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पुत्र कामना व पुत्री की लम्बी आयु के लिए रखा जा रहा व्रत

Updated: IST    Longevity of children mothers kept halshashthi
आश्विन मास के कृष्णपक्ष की प्रदोषकाल-व्यापिनी अष्टमी में रखे जाना वाला जीवितपुत्रिका व्रत हिन्दू धर्म की महिओं द्वारा रखा जा रहा है।

छिंदवाड़ा। आश्विन मास के कृष्णपक्ष की प्रदोषकाल-व्यापिनी अष्टमी में रखे जाना वाला जीवितपुत्रिका व्रत हिन्दू धर्म की महिओं द्वारा रखा जा रहा है। अपनी संतान की लम्बी आयु व सुख शांति के लिए जीवितपुत्रिका व्रत रखा जाता हैं। जीवितपुत्रिका व्रत यानी जीवित पुत्र के लिए रखा जाने वाला व्रत। यह व्रत वह सभी सौभाग्यवती स्त्रियां रखती हैं जिनको पुत्र होते हैं।

साथ ही जिनके पुत्र नहीं होते वह भी पुत्र कामना और बेटी की लंबी आयु के लिए यह व्रत रखती हैं। माताएं इस दिन अपने पुत्रों की दीघार्यु, स्वास्थ्य और सम्पन्नता के लिए यह व्रत करती हैं। इसे ग्रामीण इलाकों में 'जीउतिया के नाम से जाना जाता है।

घर पर ही की जा सकती है पूजा

अगर आप किसी मंदिर में नहीं जा पा रहीं हैं तो व्रती प्रदोष काल में गाय के गोबर से आंगन को लीपने के बाद परिष्कृत करके छोटा सा तालाब भी जमीन खोदकर बनाने चाहिए। तालाब के निकट एक पाकड़ की डाल लाकर खड़ा कर शालिवाहन राजा के पुत्र धमाज़्त्मा जीमूतवाहन की कुश निर्मित मूर्ति जल या मिट्टी के पात्र में स्थापित कर पीली और लाल रूई से उसे अलंकृत कर धूप, दीप, अक्षत, फूल, माला एवं विविध प्रकार के नैवेद्यों के साथ पूजन करना चाहिए।

व्रत के प्रभाव से टल जाती है विपत्तियां

जीवितपुत्रिका व्रत की ऐसी मान्यता है कि व्रत रखने वाली माताओं के पुत्र दीर्घजीवी होते हैं और उनके जीवन में आने वाली सारी विपत्तियां अपने आप टल जाती है। निर्जला उपवास के बाद महिलाएं सामूहिक रूप से जीवितपुत्रिका व्रत कथा सुनती हैं।

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