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हमें अपनी टीम इंडिया और अपने खिलाडियों पर गर्व है! क्या आपको है?

Updated: IST We are proud of our team India! Do you have?
हम एक खेल को दोनों देशों की दुश्मनी की तरह पेश करते हैं, कश्मीर में में शहीद हुए जवानों की मौत का बदला क्रिकेट के मैदान पर लेने के लिए दबाब बनाया जाता है। हम यह क्यों भूल जाते हैं कि यह काम देश की सरकार है, एक खेल के खिलाड़ियों का नहीं! इस तरह की कई बातों ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं तो अप्रत्यक्ष रूप से टीम इंडिया और हमारे खिलाडियों पर जबरदस्त दबाब बनाया!

राहुल मिश्रा: चैंपियंस ट्रॉफी 2017 के फाइनल में भारत को पाकिस्तान ने हरा गया। इसके बाद भारतीय फैन्स ने सड़कों पर उतरकर अपना गुस्सा और दुख जाहिर किया। कुछ लोगों ने अपने टीवी फोड़ दिए तो कुछ ने भारतीय खिलाड़ियों के पोस्टर भी जलाए। कुछ लोगों ने तो सड़क पर उतरकर भारतीय टीम के खिलाफ नारेबाजी भी की।

''भारत पूरे टूर्नामेंट में चैंपियनों की तरह खेला, लेकिन इस मैच में केवल पाकिस्तान बेहतर खेला।''

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भले ही भारत यह मैच हार गया हो लेकिन फिर भी हमें यह सोचना होगा कि हम खेल के मैदान को जंग का मैदान क्यों बना देते हैं? ये पाकिस्तान का दिन था। वो अच्छा खेला, उसका लक उसके साथ था। उसे जीत हासिल हुई। हर खेल के दो पहलू होते हैं, हार और जीत! और हमें हर मैच के अंत में दोनों पहलुओं में से किसी एक को स्वीकार करना पड़ता है। भले ही कल यहाँ पाकिस्तान था, अगर ऑस्ट्रेलिया होता तो? श्रीलंका या दक्षिण अफ्रीका होता तो? तब भी हम पत्थर बाजी करते, नारे बाजी करते या टीवी तोड़ते? मुझे नहीं लगता कि ऐसा होता! तब हम शायद इसे मात्र एक खेल में मिली हार मान कर भुला देते। साल 2016 विश्वकप के सेमीफाइनल में वेस्टइंडीज के हाथों मिली हार के बाद क्या हमने टीवी तोड़े? तो फिर पाकिस्तान के हाथ मिली हार के बाद क्यों? हम यह मानते हैं कि पाकिस्तान कूटनीतिक दृष्टि से बहुत कमीना और आतंकवाद को पालने वाला देश है।

Image result for team india for champions trophyलेकिन यहाँ एक जंग नहीं बल्कि एक क्रिकेट का मैच खेला गया।

भारत के लिए भी यह टूर्नामेंट शानदार रहा! हम फ़ाइनल में अच्छा प्रदर्शन कर पहुंचे! बस फाइनल में टीम इंडिया में प्रदर्शन निराशाजनक रहा। खैर हार जीत खेल के दो पहलू हैं। हम एक खेल को दोनों देशों की दुश्मनी की तरह पेश करते हैं, कश्मीर में में शहीद हुए जवानों की मौत का बदला क्रिकेट के मैदान पर लेने के लिए दबाब बनाया जाता है। हम यह क्यों भूल जाते हैं कि यह काम देश की सरकार है, एक खेल के खिलाड़ियों का नहीं! इस तरह की कई बातों ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं तो अप्रत्यक्ष रूप से टीम इंडिया और हमारे खिलाडियों पर जबरदस्त दबाब बनाया!

हमारे कुछ भारतियों की वजह से क्रिकेट के सभ्य खेल को बड़बोलेपन से असभ्य बना दिया। कुछ पूर्व खिलाड़ियों का बड़बोलापन ऐसा रहा कि रासिद लतीफ़ जैसा पाकिस्तान का पूर्व खिलाड़ी को भारत पर हंसने का मौका मिला।

From Border to London; Harega Pakistan, Pak must b

हमें आज सोचना होगा कि यह सिर्फ एक खेल है बाकी खेलों की तरह, हालांकि यहाँ हमारी टीम इंडिया बाकी खेलों से अच्छा प्रदर्शन करती है इसलिए इसे यहाँ एक धर्म की तरह पूजा जाता है। इसलिए हम इन पर गर्व भी करते हैं। लेकिन ये सिर्फ क्रिकेट खेलते हैं, देश का नाम रोशन करते हैं। लेकिन क्या गेंहू का एक दाना भू उगाते हैं? क्या किसी की जान बचाते हैं? हमें यह भी सोचना होगा कि खिलाड़ी हमारा मनोरंजन करते हैं! देश का मान बढ़ाते हैं! हमारे चहेते होते हैं! लेकिन उसके एवज़ में भरपूर पैसे भी कमाते हैं। अगर आपको इतने ही बड़े देशभक्त हैं तो किसी का परोपकार करें, एक डॉक्टर, मजदूर या किसान को अपना हीरो बनाएं। यह एक खेल था जहाँ फ़ाइनल में भारत से पाकिस्तान बेहतर खेला और उसे जीत हासिल हुई! इसमें खिलाड़ियों को गालियां क्यों?

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हम क्यों देशभक्ति को क्रिकेट से जोड़ कर टीम इंडिया के हारने पर उन्हें गालियां देते हैं. हमें यह सोचना होगा!

खैर! मुझे तो अपनी टीम इंडिया पर गर्व है! क्या आपको है?

Well Played Team India!

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