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एक-दूसरे के अकाउंट में पहुंचा सर्विस प्रोवाइडर्स का पैसा

Updated: IST chhindwara
ई-रजिस्ट्रेशन में गड़बड़ी: पंजीयन विभाग ने समायोजन के लिए भरवाए सहमति पत्र

छिंदवाड़ा . पंजीयन विभाग में लागू ई-रजिस्टे्रशन व्यवस्था में सर्विस प्रोवाइडर्स के लाखों रुपए एक-दूसरे के बैंक अकाउंट में पहुंच गए। इससे बढ़ती शिकायतों को देखते हुए विभागीय अधिकारियों ने अकाउंट के समायोजन का प्लान बनाया है। इस प्लान को लागू करने के लिए इन सर्विस प्रोवाइडर्स से एक सहमति पत्र भी भरवाया गया है। इसके बाद जल्द होने वाले इस समायोजन से उम्मीद की जा रही है कि आगामी 15 दिनों में जिले के सर्विस प्रोवाइडर्स की करीब 40 लाख रुपए की राशि वास्तविक हकदार को मिल सकेगी।

पिछले वर्ष जुलाई 2015 में लागू इस व्यवस्था के अनुसार सर्विस प्रोवाइडर्स सम्पत्ति के पक्षकारों से सम्पत्ति मूल्य पर स्टाम्प शुल्क जमा कराते हैं और फिर उसे अपने अकाउंट से ऑनलाइन जमा करते हैं। इस दौरान कई बार सर्वर की समस्या से अकाउंट से पैसा कट जाता है और तकनीकी समस्या से कोषालय तो कभी किसी दूसरे सर्विस प्रोवाइडर्स के खाते में यह राशि पहुंच जाती है।

पंजीयन विभाग के खाते में यह राशि न पहुंच पाने के चलते प्रोवाइडर्स को दोबारा अपने पैसे खाते से जमा करना पड़ता है। इस समस्या के चलते पूरे जिले के 115 सर्विस प्रोवाइडर्स में से अधिकांश की राशि फंस गई है। वे इसकी शिकायत विभागीय हेल्प डेस्क और सीएम हेल्पलाइन में भी कर चुके हैं।

इसलिए भरवाए गए सहमति पत्र

पंजीयन विभाग द्वारा हर सर्विस प्रोवाइडर्स से सहमति पत्र भरवाए गए हैं, जिसमें उनके अकाउंट का समायोजन किए जाने पर उन्हें आपत्ति नहीं होगी। विभागीय प्लान यह है कि किसी के बैंक अकाउंट से गलत पोस्टिंग से जमा राशि वापस होगी तो वहीं जिन्हें नुकसान उठाना पड़ा, उनके खातों में यहीं राशि पहुंचा दी जाएगी। विभाग प्लान पर जल्द अमल करेगा।

कोषालय में फंसी राशि लौटी

विभागीय अधिकारियों का दावा है कि सर्विस प्रोवाइडर्स की जितनी भी राशि कोषालय में फंसी थी, उन्हें लौटा दिया गया है। केवल सर्विस प्रोवाइडर्स के आपसी खातों में फंसी लाखों रुपए की रकम को निकालना है। पूरे प्रदेश में इस समस्या से निपटने की कोशिश में विभागीय अधिकारी और ई-सम्पदा सॉफ्टवेयर संचालित करने वाली एजेंसी लगी हुई है।

भोपाल भेजे गए सहमति पत्र

सर्विस प्रोवाइडर्स के खातों के समायोजन के लिए सहमति पत्र भरवाकर भोपाल भेजे गए हैं। इससे फंसी राशि वास्तविक हकदार को मिल सकेगी।

दिनेश कौशले, प्रभारी जिला पंजीयक

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