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सुख और समृद्धि के लिए महालक्ष्मी का पूजन

Updated: IST chhindwara
घरों में हाथी लाकर सोलह दीपक जलाए गए। इस पर्व पर सोलह दीपकों के साथ सोलह दूब और इतनी ही संख्या में पकवान चढ़ाए जाने की परंपरा है।

परासिया (छिंदवाड़ा). क्षेत्र में आज महालक्ष्मी पूजन का पर्व उत्साह से मनाया गया। मिट्टी के हाथी का पूजन कर सुख समृद्धि की कामना की गई। घरों में हाथी लाकर सोलह दीपक जलाए गए। इस पर्व पर सोलह दीपकों के साथ सोलह दूब और इतनी ही संख्या में पकवान चढ़ाए जाने की परंपरा है। पर्व को देखते हुए बड़ी संख्या में हाथी की प्रतिमा बेचने लोग आए। पूजा के लिए लगने वाले फूल, पत्तियां आदि की दुकानें भी लगी। पंजाबी समाज ने भी इस पर्व को धूमधाम से मनाया। पंजाबी समुदाय क्षेत्र में बड़ी संख्या में निवास करता है। समाज के प्रतिनिधि सुभाष अरोरा ने बताया कि आठवे श्राद्ध के दिन इस पर्व को मनाया जाता है।

इस त्योहार को लेकर किवंदति है के एक राजा था। उसे किसी ने पीला धागा रानी को बांधने के लिए दिया था। रानी ने वह धागा फेंक दिया। उस धागे को नौकरानी बानी ने उठाया और माथे से लगाकर बांध दिया। इससे नौकरानी की किस्मत खुल गई वह नौकरानी से महारानी बन गई। रानी मुसीबत में आ गई। किसी के कहने पर उसने महालक्ष्मी का पूजन किया तो उसकी समृद्धि लौट कर वापस आ गई। इसलिए इस पर्व को मनाया जाता है।

ब्राह्मण के यहां पूजा करके फिर अक्खा डालकर दिया जाता है। इस दिन तरह तरह के मीठे पकवान बनाए जाते हंै, जिनका लक्ष्मीजी को भोग लगाकर बांटकर खाया जाता है। इनमें प्रमुख है सतपुड़ा, सिवइयाँ, मीठे गच, मीठे चावल, खीर इस तरह यह त्योहार संदेश देता है कि धन का घमंड कभी नहीं करना चाहिए। जो भी लक्ष्मीजी का अनादर करता है वे रूष्ट होकर चली जाती है, जो नम्रता और आदर से लक्ष्मी का आह्वान करता है उनके यहां लक्ष्मी सदा निवास करती है।

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