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कागजों में चल रही मछली पालने की ट्रेनिंग, उपकरण खा रहे धूल

Updated: IST Fishing padding training, equipment consuming dust
2014-15 में शासन द्वारा यहां करीब सवा चार करोड़ की लागत से ट्रेनिंग के लिए नई बिल्डिंग व नए ऑफिस के निर्माण के लिए बजट जारी किया और नया निर्माण कराया।

छतरपुर./नौगांव. मत्स्य पालन विभाग के नौगांव स्थित ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षण सिर्फ कागजों में ही चल रहा है। विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से मछली पालन का प्रशिक्षण मजाक बन कर रह गया है। लैब का सामान खंडहरनुमा बिल्डिंग में टूटा है तो वहीं 51 साल पुराना प्रदेश का इकलौता मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र भी जर्जर हो गया है।

जानकारी के अनुसार 1966 में नौगांव के अदालत रोड पर मत्स्य पालन विभाग का कार्यालय खोला गया था। जहां पर एएफओ (सहायक मत्स्य अधिकारी) की ट्रेनिंग दी जाती थी। मछली पालन विभाग ने मछुवारों को मछली पालने के गुर सिखाने की भी यहां व्यवस्था की थी। यहा मछली के बीज को बड़ा किया जाए और इन्हें पानी में कैसे पाला जाए बताया जाता था। यहां से मछली के उन्नत किस्म के बीजों की बिक्री की जाती थी।

करीब 44 सालों तक यहां यह व्यवस्था चलती रही। इसके बाद यहां एक-एक व्यवस्थाएं खत्म की जाती रहीं। अब मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र बंद होने की कगार पर आ गया था। 2014-15 में शासन द्वारा यहां करीब सवा चार करोड़ की लागत से ट्रेनिंग के लिए नई बिल्डिंग व नए ऑफिस के निर्माण के लिए बजट जारी किया और नया निर्माण कराया।

यहां एएफओ की ट्रेनिंग की व्यवस्था फिर से शुरू हुई लेकिन स्टाफ के अभाव के चलते यहां ट्रेनिंग लेने के लिए कर्मचारी तो आते हैं लेकिन स्टाफ न होने के कारण वह वापस लौट जाते हैं। बताया जाता है कि ट्रेनिंग के लिए इन कर्मचारियों को शासन द्वारा ही नौगांव के प्रशिक्षण केंद्र में भेजा जाता है।

प्रशिक्षण केंद्र में रहने के लिए छात्रावास की व्यवस्था है। बावजूद इसके ट्रेनिंग बेहतर तरीके से नहीं चलने से सिर्फ सिर्फ सर्टिफिकेट देने तक ही सीमित हो गया। जिससे साफ है कि यहां की व्यवस्थाएं कागजों पर ही चल रही हैं। बताया जाता है कि इसकी ट्रेनिंग एक जुलाई से शुरू होती है जो करीब दस महीने की होती है। ट्रेनिंग एक जुलाई से शुरू हो चुकी है लेकिन यहां न कोई ट्रेनिंग देने वाला हैं और न ट्रेनिंग लेने वाला।

हौद भी सूख चुका है
मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र में मछली पालन के लिए बीज जिस हौद में डाले जाते हैं वह भी सूख गया है। यहां करीब 14 बड़े-बड़े होद स्थित हैं। पानी का अभाव बताकर यहां मछली के बीज बेचने से विभागीय अधिकारी मुंह मोड़ रहे हैं। जबकि शासन द्वारा मत्स्य पालन के लिए नगर के पिपरी क्षेत्र में भड़ार नदी में एक डेम बनवाया गया था। यह मप्र का इकलौता ट्रेनिंग सेंटर है। फिर भी यहां कागजी खानापूर्ति चल रही है।

अभी नौगांव से एडीएफका स्थानांतरण हुआ है। जो नए आए हैं उन्होंने ज्वाइन नहीं किया है। नौगांव के मत्स्य प्रशिक्षण केंद्र की स्थिति के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा। प्रशिक्षण के नाम पर कागजी खानापूर्ति की जांच कराई जाएगी।
डीआर पटेल, सहायक संचालक मत्स्य छतरपुर

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