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हिंदुत्व मामले पर 7 जजों ने शुरू की सुनवाई

Updated: IST delhi news
चुनाव में धर्म के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई शुरू हो गई है। 'हिंदुत्व धर्म नहीं बल्कि जीवनशैली है' इस फैसले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की पीठ ने दो दशक बाद फिर से विचार करना शुरू किया है

नई दिल्ली. चुनाव में धर्म के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई शुरू हो गई है। 'हिंदुत्व धर्म नहीं बल्कि जीवनशैली है' इस फैसले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के सात जजों की पीठ ने दो दशक बाद फिर से विचार करना शुरू किया है। पीठ बुधवार को भी इस पर सुनवाई करेगी। पीठ में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस एबी बोब्डे, जस्टिस आदर्श कुमार गोयल, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव शामिल हैं।

जस्टिस जेएस वर्मा की अगुआई वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने दिसंबर 1995 में फैसला दिया था कि चुनाव में हिंदुत्व का इस्तेमाल गलत नहीं है, क्योंकि हिंदुत्व धर्म नहीं बल्कि एक जीवन शैली है।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि हिंदुत्व शब्द भारतीय लोगों के जीवन पद्धति की ओर इशारा करता है। इसे सिर्फ उन लोगों तक सीमित नहीं किया जा सकता, जो अपनी आस्था की वजह से हिंदू धर्म को मानते हैं। इस फैसले के तहत, कोर्ट ने जनप्रतिनिधि कानून के सेक्शन 123 (3) के तहत हिंदुत्व के धर्म के तौर पर इस्तेमाल को भ्रष्टाचार मानने से इनकार कर दिया था।

2014 में केस सुप्रीम कोर्ट की 7 जजों की पीठ को सौंपा गया : 1995 के फैसले के बाद इसी मुद्दे पर कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के सामने आई। पांच जजों की पीठ ने इस मामले को 2014 में सात जजों की बेंच के हवाले कर दिया।

जोशी ने चुनाव में महाराष्ट्र को हिंदू राज्य बनाने का किया था वादा : 1992 में हुए दंगों के बाद शिवसेना नेता मनोहर जोशी ने चुनाव में ये वादा किया था कि महाराष्ट्र भारत का पहला हिंदू राज्य बनेगा। बॉम्बे हाईकोर्ट ने मनोहर जोशी के चुनाव को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उन्होंने धर्म के आधार पर वोट मांगे थे। जिसके खिलाफ जोशी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिस पर जस्टिस वर्मा ने यह फैसला सुनाया था।

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