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पौने तीन लाख की आबादी पर मंडरा रहा मलेरिया का खतरा

Updated: IST chhindwara
हाईरिस्क जोन में 316 गांव, एक हजार से अधिक बच्चे व बुजुर्ग बीमार... बारिश से जगह-जगह जमा पानी में पनपने वाले मच्छरों से पौने तीन लाख आबादी पर मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है।

छिंदवाड़ा . बारिश से जगह-जगह जमा पानी में पनपने वाले मच्छरों से पौने तीन लाख आबादी पर मलेरिया का खतरा मंडरा रहा है। पांच विकासखण्ड मोहखेड़, हर्रई, जुन्नारदेव, परासिया और तामिया के 316 गांवों को हाईरिस्क जोन में रखा गया है। इनमें बीमार होने वाले बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक लगातार बुखार आने पर सही ढंग से इलाज नहीं करा पा रहे हैं। यह जिले से लेकर भोपाल तक चिंता का विषय बना हुआ है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो इन प्रभावित ब्लॉक की जनसंख्या 2 लाख 72 हजार 150 है। इनमें 14 साल से कम बच्चों की संख्या 59 हजार 409 है। जंगलों से लगे जब गांवों के घरों के आसपास पानी एकत्र हो जाता है तो उसमें पनपने वाले मादा एनोफिलिस मच्छर काटकर ग्रामीणों को बीमार कर देते हैं। गांवों में इलाज की बेहतर सुविधा न होने पर या तो किसी नीम-हकीम झोलाछाप के पास पहुंच जाते हैं या फिर झाड़ फूंक का सहारा लेते हैं। इससे बीमारी और गम्भीर हो जाती है।

इन विकासखण्डों में मलेरिया पॉजीटिव का आंकड़ा पिछले वर्ष 2015 में सरकारी तौर पर 3500 था। गैर सरकारी संख्या इससे अधिक है। चिकित्सक भी स्वीकार कर रहे हैं कि जागरुकता के अभाव में मलेरिया हर वर्ष हाईरिस्क गांवों में पैर पसारता है। इससे मौत भी हो जाती है। इस पर लाअखों रुपए का बजट खर्च करने पर भी स्थिति जस की तस है।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ.देवेन्द्र भालेकर ने बताया कि जिले के पांच ब्लॉक में मिलने वाले मलेरिया केस को देखते हुए मलेरिया और आयुर्वेद विभाग द्वारा संयुक्त रूप दवा वितरण का प्लान किया गया है।

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