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पानी की तलाश में बना मांझी, पहाड़ खोदकर बनाया रास्ता

Updated: IST water crisis in chhindwara
कक्षा नवमीं के छात्र ने अपने दम पर वहां की झाडिय़ा हटाई, साफ-सफाई की पहाड़ तक जाने का रास्ता बनाया और बोल्डर जमा-जमाकर नीचे पहुंचने तक फावड़े से काटकर रास्ता बनाया, अब वह और उसके दोस्त यहीं से पानी भरते हैं।


परासिया. दशरथ मांझी पर बनी फिल्म मांझी द माउंटेन मैन कहानी है। दशरथ मांझी ने अपने प्यार के लिए पूरा का पूरा पहाड़ तोड़ डाला था क्योंकि उसकी पत्नी पहाड़ोंं से पानी भरते भरते गिर जाती है और उसकी मौत हो जाती है। दशरथ मांझी जैसा ही जज्बा शायद इस नवमीं कक्षा में पढऩे वाले नन्हें बालक का भी है।

बड़कुही के त्रिवेदी बस्ती के पीछे पहाड़ी से रिसते पानी को टैंक में एकत्रित कर लोग इसका उपयोग करते है। बड़कुही नं 4 निवासी कक्षा पांचवीं की छात्रा कुमकुम भलावी कहती है कि तेज धूप में पानी ढोने से उसकी तबियत खराब हो गई थी लेकिन क्या करे मां के साथ आना पड़ता है। वार्ड 10 की रानी साहनी बताती है कि यहां तक पहुंचने के लिए रास्ता तक नहीं है, पानी ले जाने में बहुत परेशानी होती है। एक माह से वार्ड में पानी नहीं आया है, पूरा शहर पानी के लिए भटक रहा है।

वार्ड 8 के निवासी भोपाल बस्ती स्कूल में कक्षा नवमीं के छात्र संदीप बेलवंशी से बातचीत करने पर पानी के लिए जददोजहद की नई तस्वीर सामने आती है। समसवाड़ा में रहने वाला संदीप बड़कुही अपने नाना के घर आया है। उसने बताया कि चोरगुंडी झिरिया में भीड़ के कारण उसने थोड़ी दूर पर जल स्रोत्र को खोजा और नगर परिषद जाकर बताया लेकिन कोई नहीं आया। फिर उसने अपने दम पर वहां की झाडिय़ा हटाई, साफ-सफाई की पहाड़ तक जाने का रास्ता बनाया और बोल्डर जमा-जमाकर नीचे पहुंचने तक फावड़े से काटकर रास्ता बनाया, अब वह और उसके दोस्त यहीं से पानी भरते हैं।

water crisis in chhindwara

बड़कुही त्रिवेदी बस्ती के पीछे पहाडिय़ों की तलहटी में बूंद-बूंद रिस रहे पानी को गडढा खोदकर एकत्रित किया जा रहा है जिसे झिरिया कहा जाता है। पहाड़ी के नीचे तीन किमी के दायरे में लगभग ऐसी चार झिरिया है जिनसे हजारों परिवार अपनी प्यास बुझा रहे है। शहर से लगभग तीन किमी दूर टेढ़ी मेढ़ी पगडंडियों से गुजरते हुए पहाड़ी के नीचे चोरगुंडी झिरिया तक पहुंच कर लोग घंटों कतार लगाकर अपनी बारी का इंतजार करते है।

अपनी बारी का इंतजार कर रहे कक्षा नवमीं के छात्र अभय सोनकर ने बताया कि उसकी मां घरों में कामकाज करती है। एक माह से उसके वार्ड में टैंकर नहीं आया है, तीन माह से नल में पानी बंद है। उसका पूरा समय घर के लिए पानी जुटाने मे लग जाता है। वार्ड क्र 10 से सोमेश और सज्जन चौरासे कहते है कि झिरिया की साफ-सफाई और मरम्मत तक नहीं की गई है, यहां रात मे लोग पानी भरने आते है लेकिन लाइट और सुरक्षा की व्यवस्था नहीं है। वार्ड 12 की दुर्गा बनवारी का जनप्रतिनिधियों पर विश्वास नहीं है वह कहती है कि सब बाते करते है और कुछ नहीं। बड़कुही में जलसंकट से निपटने के लिए लोग नित नए उपाय कर रहे है। घर में रखी सायकिल को मरम्मत कराकर पानी ढोने के काम में लाया जा रहा है वहीं बैलगाड़ी, गधों का उपयोग भी किया जा रहा है। रात में आटो और निजी वाहनों से भमोड़ी चांदामेटा से पानी लाया जा रहा है।

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