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Photo Icon सरपंच और सचिव की कहानी सून ग्रामीण हुए खुश, अब रोना पड़ रहा, पढ़ें पूरी कहानी

Updated: IST sarpanch and the secretary
सरकार दे रही 12000 रुपए एक शौचालय के लिए लेकिन यहां मिलता है मात्र इतना जिसमें बन पा रहा सिर्फ मुर्गी का डेरा। जनप्रतिनिधि ग्रामीणों को बना रहे बेवकूफ।

दंतेवाड़ा. दक्षिण बस्तर में पंचायतों को ओडीएफ कराना बड़ा चुनौती है। पीएम मोदी का सपना स्वच्छता को लेकर बड़ा सपना है। देश भर में महाअभियाान चल रहा है। कटेकल्याण में एक भी पंचायत ओडीएफ नहीं हुई है। इसके पीछे की कहानी मातहतों के बेईमानी है। माओवाद प्रभावित क्षेत्र में भ्रष्टाचार के पैर पसरे हुए हैं। शौचालय निर्माण पर 12 हजार रुपए खर्च होने हैं, लेकिन सचिव और सरपंच दोनों मिलकर ग्रामीणों को बेवकूफ बनाने में लगे हैं। ग्रामीणों के लिए सचिव ही बड़ा अधिकारी है। उसकी बताई कहानी पर ही विश्वास करते हैं। बात काबड़ गांव की है।

ग्रामीणों को था पूरा भरोसा

इस पंचायत के डुमाम पारा और सरपंच पारा में ग्रामीणों को पहले मिट्टी की ईंट से शौचालय बनाने के आदेश दिए गए। मानसून ने दस्तक दी तो सचिव लक्ष्मण ने 100 र्इंट मुखिया को दी है। शौचालय बने अथवा न बने, इसके बाद उस घर का मालिक जाने। कई शौचालयों में तो मिट्टी की 10 से 15 र्इंट इस्तेमाल की गई। जो र्इंटे दी गई थी वो कम थी। इस बड़े भ्रष्टाचार के बाद भी ग्रामीणों को लग रहा है सचिव बहुत मदद कर रहा है, लेकिन इस सचिव को जरा सा भी तरस नहीं आया जो ग्रामीणों को उस पर भरोसा अभी जता रहे हैं।

सचिव के कार्य से अनजान थे ग्रामीण

हालात यह है कि सचिव ने एक शौचालय के पीछे बजट निर्धारित कर दिया है। ग्रामीणें को 80 सीमेंट की र्इंट, तीन बोरी सीमेंट और और एक चार फि ट की उस शौचालय को ढकने के लिए सीमेंट की शीट दी है। सचिव ने साफ कह दिया है कि इतने सामान में ही शौचालय का निर्माण करना है। ग्रामीणों को लग रहा है सचिव ने उनको बहुत कुछ दे दिया है, वे सभी लगे हुए हैं। कुछ पक्की और कुछ कच्ची ईंटों को जोड़ कर शौचालय की जगह मुर्गी के दड़बे तैयार करने में लगे हुए हैं। ग्रामीण कहते है कि इसी तरह से डुमाम पारा में शौचालय तैयार किए जा रहे हैं। पूरा दृश्य कहता है कि सचिव की झूठी कहानी पर विश्वास कर ग्रामीण रो रहे हैं। इस सबंध में कटेकल्याण के जनपद सीईओ से बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन नहीं लगा।

SAUCHALAYA  in Dantewada

इंदिरा आवास वालों को भी दी कम ईंट

डूमाम पारा को सरपंच व सचिव ने एक तराजू में भी नहीं तोला। गांव के लोगों का कहना था कि जिन लोगों को इंदिरा आवास मिला है उनको शौचालय के लिए 80 र्इंट दी गई है। सचिव ने कहा क्या करें ऐसा ही प्रावधान है। गांव के लोग भी बात मान गए और जिन लोगों को इंदिरा आवास मिला था उनकों 80 ईंट ही शौचालय के लिए दी गई।

कम पड़ी सीमेंट शीट तो लगाई मिट्टी की शीट

डुमाम पारा का रहना वाले बुधराम बताता है कि उसको इंदिरा आवास के नाम पर महज 80 ईंट दी गई। मेहनत कर शौचालय बनाया, लेकिन बनाने के दौरान ईंट कम पड़ी तो 15 से 20 ईंट मिट्टी की बीच-बीच में जोड़ी। इसके बाद शौचालय बन सका। इसी तरह विधवा बत्ती ने तो यहां तक कहा कि उसको शौचालय नहीं मिल सकता है। उसके पति जयराम की मौत दो साल पहले सल्फी के पेड़ से गिरने से हो चुकी है। सचिव ने कहा कि घर में कोई शौचालय बनाने वाला नहीं है। वह चुप होकर रह गई। इस महिला ने सचिव से कई बार विधवां पेंशन के लिए भी बोला, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है। सच तो ये है कि सचिव की बताई झूठी कहानी पर कावडग़ांव के लोग यकीन कर रहे हैं। साथ ही वो लोग जूझ रहे हैं।

जितना बन सकता था बनाया

ग्रामीण घुसा गावड़े कहता है कि 3 बोर सीमेंट, 85 ईंट, लैट्रिन शीट और शौचालय को गेट सचिव ने दिया है। इसके बाद बोला कि शौचालयों में सरकार के दिए गए पैसों से अधिक खर्च हो रहा है। इससे ज्यादा पैसा वह नहीं लगा सकता है। न ही वह दे सकता है। घुसा गावड़े का कहना है जो सामान दिया है उसमें इतना बड़ा ही शौचालय बनाया जा सकता है।

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