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माफ़ करिए, वो महान क्रिकेटर पहले बनारसी बाद में पाकिस्तानी था

Updated: IST Niyaz Ahmed Siddiqi
बनारस के इस लाल ने अपना पहला मैच करांची के कायदे आजम स्टेडियम में खेला था। 1972 में बांग्लादेश पाकिस्तान विभाजन के बाद नियाज करांची चले आये जहाँ वर्ष 2000 में उनकी मृत्यु हो गई।

वाराणसी: 11 नवम्बर 1945 को बनारस शहर के नई सड़क इलाके के सिद्दीकी परिवार में जब नियाज का जन्म हुआ तो पिता ने कहा मेरा बेटा देश का नाम रोशन करेगा माँ ने कहा खुदा का करम है जरुर करेगा। नियाज ने देश का नाम रोशन जरुर किया लेकिन वो देश भारत नहीं पाकिस्तान था।

भारत पाक विभाजन ने बनारस से छीना महान क्रिकेटर
1967 में पाकिस्तान की टीम ने जब इंग्लैण्ड का दौरा किया उस वक्त तेज गेंदबाज के तौर पर अपना कमाल दिखाने वाले नियाज अहमद सिद्दीकी ने 11 मैचों में 25 विकेट लिए। उस वक्त क्रिकेट की बाइबिल कही जाने वाले विजडन में महान क्रिकेटर कमरुद्दीन बट्ट ने उनके बारे में लिखा कि वो पाकिस्तान क्रिकेट के लिए उपलब्धि थे। वो भारत की उपलब्धि हो सकते थे। लेकिन बुरा हो भारत पाकिस्तान विभाजन का कि न सिर्फ बनारस शहर ने बल्कि देश ने एक महान क्रिकेटर को पाकिस्तान जाने पर मजबूर कर दिया ,विभाजन के वक्त नियाज का पूरा परिवार पश्चिमी पाकिस्तान के ढाका शहर की ओर कूच कर गया।

मैदान पर नियाज का कमाल
बनारस के इस लाल ने अपना पहला मैच करांची के कायदे आजम स्टेडियम में खेला था। जहाँ करांची व्हाइट्स की तरफ से खेलते हुए उन्होंने पहली पारी में तीन कैच पकड़े और तीन विकेट लिए। 1967 से 1969 के बीच नियाज ने पाकिस्तान की तरफ से दो टेस्ट मैच खेले मजेदार बात यह थी कि उस वक्त वो पाकिस्तानी टीम में इकलौते खिलाड़ी थे जो पश्चिमी पाकिस्तान से थे। नियाज को पाकिस्तान की तरफ से खेलने का मौका तब मिला जब उन्होंने पहले पांच प्रथम श्रेणी के मैचों में केवल 84 ओवर की गेंदबाजी करके सात विकेट झटक लिए थे। अहमद जब 1967 में इंग्लैण्ड के खिलाफ खेलने गए तो आधी पाकिस्तानी टीम चोटों से जूझ रही थी लेकिन उस दौरान अपनी शानदार गेंदबाजी से नियाज ने सबका मन मोह लिया।

याद रहेगी वो इंग्लैण्ड में मिली जीत
नियाज ने इंग्लैण्ड में अपने पहले मैच में केंट के खिलाफ 86 रनों पर पांच विकेट झटक लिए ।लेकिन मजेदार घटना तब घटी जब माइनर काउंटी के खिलाफ खेलते हुए पाकिस्तान की टीम के 9 विकेट महज 94 रनों पर गिर चुके थे। लेकिन नियाज ने आखिर में आकर शानदार 69 रनो की पारी खेली और दूसरे छोर पर खड़े अपने साथी सलाहुद्दीन की मदद से 124 रन जोड़े ,फिर गेंदबाजी के दौरान शुरूआती दो विकेट लेकर पाकिस्तान को जीत दिला दी। दूसरे मैच में नियाज ने 72 रन देकर दो विकेट लिए लेकिन पाकिस्तान हार गया।

पाकिस्तान ने राजनैतिक मोहरे की तरह किया नियाज का इस्तेमाल
बाद के दिनों में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में नियाज का शानदार प्रदर्शन जारी रहा, लेकिन उन्हें पाकिस्तानी टीम की ओर से बहुत ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिला। पाकिस्तान क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष शहरयार खान ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि अहमद को लम्बे समय तक पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में 12 वें खिलाड़ी के तौर पर खिलाया जाता था शायद पाकिस्तान यह दिखाना चाहता था कि वो अपनी राष्ट्रीय टीम में पूरे देश का प्रतिनिधित्व रखता है। चूँकि नियाज पश्चिमी पाकिस्तान के थे इसलिए ऐसा करके पाकिस्तान को राजनैतिक लाभ मिल रहा था ,लेकिन यह सच्चाई थी कि अविभाजित पाकिस्तान में क्रिकेट के बढ़ावे को लेकर पाकिस्तान गंभीर नहीं था।

पहले बनारसी बाद में पाकिस्तानी थे नियाज- शमशुद्दीन
वहीं नियाज के साथ भी अच्छा व्यवहार नहीं किया गया। 1972 में बांग्लादेश पाकिस्तान विभाजन के बाद नियाज करांची चले आये जहाँ वर्ष 2000 में उनकी मृत्यु हो गई। नई सड़क के शमशुद्दीन जो नियाज के परिवार को जानते हैं कहते हैं माफ़ करिए, वो महान क्रिकेटर पहले बनारसी बाद में पाकिस्तानी था।

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