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विराट दे रहे सभी भारतीय कप्तानों को चुनौती

Updated: IST virat kohli
यदि बात जीते हुए मैचों की संख्या के पैमाने पर ही करें तो भी विराट का ग्राफ रोजाना ऊपर की तरफ बढ़ता हुआ ही दिखाई देगा। यह सही बात है कि विराट को अभी विदेशी पिचों पर परीक्षा देना बाकी है, लेकिन यदि विदेशी पिचों पर सबसे सफल भारतीय कप्तान सौरव गांगुली से उनकी तुलना की जाए तो रणनीति के मोर्चे पर दोनों एकसमान ही दिखाई देते हैं।

कुलदीप पंवार

नई दिल्ली। किसी भी टीम के कप्तान की सफलता का पैमाना क्या होता है? क्या टीम की जीते हुए मैचों की संख्या? जी नहीं, उससे भी बड़ी बात होती है किसी कप्तान पर उसकी टीम का विश्वास और उसके लिए जीतने की चाहत। यदि इस पैमाने को सही माना जाए तो विराट कोहली भारत के लिए कप्तानी करने वाले सभी पूर्ववर्ती खिलाडि़यों से एक कदम आगे नजर आते हैं। एेसे में विराट जल्द ही भारत के सर्वकालिक महान कप्तान होंगे, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

खुद प्रेरणा बनकर प्रदर्शन

भारतीय क्रिकेट के दो सबसे सफल कप्तान रहे हैं महेंद्र सिंह धौनी और सौरव गांगुली, इन दोनों की सबसे खास बात यदि पूछी जाए तो सभी विशेषज्ञ एकमत होकर इन दोनों द्वारा अपने प्रदर्शन से टीम को प्रेरित करने की विशेषता का जिक्र करेंगे। लेकिन यदि ये कहा जाए कि विराट इस मामले में इन दोनों से भी एक कदम आगे हैं, जो बल्ले से ही नहीं अन्य तरीकों से भी टीम का हौसला बढ़ाते हैं। इसका गजब उदाहरण मोहाली टेस्ट में ही देखने को मिला। आपको मोहाली टेस्ट का वो नजारा तो याद होगा, जब रविचंद्रन अश्विन और अन्य भारतीय स्पिनर स्पिन को ज्यादा नियंत्रित करने के प्रयास में छोटी लेंग्थ की गेंद फेंक दे रहे थे। एेसी गेंद पर बल्लेबाज के ताकत भरे स्ट्रोक से चोट लगने की संभावना के बावजूद कप्तान विराट कोहली खुद सिली प्वॉइंट पर खड़े हो गए। यह वो बात थी, जिससे इस खतरनाक स्पॉट पर खड़ा होने के लिए अन्य खिलाडि़यों को जोश मिला और बल्लेबाजों पर दबाव बना।

खेल की है सही समझ

खेल के दौरान किस खिलाड़ी का उपयोग कैसे किया जाए? यह किसी भी कप्तान की समझबूझ का पैमाना होता है। कोहली इस मामले में १० में से १० नंबर पा सकते हैं। चाहे किसी बल्लेबाज के लिए गेंदबाज के चयन का मामला हो या बल्लेबाजी में क्रम तय करने की बात। मोहाली टेस्ट में मोहम्मद शमी के बाउंसरों पर इंग्लिश बल्लेबाजों की झिझक का इस्तेमाल करना रहा हो या ओपनर करुण नायर की मौजूदगी के बावजूद पार्थिव पटेल को ओपनिंग में उतारने का फैसला। कोहली को भले ही चीफ कोच के तौर पर अनिल कुंबले जैसे इंजीनियर माइंड की मदद हासिल हो, लेकिन मैदान पर योजना कप्तान को ही बनानी होती है, जिसमें कोहली हर दांव परखकर चलते दिखाई देते हैं।

खेल पर नहीं कप्तानी का दबाव

विराट कोहली की सबसे खास बात कप्तानी के दबाव में अपनी बल्लेबाजी को प्रभावित होने देने की बजाय और निखारना है। यह निखार उनका अपनी कप्तानी में खेले मैचों में ६० का औसत और दूसरे की कप्तानी में खेले मैचों में ४१ के औसत का अंतर ही दिखा देता है। कप्तानी का दबाव कितना फर्क पैदा करता है, यह इस बात से समझा जा सकता है कि अन्य भारतीय कप्तानों में सिर्फ धौनी को छोड़ दिया जाए तो कप्तानी के दौरान सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ जैसे बल्लेबाजों का रन औसत भी सामान्य औसत से नीचे चला गया था।

जीतने के लिए खेलते हैं कोहली

विराट कोहली की कप्तानी की सबसे खास है उनका जीतने का जज्बा। भारतीय पिचों पर जहां मैच को ड्रॉ कराना बेहद आसान माना जाता है, वहां विराट की कप्तानी में १० मैचों में सिर्फ एक ड्रॉ मैच दिखाता है कि उनकी निगाहें अन्य कप्तानों की तरह मैच को ड्रॉ कराने पर नहीं बल्कि उसका परिणाम निकालने पर रहती हैं। एेसे में वह परिणाम चाहे हार हो या जीत, इसकी परवाह वो नहीं करते हैं। इसके उलट यदि अन्य भारतीय कप्तानों का रिकॉर्ड देखा जाए तो सिर्फ एमएस धौनी और सौरव गांगुली को छोड़कर ड्रॉ का रेशियो सभी का बेहद अधिक दिखाई देगा।

टीम को साथ लेकर खेलते हैं कोहली

कोहली की कप्तानी की सबसे बड़ी खासियत उनका अपनी टीम पर और टीम का उनके ऊपर विश्वास है। इस आपसी विश्वास का नजारा इंग्लैंड के खिलाफ चालू सीरीज के दौरान ही कई बार मैदान में दिखाई दिया है, जब उन्होंने खुद पूरी तरह संतुष्ट नहीं होने के बावजूद गेंदबाज के विश्वास पर डीआरएस लेने में कोई देरी नहीं की। इसके अलावा टीम का उत्साह बढ़ानेे में भी वह अन्य खिलाडि़यों से अलग दिखाई देते हैं। विकेट या कैच लेने वाले या अर्धशतक-शतक लगाने वाले खिलाड़ी को कप्तान विराट का गले लगाकर बधाई देने का नजारा इस समय टीम इंडिया में आम बात है। यह वो तरीका होता है, जो खिलाड़ी का उत्साह दोगुना कर देता है और वह टीम की जीत में अपना १०० प्रतिशत झोंक देता है।

- ८४ साल पुराना है भारतीय क्रिकेट टीम का टेस्ट इतिहास

- ३२ खिलाडि़यों ने की है आज तक भारत की टेस्ट में कप्तानी

- १६ खिलाडि़यों ने संभाली है १० या ज्यादा टेस्ट मैच में कमान

- ६० प्रतिशत जीत के साथ कोहली का है सबसे ज्यादा विनिंग रेट

भारत के टॉप-५ सफल कप्तान

कप्तान मैच जीत हार ड्रॉ जीत त्न

एमएस धौनी ६० २७ १८ १५ ४५.००

सौरव गांगुली ४९ २१ १३ १५ ४२.८५

अजहरूद्दीन ४७ १४ १४ १९ २९.७८

विराट कोहली २० १२ ०२ ०६ ६०.००

सुनील गावस्कर ४७ ०९ ०८ ३० १९.१४

पहले २० टेस्ट में टॉप-५ भारतीय कप्तान

कप्तान जीत हार ड्रॉ

विराट कोहली १२ ०२ ०६

एमएस धौनी १२ ०२ ०६

राहुल द्रविड़ ०६ ०६ ०८

सौरव गांगुली १० ०५ ०५

सचिन तेंदुलकर ०४ ०४ १२

(धौनी ने विदेश में विराट के मुकाबले १ मैच कम जीता है)

कप्तानी में बल्ले से भी भारी हैं विराट

बल्लेबाज कप्तानी मैच रन कप्तानी में औसत करियर औसत

विराट कोहली २० १८६१ ६०.०३ ४८.२८

सचिन तेंदुलकर २५ २०५४ ५१.३५ ५३.७८

राहुल द्रविड़ २५ १७३६ ४४.५१ ५२.३१

सुनील गावस्कर ४७ ३४४९ ५०.७२ ५१.१२

सौरव गांगुली ४९ २५६१ ३७.६६ ४२.१७

एमएस धौनी ६० ३४५४ ४०.६३ ३८.०९

अजहरूद्दीन ४७ २८५६ ४३.९३ ४५.०३

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