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कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा- नारदा स्टिंग मामले की हो सीबीआई जांच, 72 घंटे में दे रिपोर्ट 

Updated: IST evm
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बहुचर्चित नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले की सीबीआई जांच का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को 72 घंटे के भीतर स्टिंग काण्ड की प्राथमिक जांच रिपोर्ट पेश करने और राज्य सरकार को आईपीएस अधिकारी एसएमएच मिर्जा के खिलाफ विभागीय जांच कराने का निर्देश दिया।

कोलकाता. कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बहुचर्चित नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले की सीबीआई जांच का निर्देश दिया। हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को 72 घंटे के भीतर स्टिंग काण्ड की प्राथमिक जांच रिपोर्ट पेश करने और राज्य सरकार को आईपीएस अधिकारी एसएमएच मिर्जा के खिलाफ विभागीय जांच कराने का निर्देश दिया। दूसरी राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की। कलकत्ता हाईकोर्ट की मुख्य कार्यकारी न्यायाधीश निशिता म्हात्रे और न्यायाधीश टी. चक्रवर्ती की खण्ड पीठ ने राज्य सरकार की मांग को खारिज कर दिया और सीबीआई को नारदा स्टिंग ऑपरेशन की प्रारंभिक जांच करने का निर्देश दिया।

न्यायाधीश म्हात्रे ने सीबीआई को 24 घंटे के भीतर हाईकोर्ट की अधिकृत तीन सदस्यीय कमेटी से स्टिंग ऑपरेशन के फुटेज, स्टिंग ऑपरेशन में इस्तेमाल लैपटॉप और पेन ड्राइव सहित अन्य उपकरण अपने कब्जे में लेने को कहा। साथ ही 72 घंटे के भीतर प्राथमिक जांच रिपोर्ट कोर्ट को सौंपेने का निर्देश दिया। खंडपीठ ने राज्य सरकार को आईपीएस एसएमएच मिर्जा के खिलाफ विभागीय जांच कराने और जरूरत पडऩे पर उन्हें निलंबित करने को कहा। दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हम कोर्ट के इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। इस लिए राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जाएगी।

तृणमूल नेता देखे गए थे घूस लेते

नारदा पोर्टल के सीईओ मैथ्यू सैम्युअल की ओर से किए गए स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो पिछले साल मार्च महीने में राज्य विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रकाश में आए थे। वीडियो में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के नेता, सांसद, राज्य के मंत्री और आईपीएस अधिकारी समेत 12 प्रभावशाली लोगों को नोटों की गड्डी लेते देखा गया था। इस स्टिंग कांड से राज्य की राजनीति में खलबली मच गई थी। तभी से विपक्षी पार्टियों ने इसकी सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी और हाईकोर्ट में तीन जनहित याचिकाएं दाखिल की थी।

भ्रष्टाचार बहुत बड़ा अपराध-जज

हाई कोर्ट ने तीनों मामलों की एक साथ सुनवाई शुरू की और इस दिन सुबह अपना फैसला सुनाया। न्यायाधीश म्हात्रे ने कहा कि फॉरेंसिक जांच से साबित हो गया है कि स्टिंग ऑपरेशन के फुटेज को विकृत नहीं किया गया है। इससे महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। भ्रष्टाचार बहुत बड़ा अपराध है। पुलिस की भूमिका दुर्भाग्यपूर्ण है। इसमें राज्य के राजनेता लिप्त हैं। फुटेज में वे कोई न कोई काम कराने के लिए पैसे लेते नजर आ रहे हैं। यह लोगों के विश्वास पर आघात है और लोकतंत्र के लिए खतरा है। लोगों के विश्वास को बनाए रखने के लिए इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

कठपुतली बन कर रह जाएगी पुलिस

पीठ ने कहा कि पुलिस कांड की निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती। वह कठपुतली बन कर रह जाएगी। इस लिए कांड की सीबीआई से जांच कराने का निर्देश दिया जा रहा है। न्यायाधीश टी. चक्रवर्ती ने भी न्यायाधीश म्हात्रे का समर्थन किया। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार इस मामले की राज्य पुलिस से जांच करवाने की मांग कर रही थी।

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