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बैंक खाता और आधार न होने से पंजीयन में आई कमी

Updated: IST chhindwara
इस बार रबी के मौसम में सरकार को गेहूं बेचने के लिए किसानों के पंजीयन के सरकार और विभाग के प्रयास ज्यादा सफल होते नहीं दिख रहे हैं।

छिंदवाड़ा .इस बार रबी के मौसम में सरकार को गेहूं बेचने के लिए किसानों के पंजीयन के सरकार और विभाग के प्रयास ज्यादा सफल होते नहीं दिख रहे हैं। विभाग ने पंजीयन की तारीख 11 दिन और बढ़ाकर 25 फरवरी कर दी है लेकिन जिले की 77 समितियों द्वारा किया जा रहे पंजीयन की संख्या बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी है। कुछ समितियों में तो पिछले तीन दिन में एक भी किसान नहीं पहुंचा है। इस सम्बंध में किसानों का बैंक में खाता और आधार न होना भी एक कारण बताया जा रहा है।

नए नियमों के अनुसार किसानों को पंजीयन के पहले बैंक में खाता खुलवाना जरूरी है इसके लिए आधार नम्बर भी अनिवार्य कर दिया है।

इस समय खेती-किसानी और दूरस्थ गांवों में रहने वाले किसान बैंक में खाता खोलने में रुचि नहीं ले रहे हैं। ऑनलाइन पंजीयन के लिए एक भी दस्तावेज अध्ूारा होने पर पंजीयन नहीं हो रहा है। आधार नम्बर भी कई किसानों के पास नहीं है। विभाग के पास पिछले वर्ष तक पंजीयन का जो आंकड़ा है वह चार पांच वर्ष पुराना है।

ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक सहकारी समितियों के कर्मचारियों का कहना है इन वर्षों में कुछ ने अपनी खेती बेच कर दूसरे काम करना शुरू कर दिया तो कुछ खेतों को काटकर वहां प्लाटिंग कर रहे हैं। एेसे किसानों के नाम भी सरकारी रिकॉर्ड में बन हैं। इस बार जब नए सिरे से पंजीयन किया जा रहा है तो अब वास्तविक स्थिति सामने आ रही है। अब तक 18 हजार 283 किसानों ने ही समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए जिले में पंजीयन कराया है।

लोन लेने वाले किसान हिचक रहे

इस वर्ष किसानों की संख्या कम होने को लेकर विभागीय अधिकारी-कर्मचारी एक और कारण बता रहे हैं वह है बैंक से लोन लेने वाले किसानों की हिचकिचाहट। समर्थन मूल्य पर अपना अनाज बेचने के बाद जो भुगतान किसानों को बैंक के माध्यम से किया जाता है उसमें बैंक किसानों से अपनी बकाया वसूली काट लेता है। हालांकि बैंक प्रबंधन किसानों को ये पैसा शून्य प्रतिशत पर देता है। बैंक का कहना है कि हम किसानों को सुविधा दे रहे हैं किसानों को भी चाहिए कि वह ऋण अदायगी समय पर करें और फिर से कर्ज लें।

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