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एसयूएम अस्पताल में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन, 4 लोग गिरफ्तार

Updated: IST SUM Hospital
अग्निशमन विभाग द्वारा दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, फायर डिटेक्शन सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा, क्योंकि उसे ठीक से जोड़ा नहीं गया

भुवनेश्वर/नई दिल्ली। ओडिशा में सोमवार को भीषण अग्निकांड का शिकार हुए एसयूएम अस्पताल के मालिक को लापरवाही व अग्नि सुरक्षा नियमों के घोर उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया जा सकता है। हृदय विदारक हादसे में 22 लोगों की मौत हो गई थी। चिकित्सा शिक्षा व प्रशिक्षण (डीएमईटी) के निदेशक प्रकाश चंद्र महापात्रा ने संकेत देते हुए कहा कि इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड एसयूएम हॉस्पिटल के मालिक को गिरफ्तार किया जा सकता है।

महापात्रा ने कहा, पुलिस अस्पताल के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। हमने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मालिक भी प्रबंधन के तहत ही आता है। पुलिस उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। डीएमईटी के निदेशक के मुताबिक, राज्य में चल रहे 568 निजी अस्पतालों व नर्सिंग होम में से केवल तीन कॉरपोरेट अस्पतालों (भुवनेशवर, कटक व पुरी में) को अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र मिले हैं।

इस सूची में एसयूएम हॉस्पिटल का नाम नहीं है। उसके पास अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र नहीं है। एक वरिष्ठ अग्निशमन अधिकारी ने बताया अस्पताल ने साल 2013 में अग्नि सुरक्षा के उपायों का ऑडिट नहीं कराया था। उसके पास कोई मान्य अग्नि सुरक्षा प्रमाण पत्र भी नहीं है। एसयूएम हॉस्पिटल के पास न तो 25 हजार लीटर की पानी की टंकी है और न ही आग बुझाने का कार्यशील यंत्र है।

अग्निशमन विभाग द्वारा दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, फायर डिटेक्शन सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा, क्योंकि उसे ठीक से जोड़ा नहीं गया। इसलिए आपात हालात में लोगों को सतर्क करने के लिए अलार्म नहीं लगा था।

प्राथमिकी के मुताबिक, आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने के लिए आपात निकास की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिसके कारण लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हुई। मरीजों को खिड़की के शीशे तोड़कर बाहर निकाला गया। आग लगने के दौरान इमारत में मौजूद अग्नि संरक्षण प्रणाली ने काम नहीं किया और यहां तक कि परिसर में जल स्रोत भी उपलब्ध नहीं था। इस त्रासदी के सिलसिले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

चिकित्सा अधीक्षक पुष्पराज सामंतसिंघार, पूर्व कार्यपालक अभियंता अमूल्य कुमार साहू (इलेक्ट्रीक मेंटेनेंस), अग्नि सुरक्षा अधिकारी संतोष दास तथा सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता मलय कुमार साहू (इलेक्ट्रीकल मेंटेनेंस) को मंगलवार को गिरफ्तार किया गया।

ओडिशा सरकार को नोटिस

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में एक अस्पताल में आग लगने से 22 लोगों की मौत के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी कर रिपोर्ट देने को कहा है। भुवनेश्वर में एसयूएम अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में 17 अक्टूबर को आग लगने के कारण 22 लोगों की मौत हो गई थी और 40 लोगों को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आयोग ने इस संबंध में मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर छह सप्ताह में रिपोर्ट देने को कहा है।

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि इस अस्पताल को तीन साल पहले ही सुरक्षा उपायों के प्रति आगाह किया गया था, लेकिन प्रशासन ने इसे नजरअंदाज कर दिया। राज्य के 568 अस्पतालों में से केवल 3 को ही अग्नि शमन विभाग से सुरक्षा प्रमाण पत्र हासिल है। आयोग का कहना है कि यदि अस्पताल प्रशासन से इस मामले में लापरवाही हुई है तो यह रोगियों के जीवन के अधिकार का हनन है। उसने हैरानी व्यक्त की है कि राज्य सरकार ने बिना सुरक्षा प्रमाण पत्र के इतने अस्पतालों को काम करने की इजाजत कैसे दे रखी है। आयोग ने राज्य सरकार से यह बताने को कहा है कि उसने हादसे में मारे गये लोगों के परिजनों की क्या सहायता की है और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाये जा रहे हैं।

आग के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो : नड्डा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे. पी. नड्डा ने बुधवार को यहां मांग की कि एक अस्पताल में भीषण आग के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। इस हादसे में 19 लोग मारे जा चुके हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड सम हॉस्पीटल का दौरा करने के बाद नड्डा ने कहा, जांच चल रही है। प्रथम दृष्टया यह सुरक्षा का मुद्दा है, जिसे सुलझाने की जरूरत है। हादसे को चौंकाने वाला, दर्दनाक और चिंताजनक करार देते हुए उन्होंने इसके लिए जिम्मेदार लोगों के लिए सजा की मांग की है।

उन्होंने कहा, जनता में विश्वास बहाली के लिए राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि सोमवार को सम अस्पताल के डायलिसिस वार्ड के आईसीयू में लगी आग से 19 लोग मारे गए, जबकि 106 अन्य घायल हो गए थे।

पीडि़तों को मिलेंगे 5 लाख रुपए

ओडि़शा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने एसयूएम अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड में मारे गए प्रत्येक मरीज के परिजनों को पांच लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की है। पटनायक भुवनेश्वर अस्पताल हादसे के मृतकों के परिवार वालों को पांच-पांच लाख रुपए की सहायता राशि देने की घोषणा की। वह इस मामले में क्षेत्रीय राजस्व आयुक्त को उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच के आदेश तथा घायलों के लिए नि:शुल्क इलाज की घोषणा कर चुके हैं। इसके अलावा शिक्षा और अनुसंधान विश्वविद्यालय के एसयूएम अस्पताल एवं प्रबंधन ने प्रत्येक मृतक के परिवार के लिए पांच लाख रुपए की अनुग्रह राशि और विभिन्न अस्पतालों में भर्ती घायलों के इलाज का खर्च वहन करने की घोषणा की है।

पुलिस ने मंगलवार को अग्निशमन अधिकारी बी बी दास द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के आधार पर चार अधिकारियों को हिरासत में ले लिया जिसमें चिकित्सा निरीक्षक तथा अग्नि सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण निदेशक ने भी अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस बीच केंद्रीय परिवार एवं स्वास्थ्य कल्याण मंत्री जे पी नड्डा और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विभिन्न अस्पतालों का दौरा किया जहां घायल अपना इलाज करा रहे हैं।

दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने एसयूएम अस्पताल का दौरा कर घटना की वजह के बारे में भी जानकारी ली। अग्निशमन कर्मियों ने करीब 106 मरीजों को अग्निकांड से बचा लिया था जिन्हें विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। अग्नि सेवा महानिदेशक बिनाया बेहेरा ने घटना की रिपोर्ट राज्य के मुख्य सचिव को सौंप दी है। ओडिशा मानवाधिकार आयोग ने अग्नि सेवा महानिदेशक और राज्य चिकित्सा सचिव को तीन सप्ताह के अंदर इस हादसे से संबंधित रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

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