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एक डायलिसिस मशीन में भी लापरवाही, दौड़भाग कर बचाई मरीज की जान

Updated: IST chhindwara
जिला अस्पताल में एक टेक्नीशियन के छुट्टी पर जाते ही यूनिट पर ताला की नौबत, नहीं किए वैकल्पिक इंतजाम

छिंदवाड़ा .जिला अस्पताल की डायलिसिस यूूनिट में चल रही एक मशीन की टेक्नीशियन के छुट्टी पर जाते ही गुरुवार को एक मरीज की जान मुश्किल में पड़ गई और परिजन को दौड़ भाग कर उसे बचाना पड़ा। इस स्थिति के चलते दूसरे मरीजों को भी डायलिसिस के लिए दिन भर परेशान होना पड़ा। इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन द्वारा वैकल्पिक इंतजाम न किए जाने का मामला सामने आया है। इस अस्पताल में पांच हीमो डायलिसिस मशीनें है। इनमें से चार मशीनें तकनीकी रूप से बंद हो गई हैं। प्रयास किए जाने के बाद भी इन्हें सुधारा नहीं जा सका है।

इन मशीनों को संचालित करने के लिए दो टेक्नीशियन हंै। इनमें से एक लम्बी छुट्टी पर चली गई है। इसकी अनुपस्थिति पर यूनिट मेें सुबह 8 बजे अस्पताल खुलते ही ताला नजर आया। इस बीच जुन्नारदेव के मरीज किशोर दुसाद को लेकर उनकी पत्नी को पहुंची और टेक्नीशियन की पूछताछ की। लगातार तीन घंटे तक कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर परिजन परेशान होते रहे।

इस दौरान मरीज की तबीयत बिगडऩे पर अन्य मरीजों के परिजन के साथ दौड़ भाग की गई और दूसरी टेक्नीशियन को मनाया गया। उसने 11 बजे डायलिसिस मशीन को चालू किया, तब मरीज की जान बची। इस अव्यवस्था से दूसरे मरीज रूपा भोड़े को भी डायलिसिस के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ा। जिला अस्पताल के अलावा हीमो डायलिसिस मशीनें प्राइवेट में कहीं नहीं है। प्राइवेट में कराना हो तो सिवनी या फिर नागपुर जाना पड़ता है।

कलेक्टर साहब, ठीक करवा दो मशीन

मरीज किशोर दुसाद की पत्नी और रूपा के भाई अर्जुन भोड़े चार बार कलेक्टर से जनसुनवाई में मिल चुके हैं। हर बार वे चार बंद मशीनों को सुधारने और टेक्नीशियन की नियमित व्यवस्था की मांग करते हैं। इन दोनों का कहना है कि इस समस्या पर अब तक प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन ने पहल नहीं की। इसके चलते हर बार उनके मरीजों की जान मुश्किल में पड़ जाती है। अगली बार वे कलेक्टर से मशीन ठीक करने की मांग करेंगे या फिर उनके मरीजों के लिए मौत मांगेंगे। वे अस्पताल की व्यवस्थाओं से त्रस्त हो गए हैं।

सुधारने के लिए इंजीनियर बुलाए गए हैं

जिला अस्पताल की बंद चार डायलिसिस मशीनों को सुधारने के लिए इंजीनियर बुलाए गए हंै। जहां तक एक टेक्नीशियन के छुट्टी पर जाने से मरीजों को हुई परेशानी का सवाल है तो हम दूसरी टेक्नीशियन की ड्यूटी लगाएंगे। यह मामला वरिष्ठ अधिकारियों के ध्यान में लाया जाएगा।

डॉ. सुशील दुबे, आरएमओ, जिला अस्पताल

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