिए कोई आवागमन की व्यवस्था नहीं है। इस इलाके में शेयर ऑटो भी कम ही चलते हैं।

दिवाकर एस., वाल विनाकर स्ट्रीट

सड़कों की मरम्मत जारी

वार्ड में 120 करोड़ रुपए की लागत से सड़कों की मरम्मत का कार्य जारी है। संतोषनगर, डीजी नगर, सूरापेट आदि में सड़कें बन रही हैं। कड़प्पा रोड पर पार्क बनाने की योजना है। इसके अलावा वार्ड में 3500 स्ट्रीट लाइटें लगाई जा रही हंै। इस साल के अंत तक वार्ड को ड्रेनेज सिस्टम से जोडऩे का लक्ष्य भी पूरा कर लिया जाएगा।

ैटी. सुब्रमणी, काउंसलर, वार्ड-24

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