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दिल्ली ब्लास्ट मामले में आरोपी को 10 साल की सजा, 12 साल बाद फैसला 

Updated: IST delhi blast
तीन आरोपियों में से मोहम्मद हुसैन फाजिली और मोहम्मद रफीक शाह बरी कर दिया। सिर्फ मुख्य आरोपी तारिक अहमद डार को अदालत ने दोषी माना।

नई दिल्ली. दिल्ली हुए सीरियल ब्लास्ट मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी को अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई है। ये मामला 12 साल पहले का है। पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए तीन आरोपियों में से मोहम्मद हुसैन फाजिली और मोहम्मद रफीक शाह बरी कर दिया। सिर्फ मुख्य आरोपी तारिक अहमद डार को अदालत ने दोषी माना।

तीन धमाकों में मारे गए थे कई लोग

अदालत में दिल्ली पुलिस केस से जुड़े कुछ आरोप साबित ही नहीं कर पाई। बता दें कि के पहाड़गंज में हुए ब्लास्ट में 9 लोग मारे गए थे। इसमें 60 लोग जख्मी हुए थे। जबकि गोविंदपुरी में चार लोग जख्मी हुए थे। सरोजनी नगर में 5 लोगों की मौत हुई थी और करीब 130 जख्मी हुए थे।

इसलिए रिहा हुआ तारिक

2005 में हुए सीरियल ब्लास्ट में कोर्ट ने तारिक अहमद डार को सेक्शन 38 और 39 के तहत 10 साल की सजा सुनाई थी। तारिक इस सजा से ज्यादा वक्त तक जेल में रह चुका है। सजा पूरी होने की वजह से उसे गुरुवार को रिहा कर दिया जाएगा।
कोर्ट को दो आरोपियों को पर्याप्त सबूतों के अभाव में बरी करना पड़ा। दिल्ली पुलिस मो. हुसैन फाजिली और मो. रफीक शाह पर लगाए अपने आरोप साबित करने मे नाकामयाब रही। कोर्ट का ये फैसला दिल्ली पुलिस के लिए एक तरह से झटका है।

ब्लास्ट के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ

दिल्ली के सरोजनी नगर, पहाड़गंज और गोविंदपुरी में हुए इन धमाकों के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ माना गया था। कोर्ट ने तारिक अहमद डार, मोहम्मद हुसैन फाजिली और मोहम्मद रफीक शाह पर देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने, आपराधिक साजिश रचने, हत्या, हत्या के प्रयास और हथियार जुटाने के आरोप तय किए थे।

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