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सड़क का सफर में पुल-पुलिया से खतरा

Updated: IST Dewas
जिले में दम तोड़ रहे जिले केपुल-पुलिया

देवास. जिले में वर्षों पुरानी अंग्रेजों के जमाने की पुल-पुलिया अब अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। कमलापुर में बुधवार को बस के गुजरते ही करीब 40 साल पुरानी पुलिया धंस गई थी। पुलिया के धंसने से कई ग्रामों का आवागमन कमलापुर से बड़ी के बीच में बंद हो गया है। इसी तरह की पुलिया जिले में लोनिवि के अंतर्गत आने वाली और भी हैं। इन पुलियाओं का रख-रखाव सिर्फ कागजों पर प्रतिवर्ष बारिश के दिनों में होता है। बारिश से पहले थोड़ी बहुत रिपेयरिंग कर काम चला दिया जाता है। अगर समय रहते अंग्रेजों के जमाने की पुलियाओं पर ध्यान नहीं दिया, किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। जिले से इंदौर-बैतूल राष्ट्रीय राज्य मार्ग व आगरा-मुंबई हाईवे निकला है। आगरा-मुंबई मार्ग पर ग्राम चिड़ावद के पास की पुलिया खराब हो रही है। इंदौर-बैतूल हाईवे पर आने वाली कालीसिंध, कासरनी व दतूनी नदी की पुलिया अंग्रेजों के जमाने की बनी हैं। बारिश के दिनों में सतत् बारिश चलती रहती है, तो यात्रियों को घंटों तक बाढ़ के पानी के उतरने का इंतजार करना पड़ता है। जिलेभर में छोटी-बड़ी नदियों पर अंग्रेजों के जमाने के पुल-पुलिया जानलेवा बनते जा रहे हैं।
कन्नौद. इंदौर-बैतूल हाईवे पर अंग्रेजों के जमाने के पुल- पुलिया दयनीय स्थिति में है। नगर के समीप जोड़ नदी व बागनखेड़ा की नदी पर पुल जर्जर स्थिति में पहुंच गई है। बारिश के समय पुल पर पानी आने की स्थिति में घंटों तक रास्ता बंद रहता है। पुल पर बड़े-बड़े गड्ढे हो रहें हैं, जो दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। रतवाय रोड पर पुरानी पुलिया को ही निर्माण कंपनी बड़ी बना रही है, जो कभी भी दुर्घटना कारण बन सकती है। इसी प्रकार हाईवे पर पुनासा से कन्नौद के बीच सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। पुरानी पुलिया को नहीं तोड़ते हुए उस पर ही बड़ी पुलिया का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इस तरह से निर्माण कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। कासरनी नदी पर करीब 100 साल पुरानी पुलिया बनी है, जिसकी स्थिति खराब हो रही है।
बागली. बागली से 7 किमी दूर बरझाई घाट स्थित सिपाही खोदरा की पुलिया करीब 70 वर्ष पुरानी होकर ऐरन से बनी हुई है। 30 फीट की यू टर्न लिए पुलिया है। इस पर से प्रतिदिन सैंकड़ों वाहन गुजरते हैं। पुलिया साल दर साल कमजोर स्थिति में पहुंच रही है। बारिश के दिनों में पुलिया के नीचे तेजी से पानी बहता रहता है।
हाटपीपल्या. तहसील मुख्यालय से 4 किमी दूर देवास रोड पर ग्राम पंचायत मनासा में करीब 50 वर्ष पुराना पुल गत बारिश में आधा बह गया था। इस पुलिया की फिर से मरम्मत कर सही किया गया है, लेकिन इसकी नींव कमजोर होने से यह भी किसी दिन भर-भराकर गिर सकता है। इस पुलिया से हरदा, उदयनगर, बागली, खातेगांव सहित कई शहरों व गांवों के लोग वाहनों से निकलते हैं। सिद्धीगंज-हाटपीपल्या मार्ग पर देवगढ़ स्थित कालीसिंध नदी पर करीब 21 वर्ष पहले छोटे रपटे का निर्माण किया था। इस रपटे पर भी थोड़ी ही बारिश में पानी आने से रास्ता बंद हो जाता है। बार-बार इसमें उफान आने से यह भी कमजोर हो गया है।
सतवास. सतवास-खातेगांव मार्ग पर ग्राम पीपलकोटा के पास से गुजरने वाली दतूनी नदी का रपटा कुछ देर की तेज बारिश से उफान पर आ जाता है। अंग्रेजों के जमाने के समय से बने इस रपटे पर उफान आने से यह जर्जर स्थिति में पहुंच रहा है।
समय-समय पर करते हैं निरीक्षण
लोनिवि के कार्यपालन यंत्री दीपेश गुप्ता ने इस संबंध में बताया कि रेत से ओवरलोड ट्राले व डंपरों की वजह से कमलापुर के पास का पुल धंसा था। हम समय-समय पर पुल-पुलियाओं का निरीक्षण कर करते हैं। कमजोर पुलियाओं की बारिश से पहले रिपेयरिंग की जाती है।

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