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ट्रिपल मर्डर केस में शहाबुद्दीन समेत सभी आरोपी बरी, सवाल ये कि हत्या की किसने 

Updated: IST Sahabuddin
28 साल पुराने ट्रिपल मर्डर केस में सोमवार को राजद के बाहुबली नेता मो. शहाबुद्दीन बेगुनाह करार देते हुए बरी कर दिए गए। झारखंड की एक अदालत ने पूर्व सांसद को बरी करने का फैसला सुनाया है। इस निर्णय ने कई सवालों को भी खड़ा कर दिया है।

नई दिल्ली। 28 साल पुराने ट्रिपल मर्डर केस में सोमवार को राजद के बाहुबली नेता मो. शहाबुद्दीन बेगुनाह करार देते हुए बरी कर दिए गए। झारखंड की एक अदालत ने पूर्व सांसद को बरी करने का फैसला सुनाया है। इस केस में पेशी के लिए पुलिस ने तेजाब कांड में सजा काट रहे शहाबुद्दीन के लिए तिहाड़ जेल से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग की व्यवस्था की थी। तकनीक के माध्यम से शहाबुद्दीन अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अजीत कुमार सिंह के सामने पेश किए गए। जहा उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। कोर्ट के इस निर्णय से यह केस उस कोर्ट में समाप्त हो गया। मगर इस निर्णय ने कई सवालों को भी खड़ा कर दिया है।

हत्या किसने की ?
कोर्ट ने इस मामले में सभी आरोपियों को एक-एक कर बेगुनाह करार देते हुए बरी कर दिया। इस केस में 9 लोग आरोपी थे। शहाबुद्दीन को बरी किए जाने से पहले केस में कोर्ट रामा सिंह को बरी कर चुकी है। बता दें कि राम सिंह उर्फ रामशंकर सिंह वर्तमान में वैशाली लोकसभा क्षेत्र से सांसद है।

12 जज और 20 वकील बदले गए
28 साल तक चली इस केस की सुनवाई के दौरान 12 जज और 20 सरकारी वकील बदले जा चुके हैं। लेकिन इतने लंबे समय के बाद इस केस में सबूतों के अभाव में जज को आरोपी को बरी करना पड़ा।

पुलिस थाने के सामने ही की थी हत्या
घटना 02 फरवरी 1989 की है। जानकारी के अनुसार पूर्वी सिंहभूम युवा कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा, रेलवे ठेकेदार आनंद राव व जनार्दन चौबे की हत्या कार पर सवार अपराधियों ने जुगसलाई थाने के सामने अंबेसडर कार (डबल्यूएमए-5399 ) पर कारबाइन से अंधाधुंध फायरिंग कर की थी।

गवाह को पेश न कर सकी पुलिस
ट्रिपल मर्डर के इस केस में पुलिस प्रत्यक्षदर्शी केटी राव और शिकायतकर्ता ब्रहेश्वर पाठक का बयान कोर्ट में दर्ज नहीं करा सकी। यह पुलिस की लचर व्यवस्था को बताने के लिए काफी है।

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