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जानें कैसे 'रोशनी' ने जगाई मां बनने की उम्मीद...

Updated: IST Delivery
'रोशनी क्लीनिक' नि:संतान गरीब महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई

छिंदवाड़ा . जिला अस्पताल में प्रति सप्ताह गायनिक ओपीडी में आयोजित 'रोशनी क्लीनिक' नि:संतान गरीब महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई है। इस शिविर में एक वर्ष से उपचार करा रहीं महिलाओं को राहत मिली है। रोशनी क्लीनिक स्वास्थ्य शिविर से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को दो महिलाओं की प्राथमिक जांच में उन्हें गर्भवती होना पाया गया।

जबकि पूर्व में 13 महिलाओं को राहत मिल चुकी है। इस प्रकार अब तक कुल 15 नि:संतान महिलाएं अब जल्द ही संतान सुख प्राप्त कर सकेंगी। हालांकि उक्त योजना के तहत 49 प्रकरण उच्च संस्थाओं में रैफर किए जाने हंै। शासन से इसके लिए अनुमति मिलते ही सभी प्रकरणों को जल्द ही उपचार के लिए भेजा जाएगा।

'रोशनी' ने जगाई उम्मीद की किरण

बताया जाता है कि प्रति सप्ताह शिविर में 80 से 90 मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं। डॉ. शरद बंसोड़ ने बताया कि स्थानीय चिकित्सकों के लगातार प्रयास से 15 नि:संतान महिलाओं को आराम लग गया है। शिविर में महिलाएं बांझपन के साथ-साथ कैंसर शुगर समेत कई गम्भीर स्त्री रोगों की जांच निशुल्क करा सकती हैं।

26 जनवरी से शुरू हुई थी योजना

गरीब परिवार की महिलाओं को बांझपन से मुक्ति दिलाने के लिए प्रदेश सरकार ने विभिन्न जिला अस्पतालों में 'रोशनी क्लीनिक' स्वास्थ्य योजना की 26 जनवरी 2016 से शुरुआत की है। इसमें जिलास्तर पर महिलाओं की बांझपन के साथ-साथ गम्भीर स्त्री रोगों की जांच व उपचार भी किया जाता है तथा आवश्यक होने पर सम्बंधित निजी संस्थाओं में रैफर भी किया जाता है।

राज्य शासन उक्त मामले में सहायता राशि भी देती है। जानकारी के अनुसार बांझपन के उपचार के लिए राज्य बीमारी सहायता कोष के माध्यम से करीब 80 हजार रुपए तक अनुदान दिया जाता है।

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