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मलेरिया कंट्रोल में सलाना 15 करोड़ रुपए खर्च, बढ़ा मृतकों का आंकड़ा

Updated: IST malaria
शिशु रोग विशेषज्ञ एवं मलेरिया रिसर्चर डॉ अमर वर्मा कहते हैं कि पिछले दो तीन सालों में मलेरिया के स्वरूप में काफी बदलाव आया है।

धनबाद। झारखंड में मलेरिया अब अपना कहर बरपा रहा है। पिछले करीब एक पखवाड़े में ही मलेरिया से 29 लोगों की मौत हो चुकी है। चाईबासा, साहिबगंज, पाकुड़ के बाद अब स्वास्थ्यमंत्री के गृह जिले तक मलेरिया से मौत हो चुकी हो, पर राज्य का स्वास्थ्य महकमा मलेरिया पर काबू पाने की जगह आंकड़ों के खेल में उलझा है।

हालांकि सूबे में मलेरिया का यह हाल तब है जब राज्य में हर साल 15 करोड़ राशि मलेरिया के रोकने पर खर्च की जाती है। पिछले दो वर्षो में झारखंड के 24 में से 22 जिलों मलेरिया मौत की बीमारी बनकर उभरा है। कई जिलों में एपीआई यानि वार्षिक पारासाइट इंडेक्स 4 से ज्यादा है।

गांव से लेकर शहर तक बड़ी संख्या में लोग मलेरिया के शिकार हो रहे हैं और सबसे हैरान करने वाली बात यह कि मलेरिया

अब बुखार तक सीमित नहीं रहकर यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर भी अटैक करने लगा है। शिशु रोग विशेषज्ञ एवं मलेरिया रिसर्चर डॉ अमर वर्मा कहते हैं कि पिछले दो तीन सालों में मलेरिया के स्वरूप में काफी बदलाव आया है।

अब ब्रेन मलेरिया, किडनी मलेरिया, आंत का मलेरिया और न जाने कौन कौन से प्रकार सामने आ गए हैं। इस वर्ष अक्टूबर तक के ही आंकड़ों की बात करें तो 85 हजार से ज्यादा लोग मलेरिया से ग्रस्त हो चुके हैं। राज्य में मलेरिया खतरनाक तरीके से लोगों को अपने गिरफ्त में ले रहा हो तो दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग का मलेरिया कंट्रोल महकमा आंकड़ों में उलझा है।

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