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दो बाघों को बचाने का फायदा मंगलयान से ज्यादा

Updated: IST delhi news
दो बाघों को बचाने से होने वाला फायदा मंगलयान अभियान से भी ज्यादा है। मंगलयान पर देश के 450 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। जबकि, दो बाघों को बचाने से करीब 520 करोड़ रुपए का फायदा होता है

नई दिल्ली. दो बाघों को बचाने से होने वाला फायदा मंगलयान अभियान से भी ज्यादा है। मंगलयान पर देश के 450 करोड़ रुपए खर्च हुए थे। जबकि, दो बाघों को बचाने से करीब 520 करोड़ रुपए का फायदा होता है। हालांकि, ये प्रत्यक्ष तौर पर हमें दिखता नहीं।

'इकोसिस्टम सर्विसेज' जर्नल में प्रकाशित 'मेकिंग द हिडन विजिबल : इकोनॉमिक वैल्यूएशन ऑफ टाइगर रिजव्र्स इन इंडिया' शीर्षक वाले इस लेख के अनुसार इतना फायदा कोई भी इंडस्ट्री या सर्विस नहीं दे सकती।

भारत को 5.7 लाख करोड़ का फायदा

भारत में वयस्क बाघों की संख्या 2,226 है जिसका मतलब है कि इनको बचाने पर हमारा पूंजीगत लाभ 5.7 लाख करोड़ रुपए का होगा। इस राशि को वैज्ञानिकों के अनुसार 'स्टॉक बेनिफिट्सÓ कहा जाता है। एक टाइगर पर होने वाले लाभ को फ्लो बेनिफिट कहा जाता है जिसका आकलन कई स्तरों पर किया जाता है।

356 गुना लाभ

देश में मौजूद छह टाइगर रिजर्व (कॉर्बेट, कान्हा, काजीरंगा, पेरियार, रणथंभोर और सुंदरबन) पर होने वाला सालाना खर्च मात्र 23 करोड़ रुपए है। जबकि, जैव वैज्ञानिकों के अनुसार एक बाघ से लगभग 2.19 करोड़ रुपए का पारिस्थितिक लाभ होता है। वैज्ञानिक इसे एक तरह का ब्याज बताते हैं। शोध के अनुसार बाघों पर होने वाले खर्च का 356 गुना तक का अप्रत्यक्ष लाभ हमें मिलता है।

भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन मैनेजमेंट के प्रोफेसर मधु वर्मा के मुताबिक भारत के टाइगर रिजर्व केवल दुनिया के आधे बाघों को पनाह ही नहीं देते बल्कि ये बायोडायवर्सिटी को बनाए रखने में मददगार हैं। इससे इकोनॉमिक, सोशल और कल्चरल फायदे भी होते हैं।

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